कोरोना वायरस पर वियतनाम की जीत, आख़िर किस कीमत पर?

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वियतनाम ने अपनी आबादी को कोरोना के ख़िलाफ़ जंग में लगा दिया है.
संक्रमण को अपेक्षाकृत कम स्तर पर रोकने और मौतों का आंकड़ा नहीं बढ़ने देने के लिए वियतनाम की तारीफ हो रही है. लेकिन, इस प्लान की मानवीय मूल्य क्या है?
बीबीसी ने एक ऐसी महिला से बातचीत की है जिसे हो ची मिन्ह सीट की सरकारी फैसिलिटी में क्वारंटीन किया गया है.
चीन के साथ सीमा जुड़ी होने के बावजूद वियतनाम में कोविड-19 के कम मामले सामने आए हैं.
लेकिन, इस कहानी का एक पहलू यह भी है कि लोगों को जबरदस्ती सरकारी इकाइयों में क्वारंटीन रखा जा रहा है.
कोई भी ऐसा शख्स जिसके वायरस से संक्रमित होने का शक है उसे सरकार जबरदस्ती क्वारंटीन कर रही है.

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'मुश्किल हालात'
जब लान आन्ह (असली नाम छिपा लिया गया है) ऑस्ट्रेलिया में अपने रिश्तेदारों के यहां दो हफ्ते बिताकर वापस अपने घर लौटीं तो उन्हें हो ची मिन्ह सिटी की नेशनल यूनिवर्सिटी में तैयार की गई सरकारी फैसिलिटी में ले जाया गया.
उन्होंने बीबीसी वियतनामीज को बताया कि उन्हें यहां किन चीजों का सामना करना पड़ा. लान आन्ह ने कहा, "टॉयलेट गंदगी से काला पड़ गया था और सिंक ठहरे हुए पानी से भरी हुई थी."
उन्होंने कहा, "सौभाग्य से बुरी बदबू तो नहीं आ रही थी, लेकिन यह बेहद गंदा था. बेड पर जंग लगी थी. हर जगह धूल और मकड़ियों के जाले थे."
पहली रात ज्यादातर लोगों को केवल एक दरी दी गई, तकिये या गद्दे नहीं मिले. मौसम में गर्मी और आर्द्रता थी, लेकिन कमरे में केवल एक पंखा था.
लान आन्ह की चिंता यह थी खराब स्थितियों में लोगों में यह डर भी बढ़ रहा था कि उनके आसपास रह रहे लोगों में से किसी को कोरोना न हो. उन्होंने कहा, "हमें सुविधाएं नहीं चाहिए थीं, लेकिन साफ-सफाई जरूरी थी."

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'सस्ते समाधान'
वियतनाम की सरकार ने कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ जंग का ऐलान कर दिया है. सरकार ने मेडिकल स्टाफ, सुरक्षा बलों और सामान्य नागरिकों को भी इस वायरस से लड़ने के लिए तैनात कर दिया था.
लेकिन, वियतनाम की रणनीति दक्षिण कोरिया जैसे अमीर एशियाई देशों से अलग थी. इन देशों ने महंगी टेस्टिंग को बड़े पैमाने पर अपनाया है. बड़ी तादाद में लोगों के टेस्ट किए जा रहे हैं.
वियतनाम एक सघन आबादी वाला देश है जहां 9.6 करोड़ लोग रहते हैं. देश की कम्युनिस्ट सरकार ने वायरस को सख्ती से रोकने का फैसला किया है.
25 मार्च तक वियतनाम में कोरोना के 141 मामले थे, जबकि इस दौरान एक भी मौत नहीं हुई.
सरकार ने पहले ही एलान कर दिया था कि विदेश से लौटने वाले हर शख्स को 14 दिन के लिए क्वारंटीन में रहना होगा.

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ट्रैवलर्स की खोज
इनमें से तीन ब्रिटिश लड़कियां भी थीं जिन्हें हा लोन्ग बे में उनके हॉस्टल में ढूंढ निकाला गया. ये मार्च की शुरुआत में वियतनाम पहुंची थीं.
यह पता चला था कि इसी फ्लाइट में एक लड़की कोविड-19 पॉजिटिव पाई गई थी. तीनों लड़कियां अपने घर से भाग न जाएं इसके लिए पुलिस तैनात कर दी गई थी.
ये तीनों लड़कियां 20-30 साल की उम्र की थीं. टेस्ट करने के दो दिन बाद पता चला कि ये लड़कियां वायरस से संक्रमित नहीं हैं.
इसके बावजूद उन्हें अगले 12 दिनों के लिए आइसोलेशन में भेज दिया गया.
इनमें से एक लड़की एलिस पार्कर ने कहा कि जिस हॉस्पिटल में उन्हें रखा गया था वह एक शरणार्थी शिविर था और रात के वक्त बेहद डरावना हो जाता था.

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बीबीसी को पता चला है कि इन युवा बैकपैकर्स को अब छोड़ दिया गया है और वे इंडोनेशिया के बाली जा चुकी हैं.

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संक्रमण की दूसरी लहर
वियतनाम ने यूरोपीय देशों की तरह लॉकडाउन से परहेज किया है, लेकिन इसने वायरस से प्रभावित बड़े समुदायों को क्वारंटीन में डाल दिया है.
इन इलाकों में 21,000 से ज्यादा लोग हैं और 30,000 और लोग सेल्फ-आइसोलेशन में हैं.
विदेश से शुरू होने वाली संक्रमण की दूसरी लहर को देखते हुए सरकार ने और ज्यादा सख्ती करने का फैसला किया.
22 मार्च से वियतनाम ने सभी विदेशी नागरिकों के देश में प्रवेश पर रोक लगा दी.
आम लोगों की भी तैनाती
अब तक वियतनाम में कम मामलों के सामने आने के चलते इसकी तारीफ हो रही है.
यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्थ कैनबरा के प्रोफ़ेसर एमेरिटस कार्ल थायर ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया, "वियतनाम एक मोबिलाइजेशन सोसाइटी है. यह एक वन-पार्टी स्टेट है."
लोगों को ही कोरोना रोकने के काम में लगा दिया गया है. लोग अपने ही पड़ोसियों पर नजर रख रहे हैं.
जबरदस्ती क्वारंटीन में डालने से संक्रमित लोगों के आंकड़े छिपाने का भी डर पैदा हो रहा है.

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गुप्तचर समाज
पड़ोसी अक्सर संदिग्ध मामलों को छुपाते हैं और इस बात की चिंता है कि सरकार क्वारंटीन में रह रहे लोगों की निजता में दखल दे रही है.
मीडिया देशभक्ति के संदेशों पर जोर दे रही है.
सरकार कह रही है कि देश को आने वाले वक्त में आने वाले हजारों संभावित मामलों के लिए खुद को तैयार करना चाहिए.

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