ओसामा की मौत: 'पाकिस्तानी मदद' पर बवाल

ओसामा बिन लादेन

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पुलिट्ज़र पुरस्कार से सम्मानित अमरीकी खोजी पत्रकार सीमोर हर्श ने अल क़ायदा प्रमुख ओसामा को मारने के अमरीकी अभियान के संबंध में ओबामा प्रशासन के दावों को ग़लत ठहराया है.

अमरीका ने मई 2011 में दावा किया था उसके नेवी सील्स सैनिकों के एक गुप्त अभियान में ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान के एबटाबाद में अपने घर में गोलीबारी में मारे गए. इसे पूरी तरह से अमरीकी अभियान बताया गया था.

बीबीसी के शाहज़ेब जिलानी के अनुसार हर्श ने लंदन रिव्यू ऑफ़ बुक्स में दावा किया है कि पाकिस्तान को न केवल अमरीकी अभियान का पता था बल्कि उसने अमरीकी ख़ुफ़िया एजेसी सीआईए की मदद भी की थी.

हर्श के अनुसार पाकिस्तान के तत्कालीन सैन्य और गुप्तचर प्रमुख को इस अमरीकी छापे के बारे में पता था.

osama bin laden

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उस समय पाकिस्तान ने इसका सार्वजनिक तौर पर विरोध करते हुए, इसे देश की संप्रभुता के ख़िलाफ़ बताया था.

पाकिस्तानी मीडिया में उठा मुद्दा

बीबीसी मॉनिटरिंग की अमृता शर्मा के अनुसार पाकिस्तानी मीडिया में आज ये ख़ूब उठा और सोशल मीडिया पर भी इसकी ख़ासी चर्चा हुई.

अंग्रेजी अख़बार डॉन ने लिखा कि 'हर्श का दावा है ओसामा की हत्या को इस तरह पेश किया गया जिससे पाकिस्तान खलनायक लगने लगा.'

हर्श के हवाले से अख़बार लिखता है, "ऑपरेशन स्पीयर को लेकर अमरीका का आधिकारिक बयान सिर्फ एक कल्पना से ज़्यादा कुछ नहीं है."

ट्विटर पर भी सीमोर हर्श और लादेन सोमवार सुबह से ट्रेंड कर रहे थे. सोशल मीडिया पर कुछ लोगों का ये दावा था कि सीमोर हर्श की कहानी में कोई सच्चाई नहीं है.

जनरल कयानी

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ट्विटर पर पूर्व सेना प्रमुख जनरल कयानी और पूर्व आईएसआई प्रमुख शुज़ा पाशा की आलोचना भी हुई है.

जांच की मांग

एक ट्विटर यूज़र ओमर कुरैशी ने ट्वीट किया कि 'ओसामा को समुद्र में कभी दफ़न ही नहीं किया गया. कयानी और शुजा पाशा को ओसामा की पाकिस्तान में मौजूदगी का 2006 से पता था और उन्होंने अमरीका की मदद की.'

मुर्तज़ा हुसैन ने ट्वीट किया - 'बिन लादेन की मौत पर दी गयी सरकारी कहानी का शुरू से ही कोई मतलब नहीं था.'

फ़ैसल शेरजन ने ट्वीट कर मांग की कि इस रिपोर्ट के आधार पर जनरल कयानी और शुजा पाशा के खिलाफ जांच होनी चाहिए.

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