|
लंदन विस्फोटः चश्मदीदों के अनुभव | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लंदन में गुरूवार को हुए बम धमाकों के बाद कुछ आम प्रत्यक्षदर्शियों ने अपना अनुभव बताया. बलिंडा सीब्रुक, रसेल स्क्वायर मैं सामने वाली बस में बैठी थी जब मैंने एक बड़ा धमाका सुना. मैंने मुड़कर देखा तो डबल डेकर बस का आधा हिस्सा हवा में था. एक बहुत ज़बरदस्त विस्फोट था, हवा में काग़ज़ उड़ रहे थे और मुझे लगता है कि बस का नंबर 205 था. हो सकता है कि काफ़ी लोग मारे गए हों क्योंकि उस समय सभी बसों में काफ़ी लोग सवार थे. एंडी एबरनथी, लंदन मैं पिकाडिली लाईन में थी जो किंग्स क्रॉस स्टेशन और रसेल स्क्वायर स्टेशन के बीच में थी. तभी ज़ोर का धमाका हुआ और ट्रेन पटरी से उतर गई. चारो-ओर धुआँ था मगर कहीं भी आग नहीं दिख रही थी. कई लोग गंभीर रुप से घायल थे, कई लोगों को सर पर गहरी चोटें लगी थी. आराश कज़ैरोनी एक बड़ा धमाका हुआ और ट्रेन रूक गई. जैसे ही धुआँ ट्रेन के डब्बे में आने लगा लोग घबराने लगे और चिल्ला-चिल्लाकर रोने लगे. एक व्यक्ति ने सभी को शांत रहने को कहा और फिर सभी को ट्रेन के डब्बे से उतारकर पटरी के साथ-साथ चलकर सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया गया. स्कॉट वैनबोर्न, ऑल्डगेट मैंने ट्रेन की पटरी पर तीन शव देखे. इतना भयानक था कि मैं देख भी नहीं सका. मुझे लगता है कि कुछ लोग ट्रेन के डब्बे में भी थे. मुझसे देखा भी नहीं गया. हमें प्लेटफ़ॉर्म पहुँचने में क़रीब आधा घंटा लगा. दफ़्तर जाने का समय था इसलिए बहुत भीड़ थी. प्लेटफ़ॉर्म पर पुलिस थी और उन्होंने घायलों की देख-भाल शुरु की. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||