रूस-यूक्रेन युद्ध: वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की की सेना कब और कहां करेगी जवाबी हमला?

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, ओलेह चेर्निश
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़ यूक्रेन
कई पर्यवेक्षकों का मानना है कि यूक्रेन आने वाले दिनों में रूसी सेना के ख़िलाफ़ बड़ा जवाबी हमला करने वाली है. रूस के क़ब्ज़े में आए अपने इलाक़ों को छुड़ाने के मक़सद से वो हमला करेगी.
पिछले कई महीनों से यूक्रेन की सेना, रूस की फ़ौज को आगे बढ़ने से रोकने और उसे जंग के मैदान में उलझाकर थका डालने की रणनीति पर चल रही है.
लेकिन, यूक्रेनी अधिकारी और पश्चिमी मुल्कों के उसके सहयोगी निजी तौर पर बातचीत में और खुलकर भी ये संकेत देते रहे हैं कि आने वाले दिनों में यूक्रेन रूस के ख़िलाफ़ बड़ा जवाबी हमला करने की तैयारी कर रहा है. और हम ये भी जानते हैं कि वो फौज़ की नई टुकड़ियां और हथियारों, गोला-बारूद की नई खेप तैयार कर रहा है.
जवाबी सैन्य अभियान से जुड़ी जानकारियों को फिलहाल गोपनीय रखा गया है. हालांकि हम ये उम्मीद कर सकते हैं कि यूक्रेन निश्चित रूप से अपने दुश्मनों को चकमा देने और उन्हें हैरानी में डालने की कोशिश ज़रूर करेगा.
जंग के मोर्चे पर यूक्रेन की सेना के आगे बढ़ने की योजना के बारे में, हमें अब तक जो कुछ जानकारी पता है, वो कुछ इस तरह .
काउंटर ऑफ़ेंसिव यानी जवाबी हमला क्या है?
जवाबी हमला असल में एक बड़ा फ़ौजी हमला या अभियान होता है. जंग में ये अभियान वो सेना चलाती है, जो उससे पहले तक रक्षात्मक रवैया अपनाए रहती है.
मिसाल के तौर पर सितंबर 2022 में यूक्रेन की सेना ने बताया था कि उसने उत्तरी पूर्वी ख़ारकीएव इलाक़े में जवाबी हमला कर छह दिनों के भीतर आठ हज़ार वर्ग किलोमीटर (3,000 वर्ग मील) ज़मीन दुश्मन सेना के कब्ज़े से छीन ली थी.
लेकिन, अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि ऐसे जवाबी हमले के पैंतरों को सीधा समझना एक बड़ी भूल होगी.
बीबीसी न्यूज़नाइट को दिए एक इंटरव्यू में यूक्रेन के रक्षा मंत्री के सलाहकार यूरियी साक ने कहा था कि, "कोई जवाबी हमला ऐसा अभियान नहीं होता कि सीटी बजाते ही शुरू हो जाए और कुछ दिनों में ख़त्म हो जाए. ये बड़ी तेज़ी से युद्ध का रुख़ बदलने वाली रणनीति होती है. भयंकर युद्ध होता है और ऐसे अभियान चलाने के लिए बहुत-सी बातों का ख़याल रखना पड़ता है."

इमेज स्रोत, Getty Images
यूक्रेन कब करेगा जवाबी हमला?
यूरियी साक ने कहा था कि उनका देश तभी जवाबी हमला शुरू करेगा, जब उसे इस बात का इत्मीनान हो जाए कि वो 'ज़्यादा से ज़्यादा कामयाबी हासिल कर सकेगा' और इस हमले में उसकी सेना को अधिक नुक़सान नहीं होगा.
उन्होंने कहा, "रूस की सेना को एक मज़बूत रक्षा पंक्ति तैयार करने का पूरा मौक़ा मिल गया था."
लेकिन, हाल की कुछ घटनाएं इस बात की तरफ इशारा करती हैं कि हो सकता है कि यूक्रेन ने जवाबी हमले की तैयारी शुरू कर दी हो. पिछले कुछ दिनों के दौरान दक्षिणी रूस और रूस के क़ब्ज़े वाले क्राइमिया में ईंधन के दो अलग-अलग भंडारों में आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं. इनमें से आगज़नी की एक घटना, क्रासनोडर क्षेत्र एक पुल के पास हुई थी, जो रूस के क़ब्ज़े वाले क्राइमिया प्रायद्वीप की ओर जाता है.
इस हफ़्ते रूस के सरहदी इलाक़े ब्रियांस्क में दो अलग-अलग धमाके हुए, जिससे सेना की रसद ले जा रही मालगाड़ियां पटरी से उतर गईं. वहीं, लेनिनग्राड क्षेत्र में एक संदिग्ध विस्फोटक के धमाके में बिजली की तारें तबाह हो गई थीं.
वैसे तो, यूक्रेन ने इनमें से किसी भी हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है. लेकिन, उसकी सेना हमेशा से ये कहती रही है कि रूसी सैन्यबलों की रसद की आपूर्ति पर चोट करना, उसके उस जवाबी हमले का ही हिस्सा है जिसका लंबे वक़्त से इंतज़ार हो रहा है.
रूस ने सुरक्षा को ख़तरे का हवाला देते हुए, इस साल अपनी विक्ट्री डे परेड के जश्न को भी काफ़ी सीमित कर दिया था.
रूसी राष्ट्रपति के कार्यालय क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा था कि, "हमको निश्चित रूप से ये पता है कि ऐसे कई हमलों और आतंकवादी हरकतों में यूक्रेनी सरकार का हाथ है. और वो अपने इस अभियान को जारी रखने की योजना पर काम कर रही है."

