नाक के बाल ही बचाएंगे प्रदूषण से

इमेज स्रोत, WildAid
चीन में वायु प्रदूषण कोई मज़ाक का मुद्दा नहीं है. लेकिन इस पर बनी एक फ़िल्म शहरी चीनियों को हंसा भी रही है और कार्रवाई करने के लिए प्रेरित भी कर रही है.
'हेयरी नोज़' ऐसे निराशाजनक भविष्य की तस्वीर पेश करती है जहां धुंध की छंटाई करने के लिए गए लोगों की नाक के बाल बहुत लंबे हो गए हैं.
यह फ़िल्म इस संदेश के साथ ख़त्म होती है कि अगर लोग अपने तरीके नहीं बदलते हैं तो प्रदूषण उन्हें बदल देगा.

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फ़िल्म बनाने वाली चैरिटी वाइल्डएड ने बीबीसी को बताया कि वे चाहते हैं कि लोग इस समस्या को दूर करने के लिए कार्रवाई करने का इंतज़ार न करें. वे ख़ुद हरियाली बढ़ाने के मौलिक विचार लेकर आगे आएं.
वाइल्डएड की चीनी प्रतिनिधि, मे वी ने कहा, "हम चाहते थे कि इस बेहद गंभीर समस्या पर बात करने का कोई मज़ाकिया तरीका मिले."
हेयरी नोज़ में बहुत सारे स्टाइलिश चीनी लोगों और एक कुत्ते को दिखाया गया है. उन्होंने 'बदबूदार, दमघोंटू हवा और कभी ख़त्म न होने वाली धुंध' के बीच जीने का तरीक़ा नाक के लंबे बालों के ज़रिए ढूंढ निकाला है.

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इस फ़िल्म में नाक के लंबे बालों वाले छोटे बच्चे के साथ एक युवा जोड़ा दिखता है, एक युवा महिला यात्री दिखती है जिसके नाक के बाल रंगीन और गुंथे हुए हैं. इसके साथ ही हिप्पी और डेट करता हुआ एक जोड़ा दिखता है.
फ़िल्म का कैप्शन कहता है, "उनके लिए जीने का यही तरीका है."
लेकिन एक आदमी 'आंख मूंदकर स्वीकार न करने' का फ़ैसला करता है. वह अपनी नाक के बाल काट देता है ताकि वह सांस ले सके, "क्योंकि यह मुझे याद दिलाता है कि एक समय आसमान नीला होता था."

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आखिर में कैप्शन दिखता है, "वायु प्रदूषण को बदल दो, इससे पहले कि यह तुम्हें बदल दे."
मे वी कहती हैं, "बहुत से लोग बीजिंग और शंघाई में प्रदूषण की शिकायत करते हैं, लेकिन कोई भी नहीं सोचता कि वो क्या कर सकता है."
"हम यह कहना चाहते हैं कि बदलाव मुश्किल नहीं है, यह हर व्यक्ति से आना चाहिए."
उन्होंने कहा कि बीजिंग का 35 फ़ीसदी प्रदूषण गाड़ियों के ईंधन से होता है. इसलिए साइकिल चलाने या पैदल चलने से वास्तव में अंतर आ सकता है.

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यह प्रचार अभियान मुख्य रूप से युवा चीनियों को लक्ष्य कर तैयार किया गया है. इसमें इंटरनेट यूज़र्स को ध्यान में रखा गया है, क्योंकि वह "बदलाव करना चाहते हैं, नए विचारों को स्वीकार करना चाहते हैं और कुछ बेहतर करने के लिए तैयार भी हैं."
चीन ईंधन के लिए कोयले पर निर्भर है और दुनिया में ग्रीनहाउस गैसों का सबसे बड़ा उत्सर्जक है.
यहां के मुख्य शहरों में प्रदूषण अक्सर मानव जीवन के लिए ख़तरनाक स्तर तक पहुंच जाता है.

पिछले साल 'नेचर' पत्रिका में छपी एक रिपोर्ट में चीन में प्रदूषण से होने वाली मौतों की संख्या 13 लाख बताई गई थी.












