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नए पोपः बेनेडिक्ट सोलहवें का जीवन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
78 वर्षीय कार्डिनल जोज़फ़ रैत्सिंगर रोमन कैथोलिक ईसाईयों के नए धर्मगुरू चुने गए हैं. पोप जॉन पॉल द्वितीय के उत्तराधिकारी को बेनेडिक्ट 16 के नाम से जाना जाएगा. कार्डिनल जोज़फ़ रैत्सिंगर का जन्म 1927 में जर्मनी के एक कृषक परिवार में हुआ. मगर उनके पिता एक पुलिसकर्मी थे. युद्धकाल में उनकी शिक्षा में व्यवधान पड़ा क्योंकि उन्हें म्युनिख़ में एक विमानभेदी यूनिट में शामिल होना पड़ा. उनके समर्थकों का कहना है कि नाज़ी शासन के दौरान उनका ये विश्वास प्रबल हुआ कि सच्चाई और आज़ादी के लिए चर्च को आगे आना होगा. मगर उनके आलोचक भी हैं जो ये कहते हैं कि वे चर्च में बहस को दबाया करते रहे हैं. जर्मनी में धार्मिक मामलों के जानकार वोल्फ़गैंग कूपर ने पोप के चुनाव से पहले कहा था कि अगर रात्सिंगर पोप बनते हैं तो इससे चर्च में फूट पड़ेगी. उन्होंने कहा, "अगर कार्डिनल जोज़फ़ रैत्सिंगर पोप बनते हैं तो चर्च के नेतृत्व औऱ अनुयायियों में में एक बड़ा अंतर बन जाएगा." उनका कहना था, "कार्डिनल जोज़फ़ रैत्सिंगर एक वैज्ञानिक हैं जो बौद्धिक चर्चा को अधिक महत्व देते हैं. मगर कई कैथोलिक ऐसे पादरी और बिशप को पोप चाहते हैं जो दिलों को छू सके." रात्सिंगर ने इसके पहले कई राजनीतिक मुद्दों पर कड़ा रूख़ रखा था. जैसे उन्होंने पिछले वर्ष अमरीका में हुए राष्ट्रपति चुनाव में गर्भपात का समर्थन करनेवाले नेताओं को कम्युनियन दिए जाने का विरोध किया. साथ ही उन्होंने तुर्की को यूरोपीय संघ का सदस्य बनाए जाने का भी विरोध किया. समझा जा रहा है ईसाईयों के पहले धर्मगुरू सेंट पीटर के 265वें अनुयायी के रूप में कठोर सही मगर चर्च के बारे में वे रूख़ स्पष्ट अवश्य रखेंगे. |
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