इमेज स्रोत, EPA
जवाबी हमले की तैयारी कैसे कर रहा है यूक्रेन?
अमेरिका का आकलन है कि दिसंबर से लेकर अब तक, इस जंग में रूस 2022 के आख़िरी महीनों के बाद से यूक्रेन की सेना ने रूस और यूक्रेन के मोर्चे पर कोई बड़ा आक्रामक अभियान नहीं चलाया है. सर्दियों के महीनों में यूक्रेन की फ़ौज, रूस के सैनिकों का मनोबल तोड़ने और उनके रिज़र्व फ़ौजियों को थकाने की रणनीति पर अमल करती रही है.
अमेरिका का आकलन है कि दिसंबर से लेकर अब तक, इस जंग में रूस के 20 हज़ार से ज़्यादा सैनिक जान गवां चुके हैं.
हाल ही में सार्वजनिक की गई ख़ुफ़िया जानकारी का हवाला देकर अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने बताया था कि इस युद्ध में, रूस के 80 हज़ार सैनिक ज़ख़्मी हो चुके हैं. हालांकि, बीबीसी इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर पाया है.
इसके साथ ही, शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि यूक्रेन की सेना ने 12 नई ब्रिगेड तैयार की हैं, जिनमें 40 से 50 हज़ार नए सैनिक शामिल हैं.
यूक्रेन ने बड़ी तादाद में सैन्य साज़ो-सामान भी हासिल किया है. इनमें पश्चिमी देशों से मिली बख़्तरबंद गाड़ियां और तोपख़ाने शामिल हैं.
पहले यूक्रेन के अधिकारियों ने बताया था कि रूस के ख़िलाफ़ उनका जवाबी अभियान अप्रैल के आख़िर या मई महीने की शुरुआत में हो सकता है. अमेरिकी विदेश विभाग के हवाले से वहां की मीडिया ने भी यूक्रेन के जवाबी हमले की यही तारीख़ बताई थी. हालांकि, अप्रैल का महीना तो अब बीत चुका है.
लेकिन, इतना बड़ा कोई भी सैनिक अभियान कई बातों पर निर्भर करता है, जिसमें मौसम भी शामिल है. अप्रैल में पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेन में भारी बारिश हुई थी. ऐसे में, बख़्तरबंद गाड़ियों को कीचड़ में तेज़ रफ़्तार से चलने में परेशानी हुई होती.
इसके बावजूद, मई महीने में खुले मौसम ने यूक्रेन के जवाबी हमले के आग़ाज़ को लेकर चर्चाओं को काफ़ी हवा दी है.
रूस के फ़ौजी ब्लॉगर और निजी सैनिक कंपनी वैग्नर पीएमसी के प्रमुख येवगेनी प्रिगोज़िन ने कहा है कि यूक्रेन का जवाबी आक्रमण 15 मई से पहले शुरू हो सकता है, क्योंकि तब तक ज़मीन इतनी सख़्त हो चुकी होगी कि उस पर से भारी फ़ौजी गाड़ियां आराम से गुज़र सकें.

