BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शुक्रवार, 01 अप्रैल, 2005 को 14:16 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
कैसे होगा नए पोप का चुनाव?
पोप जॉन पॉल द्वितीय
सबसे लंबे समय तक पोप रहे हैं जॉन पॉल द्वितीय
पोप का निधन होते ही दुनिया भर के सभी कार्डिनल जुटते हैं नए पोप के चुनाव के लिए.

ये सभी लोग कानक्लेव में बैठते हैं और एक बार कानक्लेव शुरु हो जाए तो उन्हें तब तक यहीं रहना होता है जब तक नया पोप चुन न लिया जाए.

इस समय दुनिया भर में 184 कार्डिनल हैं जिसमें से 117 कार्डिनल पोप को चुनने के लिए वोट देंगे.

कानक्लेव

आधुनिक युग में मोबाइल, सेल्युलर फोन और ट्रांसमीटर रेडियो के आने के बाद से कानक्लेव को गुप्त रखने पर और अधिक ज़ोर दिया जा रहा है. जहां सारे कार्डिनल बैठते हैं उस पूरे क्षेत्र की जांच हो जाती है कि कोई जानकारी यहां से किसी भी तरह बाहर न जाए.

सारे कार्डिनल सिस्टीन चैपल में ही खाना खाते हैं, वोट डालते हैं और सोते भी हैं. सभी रेडियो, टेलीविज़न और संचार के अन्य साधनों को हटा दिया जाता है और उन पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है.

कार्डिनलों की देखभाल के लिए रसोइए, डाक्टर और कुछ नौकर होते हैं. कोई भी कार्डिनल अपने किसी सहयोगी को लेकर कानक्लेव में नहीं जा सकता.

अस्सी साल से कम सभी कार्डिनलों के जमा होने के बाद लैटिन भाषा में आदेश दिया जाता है एक्सट्रा ओमंस यानी चुनाव प्रक्रिया में जो भी शामिल नहीं हो वो बाहर चले जाएं और गेट कर दिया जाता है बंद.

इसके बाद पूरी दुनिया करती है बस और बस इंतज़ार नए पोप के चयन का

मतदान प्रक्रिया

वोट डाले जाने की प्रक्रिया के बारे में कभी भी पूरी तरह वैटिकन ने स्पष्ट जानकारी नहीं दी है. इस चुप्पी को तोड़ने की सज़ा होती है धर्म से निकाला.

हर कार्डिनल एक कार्ड पर अपने पोप का नाम लिख कर प्लेट में रख देता है. इन सभी को एक जगह जमा कर दिया जाता है. कोई बातचीत नहीं होती है.

जब सभी कार्डिनल अपने पसंदीदा पोप का नाम लिख देते हैं तो उनकी गिनती होती है जिन्हें सुई धागे में पिरो दिया जाता है. दो दौर की गिनती के बाद इन कार्डों को जला दिया जाता है.

1975 पोप पॉल VI ने चुनाव के तौर तरीके तय किए थे. उन्होंने ही तय किया कि अस्सी से अधिक उम्र वाले कार्डिनल वोट नहीं देंगे. पोप जॉन पॉल द्वितीय ने 1996 में थोड़े बदलाव किए.

पहले पोप के चयन के लिए किसी को भी दो तिहाई बहुमत मिलना आवश्यक था लेकिन इसे बदल दिया गया. अब किसी को भी पोप बनने के लिए आधे से अधिक मतों की ज़रुरत पड़ती है. कानक्लेव के दो दौर होते हैं और इनके लिए अलग अलग ज़रुरतें होती है.

धुएं का संकेत

मतदान पत्रों को परंपरा के अनुसार स्टोव पर जलाया जाता है जो संकेत होता है नए पोप के चुनाव का. सेंट पीटर्स चौराहे पर इंतज़ार करते लोगों को इन मतपत्रों के धुंए का रंग ही बताता है कि पोप का चुनाव हुआ या नहीं.

अगर धुएं का रंग सफेद होता है तो इसका अर्थ यह हुआ कि नया पोप चुन लिया गया है लेकिन अगर धुएं का रंग काला होता है तो मतलब हुआ कि अभी और इंतज़ार करना होगा क्योंकि पोप के नाम पर सहमति नहीं हुई है.

यह धुआं सिस्टीन चैपल की चिमनी से निकलता है. पिछले कुछ सालों में जब पोप के नाम पर सहमति नहीं बनी तो धुएं को काला करने के लिए उसमें भीगे पुआल भी मिलाया गया.

धुएं के रंग को लेकर हमेशा भ्रम की स्थिति रही है और 1978 में रसायन भी मिलाया गया लेकिन फिर भी धुआं सलेटी ही रहा.

कानक्लेव के नियम हर मामले में बड़े ही कठोर हैं लेकिन धुएं के रंग को लेकर नियम कुछ भी नहीं कहते. सिर्फ यह धुआं और इस धुएं का रंग ही बता सकता है कि कानक्लेव में अंदर क्या हो रहा है.

इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>