छत पर उतरी नाव, बचाई 59 लोगों की जान

छत पर उतरी नाव बचाई 59 लोगों की जान

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इंडोनेशिया में 10 साल पहले सुनामी जब पूरे बांदा एसेह इलाक़े को बहा ले गई थी, तब बसीरिया परिवार एक घर की छत पर फंसा हुआ था, पानी उनकी गर्दन तक पहुंच चुका था. तभी बचने का एक अद्भभुत ज़रिया मिला, एक नाव उनकी छत पर उतरी.

लांपुलो गांव में बने नए मकानों के बीच एक अनोखा दृष्य मिलता है, दो घरों की छत पर टिकी मछली पकड़ने वाली एक नाव.

नाव न आती तो...

छत पर उतरी नाव बचाई 59 लोगों की जान

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इमेज कैप्शन, उस नाव के ज़रिए अपनी और अपने बच्चों की ज़िंदगी बचाने वाली महिला फ़ौज़िया.

25 मीटर लंबी लकड़ी की नाव सुनामी पर्यटन का एक बड़ा आकर्षण बन गया है. फ़लक से उतरी इस नाव ने 59 लोगों की जान बचाई थी.

उनमें से एक स्थानीय व्यवसायी फ़ौज़िया बसीरिया है जिसका कहना है, "अगर वो नाव न आई होती तो हम सब डूब गए होते, क्योंकि हममे से किसी को भी तैरना नहीं आता था."

बसीरिया की आंखों में आज भी आंसू आ जाते हैं जब वो उस ख़ौफ़नाक दिन को याद करती हैं. वो कहती हैं ''भूकंप आने के कुछ ही देर बाद लोगों की चीख़ें सुनाई दी कि समुद्र का पानी हमारी तरफ़ आ रहा है. हम तो कुछ समझ ही नहीं पा रहे थे कि तभी हमने पानी को आते देखा.''

छत पर नाव

जब सुनामी आई उस वक़्त बसीरिया के पति अपनी बाइक लेकर बाज़ार गए थे. बसीरिया ने अपने पांचो बच्चों को उठाया और बचने के लिए कोई ऊंची जगह ढ़ूंढने भागीं. रास्ते में उन्होंने कई इमारतों को तहस नहस होते देखा.

वो भाग कर मकान की छत पर पहुंची लेकिन जल्दी ही उन्हें अहसास हो गया कि उफ़नती लहरों के आगे यह ऊंचाई नाकाफी है. फिर एक बड़ी लहर आई और पानी उन तक पहुंच गया.

छत पर उतरी नाव बचाई 59 लोगों की जान

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तभी उन्होंने खिड़की से देखा कि एक नाव पहती हुई आई और उस घर की छत पर आकर ठहर गई. जिसके बाद ये लोग किसी तरह छत से रास्ता बनाकर उस नाव में पहुंचे. इस नाव ने उनके साथ कई और लोगों की जान भी बचाई.

बसीरिया कहती हैं कि उन्होंने इमारतों को गिरते देखा, लोगों को मरते देखा वो एक कभी न भूल पाने वाला अनुभव है जो उन्हें हमेशा याद रहेगा.

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