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बुधवार, 20 अप्रैल, 2005 को 15:11 GMT तक के समाचार
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'अन्य धर्मों के साथ संबंधों को बढ़ावा देंगे'
ब्रिटेन के गार्डियन अख़बार में पोप की तस्वीर
कुछ उदारवादी ईसाई जोज़फ़ रैत्सिंगर को कट्टरपंथी मानते हैं
कैथोलिक ईसाइयों के नए धर्मगुरु पोप बेनेडिक्ट 16वें ने कहा है कि वे पहले से चली आ रही नीतियों को जारी रखते हुए अन्य धर्मों और ईसाई चर्चों के साथ संबंधों को आगे बढ़ाएँगे.

अपने आधिकारिक बयान में उन्होंने कहा कि वे मुसलमानों, यहूदियों और अन्य ईसाई समुदायों के साथ खुला और ईमानदारी से किए जाने वाला वार्तालाप चाहते हैं.

जर्मनी के कार्डिनल रह चुके नए पोप जोज़फ़ रैत्सिंगर की रूढ़ीवादी कैथोलिक ईसाइयों ने ये कहते हुए प्रशंसा की है कि वे ईमानदार हैं और अपने विचारों पर टिके रहने वाले व्यक्ति हैं.

लेकिन कई लोगों ने शंका ज़ाहिर की है कि वे कहीं ज़रूरत से ज़्यादा कट्टर और रूढ़ीवादी न हों.

मुस्लिम बाहुल तुर्की में तो उनके चुनाव पर निराशा जताई गई और समाचार माध्यमों ने ये भी याद दिलाया कि उन्होंने तुर्की के यूरोपीय संघ में शामिल किए जाने का विरोध किया था.

लेकिन बीबीसी के रोम संवाददाता का कहना है कि बुधवार को नए पोप के शब्दों से सबसे मिलजुलकर चलने का संकेत मिलता है.

प्रार्थना सभा

बुधवार को नए पोप ने वैटिकन के सिस्टीन चैपल में प्रार्थना की.

सिस्टीन चैपल में हुई ये प्रार्थना सभा निजी थी जो उन कार्डिनलों के लिए थी जिन्होंने पोप को चुना. लेकिन दुनिया भर में इसे टेलीविज़न पर प्रसारित किया गया.

इससे पहले मंगलवार को रोमन कैथोलिक चर्च के 115 कार्डिनल्स ने चार दौर के मतदान के बाद जोज़फ़ रैत्सिंगर को लगभग एक अरब रोमन कैथोलिक ईसाइयों का नया पोप यानी धर्मगुरु चुना था.

पोप बेनेडिक्ट 16वें रविवार को औपचारिक तौर पर एक समारोह में अपना कार्यभार संभालेंगे.

जोज़फ़ रैत्सिंगर जर्मनी से कार्डिनल रहे हैं और लगभग 20 साल तक स्वर्गीय पोप जॉन पॉल द्वितीय के क़रीबी माने जाते रहे.

जब चुनाव के बाद वे वैटिकन में सेंट पीटर चर्च की बैलकनी में आए तो हज़ारों की संख्या में मौजूद लोगों ने तालियाँ बजाकर और नारे लगाकर उनका स्वागत किया.

श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने पूरी दुनिया को उनके लिए प्रार्थना करने का अनुरोध किया.

इससे पहले वैटिकन के सिस्टीन चैपल की चिमनी से सफ़ेद धुआँ निकालकर और घंटियाँ बजाकर नए पोप के चुनाव का संकेत दिया गया था.

मंगलवार को जैसे ही चर्च की घंटियाँ बजने लगीं वैसे ही लोगों ने - "पोप अमर रहें" -के नारे लगाने शुरु कर दिए.

नए पोप का चुनाव दो-तिहाई बहुमत से हुआ.

इससे पहले तीन बार मतदान के बाद फ़ैसला नहीं हो पाया था और काले धुएँ से लोगों को बताया गया था कि निर्णय नहीं हो पाया है.

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