अब फ़ेसबुक पर नहीं 'बिकेंगी बंदूकें'

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फ़ेसबुक और फ़ेसबुक की फ़ोटो-शेयरिंग सेवा इंस्टाग्राम पर व्यक्तिगत स्तर पर लोग अब बंदूक के लिए विज्ञापन नहीं दे पाएंगे.
फ़ेसबुक ने पहले ही पहचान की जाँच के बिना बंदूकों की बिक्री पर रोक लगा दी थी. लेकिन इन नए नियमों का उद्देश्य व्यक्तियों के बीच वेबसाइट पर बंदूकों की बिक्री पर रोक लगाना है.
हालाँकि कंपनियां अब भी फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम पर बंदूकों की बिक्री के लिए विज्ञापन दे सकती हैं.

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अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के बंदूक ख़रीदने पर नियंत्रण लगाने संबंधी नए <link type="page"><caption> नियमों की घोषणा</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/international/2016/01/160105_obama_gun_buyer_sk" platform="highweb"/></link> के तीन सप्ताह के बाद यह क़दम उठाया गया है.
नए नियमों में बंदूक विक्रेताओं की पृष्ठभूमि की पूरी जांच और राज्यों द्वारा अयोग्य लोगों के बारे में जानकारी मुहैया कराना शामिल है.
नियमों में बदलाव कर बंदूकों की बिक्री को उन नियमों के अंतर्गत लाया गया है जिसके तहत फ़ेसबुक पर अवैध नशीले पदार्थों और दवाइयों की बिक्री पर रोक लगाई गई थी.
दुनिया भर में 1.59 अरब लोग इस साइट का इस्तेमाल करते हैं.

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एवरीटाइम गन सेफ्टी कैंपेन ग्रुप के शैनॉन वॉट्स ने समाचार एजेंसी एपी को बताया, "दुर्भाग्यपूर्ण और अनजान तरीके से फ़ेसबुक एक ऑनलाइन माध्यम बन गया था जहां से ख़तरनाक लोग भी बंदूक ख़रीद सकते थे."
ग्रुप का कहना है कि उन्हें इस बात के सबूत मिले हैं कि वेबसाइट से बंदूकें ख़रीदी गई हैं और दो मामलों में हत्या के लिए भी इस्तेमाल की गईं.
एवरीटाइम गन सेफ्टी उन कई समूहों में से एक है जिसने फ़ेसबुक से अपने नियमों को बदलने के लिए अपील की थी.
फ़ेसबुक के फ़ैसले पर अभी तक नेशनल राइफ़ल एसोसिएशन (एनआरए) ने अपनी राय नहीं दी है. एसोसिएशन ने बंदूक संबंधी क़ानूनों में बदलावों का विरोध किया था.

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साल 2014 में एसोसिएशन ने कहा था कि बंदूक के विज्ञापनों पर रोक लगाने के पुराने क़दम कारगर सिद्ध नहीं हो पाए थे.
2013 के आख़िर में न्यूयॉर्क के अटॉर्नी जनरल, एरिक टी श्नाइडरमैन ने फ़ेसबुक पर लिखा था, "फ़ेसबुक पर कई ग्रुप हैं जो असॉल्ट बंदूक, पैंडगन, राइफ़ल, शॉटगन और बंदूक के पुर्जों की बिक्री कर रहे हैं."
शुक्रवार को फ़ेसबुक की घोषणा के कई घंटों बाद भी साइट पर बंदूकों की बिक्री करने वाले कई ग्रुप काम कर रहे थे.
कुछ लोगों ने ऐसे ग्रुप में पोस्ट में लिखा कि वे पहचान छिपाने के लिए नए नामों के साथ नए ग्रुप की शुरुआत कर सकते हैं.
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