अगले साल बढ़ेंगे एेपल डिवाइसों पर हमले

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सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एेपल डिवाइसों पर साइबर हमले बढ़ रहे हैं और अगले साल इनमें तेज़ी आएगी.
सिक्योरिटी फ़र्म सिमेनटेक के मुताबिक़ एेपल के मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम पर इस साल पिछली बार की तुलना में दोगुने से ज़्यादा हमले हुए जबकि मैक कंप्यूटरों पर भी ख़तरा बढ़ा है.
एक अन्य सिक्योरिटी फ़र्म फ़ायरआई ने भी 2016 में एेपल डिवाइसों पर हमलों में तेज़ी आने की आशंका जताई है.
कंपनी का अनुमान है कि एेपल पे जैसे सिस्टम्स पर हमला हो सकता है.
सिमेनटेक के शोधकर्ता डिक ओ ब्रायन ने कहा कि एेपल साइबर अपराधियों का स्वाभाविक लक्ष्य है क्योंकि इसके उपकरण बहुत लोकप्रिय हैं.

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हालांकि विंडोज़ और एंड्रॉयड की तुलना में एेपल डिवाइसों पर होने वाले हमलों की संख्या कम है पर सिमेनटेक का अनुमान है कि इसमें कई गुना बढ़ोतरी की आशंका है.
पिछले वर्ष साइबर अपराधियों ने औसतन 10,000 से 70,000 प्रतिमाह के बीच मैक कंप्यूटरों को निशाना बनाया.
ओ ब्रायन ने कहा, "विंडोज़ डेस्कटॉप की तुलना में यह संख्या काफ़ी कम है और हम किसी तरह का ख़ौफ़ पैदा नहीं करना चाहते. एेपल अब भी अपेक्षाकृत सुरक्षित प्लेटफ़ॉर्म है लेकिन इसे इस्तेमाल करने वाले सुरक्षा को लेकर आत्मसंतुष्ट नहीं हो सकते क्योंकि हमलों की संख्या और नए ख़तरे बढ़ रहे हैं."

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सिमेनटेक के शोध में पता चला कि इस साल के पहले नौ महीनों में एेपल के यूनीक ओएस एक्स कंप्यूटरों पर हमले पिछले साल के मुक़ाबले सात गुना बढ़े.
कंपनी ने साथ ही एेपल के मोबाइल आईओएस प्लेटफॉर्म पर सात नए तरह के ख़तरों की बात भी कही है. ख़ासकर अनलॉक्ड डिवाइसों पर ज़्यादा ख़तरा है.
बटरफ़्लाई नाम के कॉरपोरेट जासूसी ग्रुप ने 2015 में कई कंपनियों को निशाना बनाया था. इस ग्रुप ने ऐसे मेलवेयर विकसित किए हैं, जो विंडोज़ और एेपल के कंप्यूटरों पर हमला कर सकते हैं.
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