बोफ़ोर्स से 'जुड़े' ओत्तावियो क्वात्रोकी की मौत

ओत्तोवियो क्वात्रोकी
इमेज कैप्शन, क्वात्रोकी की गांधी परिवार से नज़दीकी की वजह से इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया था.

बोफोर्स सौदे में दलाली के आरोपों के घेरे में रहे इतालवी व्यापारी और गांधी परिवार के क़रीबी बताए जाने वाले ओत्तोवियो क्वात्रोकी की इटली के शहर मिलान में मौत हो गई है.

ओत्तोवियो क्वात्रोकी की पत्नी मारिया ने इंडियन एक्सप्रेस अख़बार से कहा है कि उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई.

समाचार एजेंसी पीटीआई का कहना है कि उनका अंतिम संस्कार सोमवार को किया जाएगा. वो 73 साल के थे.

हालाँकि क्वात्रोकी के ख़िलाफ़ सभी मामले बंद कर दिए गए थे. लेकिन इसे लेकर काफ़ी हंगामा हुआ था क्योंकि विपक्षी राजनीतिक दलों का कहना था कि सीबीआई ने मामला बंद करने की सिफारिश केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार के इशारे पर की थी.

दलाली

लगभग 26 साल पहले राजीव गांधी के प्रधानमंत्री रहते हुए हुए बोफोर्स तोप के सौदे ने भारतीय राजनीति में उफान ला दिया था. और इसमें हुए भ्रष्टाचार ने राजीव गांधी की कुर्सी छीन ली थी.

यह बात सामने आई थी कि स्वीडन की हथियार बनाने वाली कंपनी बोफ़ोर्स ने भारतीय सेना को तोपें सप्लाई करने का सौदा हथियाने के लिए लाखों डॉलर की दलाली चुकाई थी.

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बोफोर्स तोप
इमेज कैप्शन, बोफोर्स दलाली मामला राजीव सरकार में वित्त मंत्री रहे विश्वनाथ प्रताप सिंह के कांग्रेस से अलग होने की एक वजह बना था.

आरोप था कि राजीव गाँधी परिवार के नज़दीकी बताए जाने वाले इतालवी व्यापारी ओतावियो क्वात्रोकी ने इस मामले में बिचौलिए की भूमिका निभाई थी.

काफ़ी समय तक तो ख़ुद राजीव गाँधी का नाम भी इस मामले के अभियुक्त्तों की सूची में शामिल रहा था.

सौदा

कुल 400 बोफ़ोर्स तोपों की ख़रीद का सौदा 1.3 अरब डॉलर का था. क्वात्रोची खुद को भारत की घरेलू राजनीति का शिकार बताते रहे थे.

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क्वात्रोकी के अनुसार उनका दोष सिर्फ इतना है कि वह भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी और उनकी पत्नी और काँग्रेस पार्टी की मौजूदा नेता सोनिया गाँधी के क़रीब रहे थे.

एक इतालवी कंपनी के प्रतिनिधि के रूप में क्वात्रोकी 1993 तक दिल्ली में रहते थे.

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