चीन में नोबेल विजेता के समर्थक गिरफ़्तार

शुक्रवार की शाम होनेवाले नोबेल शांति पुरस्कार समारोह से पहले चीन ने इस बार के विजेता लोकतंत्रवादी कार्यकर्ता लू श्याबाओ के 20 से ज़्यादा सहयोगियों को गिरफ़्तार कर लिया है.
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन की प्रमुख ने कहा है कि इन गिरफ़्तारियों के अलावा उन्हें सूचना मिली है कि 120 लोगों को या तो नज़रबंद किया गया है या फिर उनकी यात्रा पर रोक लगी है.
नार्वे की राजधानी ऑस्लो में हो रहे पुरस्कार समारोह में लू श्याबाओ की कुर्सी खाली रहेगी क्योंकि वो चीन के जेल में बंद हैं. वो देशद्रोह के आरोप में 11 साल के क़ैद की सज़ा काट रहे हैं.
चीन ने बीबीसी समेत सभी विदेशी समाचार वेबसाइटों पर रोक लगा दी है और स्थानीय सरकारी मीडिया नोबेल समिति की कड़ी आलोचना कर रही है.
नोबेल पुरस्कार समारोह के सीधे प्रसारण के समय चीन में बीबीसी टेलीविज़न स्क्रीन पर कुछ नहीं नज़र आएगा.
चीन ने पिछले कुछ हफ़्तों में नोबेल समिति के चुनाव पर सख़्त नाराज़गी जताई है.

चीन का रूख है कि नोबेल समिति ने कुछ पश्चिमी देशों के फ़ायदे के लिए एक अपराधी का इस पुरस्कार के लिए चयन किया है.
उनका कहना है कि ये चुनाव चीन के अंदरूनी मामले में दखल देने जैसा है.
इस समारोह में भाग लेनेवाले देशों में से लगभग एक तिहाई देश शामिल नहीं हो रहे क्योंकि चीन ने उन्हें चेतावनी दी है कि यदि वो ऐसा करते हैं तो उनके ख़िलाफ़ चीन बदले की कार्रवाई करेगा.
चीन ने भारत पर भी इसमें शामिल नहीं होने के लिए दबाव डाला था लेकिन भारत ने सोचविचार के बाद इसमें भाग लेने का फ़ैसला लिया.
वहीं सर्बिया जिसके चीन के साथ अच्छे संबंध हैं अब समारोह में भाग लेने जा रहा है. पहले वहां के विदेश मंत्री ने एलान किया था कि वो अपना प्रतिनिधि नहीं भेजेंगे.
चीन के अंदर भी सरकार की कोशिश है कि पुरस्कार समारोह के बाद किसी तरह का जश्न नहीं हो, लोग पार्टियां नहीं करें. विदेशी पत्रकारों को बीजिंग में एक ख़ास जगह से काम करने को कहा गया है.
वहीं लू श्याबाओ की पत्नी भी मीडिया से संपर्क नहीं कर पाई हैं.
पत्रकार और फ़ोटोग्राफ़र उस इमारत के अंदर प्रवेश नहीं कर सकते जहां वो रह रही हैं.