इमेज स्रोत, Reuters
यूक्रेन जवाबी हमला क्यों करेगा?
यूक्रेन के अधिकारी और उनके पश्चिमी सहयोगी, दोनों ही ये कहते रहे हैं कि यूक्रेन के सैन्यबलों के जवाबी हमले की कामयाबी बेहद अहम है.
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की, रूस के क़ब्ज़े से अपने देश की ज़मीन छुड़ाने को बेक़रार हैं. वो ये भी दिखाना चाहते हैं कि अमेरिका और यूरोप की सरकारों ने उनकी सेना को जो मदद दी है, जो हथियार और गोला-बारूद मुहैया कराए हैं, वो उसके लिए उपयोगी है.
हालांकि, कामयाबी हासिल करने में यूक्रेन के सैनिकों को काफ़ी मुश्किलें आएंगी.
जहां तक बख़्तरबंद गाड़ियों और सैनिकों की संख्या का सवाल है, तो यूक्रेनी सेना इस मामले में रूस से पीछे है. लड़ाकू विमानों की संख्या और क्षमता के मामले में भी यूक्रेन अभी रूस से बहुत पीछे है.
हवाई हमले के मामले में अपनी इस कमी को पूरा करने के लिए यूक्रेन के सैन्यबलों को बड़ी तादाद में ऐसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम की दरकार होगी, जिन्हें कहीं भी लाया या ले जाया जा सके. लेकिन मई के शुरुआती दिनों तक उनके पास इतनी बड़ी संख्या में एयर डिफेंस सिस्टम नहीं हैं कि वो बड़े मोर्चे पर अभियान चला सकें.
लेकिन, रूस की सेना भी कई चुनौतियों का सामना कर रही है. उसको अपनी अलग-अलग टुकड़ियों के बीच तालमेल बनाने और उनके प्रशिक्षण में दिक़्क़तें आ रही हैं. जंग के मैदान में उतारे जा रहे रूसी सैनिकों का मनोबल और उनकी मानसिक स्थिति भी काफ़ी कमज़ोर है.
मरीनका, वुहलेदर, अवदीविका और बख़मूत पर क़ब्ज़ा करने के उनके अभियान लगातार नाकाम साबित हो रहे हैं. जिससे रूस के सैनिक काफ़ी निराशा के शिकार हैं. ख़ास तौर से जंग के मोर्चे पर तैनात सैनिकों को गोला-बारूद मुहैया कराने में आ रही परेशानियों ने उन्हें थका दिया है.
यूक्रेन का जवाबी हमला कहां होगा?

इमेज स्रोत, Getty Images
हमले से दुश्मन को हैरान करने की नीयत से यूक्रेन के नेताओं ने अपने जवाबी अभियान के टारगेट को गोपनीय ही रखा है.
हालांकि, सैन्य मामलों के माहिरों और विश्लेषकों ने ऐसे कई इलाक़ों की तरफ़ इशारा किया है, जिन्हें यूक्रेन अपने जवाबी हमले का निशाना बना सकता है.
ऐसा ही एक इलाक़ा, दक्षिणी यूक्रेन में ज़फ़रोशिया है. इस दिशा में आगे बढ़ने पर, यूक्रेन की सेना रूस के क़ब्ज़े वाले क्राइमिया और डोनबास क्षेत्र को जोड़ने वाले रास्ते को निशाना बना सकती है. इससे दोनों ही दिशाओं में रूस की सप्लाई लाइन टूट जाएगी.
हालांकि, रूस की सेना ने भी इस इलाक़े में ज़बरदस्त मोर्चेबंदी कर रखी है. यहां रूसी सैनिकों ने कई रक्षा पंक्तियां और यहां तक कि बड़ी बड़ी खंदकें भी बना रखी हैं.
इस बीच, यूक्रेन के पूर्वी शहर बख़मूत पर क़ब्ज़े की लड़ाई इस युद्ध का सबसे लंबा और ख़ूनी संघर्ष साबित हुआ है.
यूक्रेन के राष्ट्रपति इसे यूक्रेन के क़ौमी मनोबल का 'क़िला' कहते हैं.
अगर यूक्रेन की सेना बख़मूत पर दोबारा क़ब्ज़ा कर पाने में कामयाब रहती है, तो इससे सामरिक रूप से अहम पोपासना, होरलिवका और अवदीवका शहरों में रूस की रक्षा पंक्तियां ध्वस्त हो जाएंगी.
यूक्रेन के संभावित जवाबी हमले के दूसरे ठिकानों में खेरसोन से दक्षिण और पूर्व में हमला करना, या फिर वुहलेदार से वोलनोवखा की ओर आगे बढ़ने का विकल्प भी है. या फिर, यूक्रेन की फ़ौज पूर्व में लुहांस्क क्षेत्र के स्वातोव और क्रेमिना शहरों के बीच सामरिक रूप से बेहद अहम रास्ते को निशाना बनाने की कोशिश भी कर सकती है.
ये भी पढ़ें
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)














