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पोप जॉन पॉल द्वितीय का निधन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वैटिकन ने घोषणा की है कि पोप जॉन पॉल द्वितीय का निधन हो गया है. वैटिकन के अनुसार पिछले कुछ घंटों में 84 वर्षीय पोप नीम बेहोशी की हालत में थे और वो बार-बार चेतना खो रहे थे. हालांकि इस अवस्था में भी पोप अपने आसपास के लोगों को यदा-कदा देख रहे थे. गुरुवार से पोप की तबीयत गंभीर रुप से ख़राब थी. उन्हें दिल और गुर्दे में समस्याएं थीं. उनका रक्तचाप लगातार कम हो रहा था और उन्हें सांस लेने में दिक्कतें आ रही थीं. शुक्रवार को पोप ने वैटिकन के सभी अधिकारियों को अलविदा भी कहा था और बाईबिल के कुछ अंश पढ़कर सुनाने को कहा था. उन्होंने ईसा मसीह को सलीब पर चढ़ाए जाने का ब्यौरा बाइबिल से पढ़कर सुनाए जाने के लिए कहा था. 1978 में पोप बने जॉन पॉल द्वितीय पिछले 455 वर्षों में पोप बनने वाले गैर इतालवी नागरिक थे. पोप बनने वाले वो पहले पोलिश नागरिक भी थे. शुक्रवार से ही श्रद्धालुओं की पूरी भीड़ वैटिकन में जुटनी शुरु हो गई थी और वो पोप के लिए प्रार्थना कर रहे थे. दुनिया भर में पोप जॉन पॉल द्वितीय को धर्मगुरू ही नहीं, न्याय को धर्म का हिस्सा मानने वाले व्यक्ति के रूप में देखा जाता था. शायद यही वजह रही कि उनका सम्मान करने वाले दुनिया के हर देश में मौजूद हैं.
कैथोलिक ईसाई संप्रदाय के धर्मगुरू बनने के बाद पोप कभी भी वैटिकन की चारदीवारी के बीच नहीं घिरे रहे और ख़ूब यात्राएँ कीं. उन्होंने कभी भी राजनीतिक सीमाओं को स्वीकार नहीं किया. वे कई ऐसे देशों में गए जहाँ पहले कोई शीर्ष ईसाई धर्मगुरू नहीं गया. उदारता 1981 पोप के जीवन का एक अहम वर्ष था जब तुर्की के एक कट्टरपंथी मुस्लिम महमत अली अगका ने वेटिकन में सेंट पीटर्स गिरजाघर के पास पोप को गोली मार दी जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए. लेकिन पोप ने उदारता की मिसाल पेश करते हुए इस व्यक्ति को माफ़ कर दिया. उन्होंने न सिर्फ़ माफ़ किया बल्कि अनेक अवसरों पर सदियों पहले ईसाई धर्म मानने वाले लोगों की ज़्यादतियों के लिए दुनिया से क्षमायाचना की. रोग ने उन्हें कमज़ोर कर दिया लेकिन उनके विचार, उनकी गतिविधियों और जनकल्याण के प्रति उनकी अदम्य प्रतिबद्धता कम नहीं हुई. |
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