शकील अफ़रीदी को लेकर पाक पर बढ़ा अमरीकी दबाव

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    • Author, ब्रजेश उपाध्याय
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन

अमरीकी कांग्रेस के प्रस्तावित बजट बिल में कहा गया है कि पाकिस्तान को आतंकवाद के ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए दी जाने वाली राशि में से तीन करोड़ तीस लाख डॉलर को तब तक रोक कर रखा जाए जब तक कि वो डॉक्टर शकील अफ़रीदी को जेल से रिहा न कर दे.

ओसामा बिन लादेन की तलाश में अमरीका की मदद करने वाले डॉक्टर शकील अफ़रीदी को पाकिस्तानी हुकूमत ने जेल में बंद कर रखा है और उन पर कई अलग-अलग आरोप लगाए गए हैं.

कांग्रेस में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स की रज़ामंदी से तैयार किए गए बजट के मसौदे में कहा गया है जब तक कांग्रेस को अमरीकी विदेश मंत्री की तरफ़ से ये गारंटी नहीं मिल जाती कि डॉक्टर अफ़रीदी को जेल से रिहा कर दिया गया तब तक ये रकम जारी नहीं की जाएगी.

इसके अलावा इसमें ये भी कहा गया है कि <link type="page"><caption> डॉक्टर अफ़रीदी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/08/130829_bin_laden_doctor_retrial_rns.shtml" platform="highweb"/></link> पर से <link type="page"><caption> ओसामा बिन लादेन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/07/130726_osama_museum_ap.shtml" platform="highweb"/></link> की तलाश में अमरीका की मदद करने से संबंधित जो भी आरोप हैं वो हटा लिए जाएं.

अमरीकी दबाव

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डाक्टर अफ़रीदी का मामला यहां अमरीकी कांग्रेस और मीडिया में अक्सर उठता रहा है और पाकिस्तानी हुकूमत के साथ होनेवाली मुलाक़ातों में भी यहां की सरकार उन्हें जल्द से जल्द रिहा करने के लिए दबाव डालती रही है.

ये बजट दोनों ही पार्टियों की रज़ामंदी से तैयार हुआ है और माना जा रहा है कि इसे पास करने में कोई मुश्किल नहीं आएगी.

इस बजट में <link type="page"><caption> पाकिस्तान</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/07/130709_pakistan_report_leak_dp.shtml" platform="highweb"/></link> को आतंकवाद के ख़िलाफ़ चल रही लड़ाई में हुए खर्च की जो राशि वापस की जाती है उसकी अवधि को एक साल के लिए बढ़ाने का भी ज़िक्र है.

इसके अलावा पाकिस्तान को वापस की जानेवाली रकम जारी करने के लिए कुछ और भी शर्तें रखी गई हैं.

इसमें विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री को कांग्रेस को ये भी बताना होगा कि पाकिस्तान अल क़ायदा, तेहरीक ए तालिबान पाकिस्तान, और हक्कानी नेटवर्क और क्वेटा शूरा तालिबान जैसे चरमपंथी गुटों के ख़िलाफ़ कार्रवाई में मदद कर रहा है.

अधिकारियों को वीज़ा

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उन्हें कांग्रेस को ये यकीन भी दिलाना होगा कि पाकिस्तानी सरहद के अंदर से <link type="page"><caption> अमरीकी फ़ौज</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/05/120430_us_drone_ac.shtml" platform="highweb"/></link> या अफ़गानिस्तान की फौज पर होनेवाले हमलों को रोकने के लिए पाकिस्तान कारगर कदम उठा रहा है.

इसमें एक शर्त ये भी है कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ काम कर रहे अमरीकी अधिकारियों को पाकिस्तानी वीज़ा देने में भी किसी तरह की रोकटोक नहीं होनी चाहिए.

इस सभी शर्तों के पूरी होने की गारंटी भी विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री को कांग्रेस के सामने देनी होगी और उनसे कहा गया है कि अगर लगे कि पाकिस्तान इन शर्तों को पूरा नहीं कर रहा है तो इस मदद को फौरन रोक दें.

इस तरह के शर्तों को पाकिस्तान अपने अंदरूनी मामलों में दखलअंदाज़ी की तरह देखता है और लेकिन पिछले कई महीनों से यहां ये सोच मज़बूत हो रही है कि पाकिस्तान हो या अफ़गानिस्तान अमरीका से जानेवाली हर मदद का पूरा हिसाब रखा जाना चाहिए.

जानकारों का कहना है कि दोनों देशों के रिश्तों में जो तनाव है उनमें इस तरह के शर्तों से और बढ़ोतरी ही होगी.

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