यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने पोस्ट किया 'काली' का पोस्टर, क्यों करना पड़ा डिलीट और मांगनी पड़ी माफ़ी

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- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
हिंदू देवी काली को आपत्तिजनक तरीक़े से चित्रित करने वाले एक विवादास्पद पोस्टर को ट्विटर पर साझा करने के लिए यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय की आलोचना के बाद यूक्रेन सरकार ने भारत से माफ़ी मांग ली है.
कुछ दिन पहले यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से देवी काली की एक आपत्तिजनक तस्वीर शेयर की गई थी जिसे देश के रक्षा मंत्रालय ने 'वर्क ऑफ़ आर्ट' या कला का काम कहकर ट्वीट किया था.
लेकिन भारत से इस पर तीखी प्रतिक्रिया आने के बाद इस ट्वीट को अब डिलीट कर दिया गया है.
मंगलवार को यूक्रेन की उप-विदेश मंत्री एमीन दझेपर (Emine Dzheppar) ने एक ट्वीट करके अपना खेद प्रकट किया.
अपने ट्वीट में उन्होंने कहा, "हमें अफ़सोस है @DefenceU #हिंदू देवी #काली को विकृत तरीक़े से चित्रित किया गया. #यूक्रेन और यूक्रेन के लोग अद्वितीय #भारतीय संस्कृति का सम्मान करते हैं और अत्यधिक समर्थन की सराहना करते हैं. चित्रण पहले ही हटा दिया गया है. आपसी सम्मान और मित्रता की भावना में सहयोग को और बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्पित है."
भारत में लोग, इसे अपमानजनक और 'हिंदूफ़ोबिया' बता रहे हैं. भारत के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सलाहकार कंचन गुप्ता ने कहा कि यह दुनिया भर में हिंदू भावनाओं पर हमला है.
यूक्रेन के उप-विदेश मंत्री एमीन दझेपर अभी हाल ही में भारत के दौरे पर आयी थीं. पिछले साल यूक्रेन में युद्ध शुरू होने के बाद उस देश के किसी भी मंत्री का ये पहला दौरा था.
इसका हवाला देते हुए कंचन गुप्ता ने एक ट्वीट में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हाल में यूक्रेन की उप-विदेशमंत्री भारत का समर्थन हासिल करने दिल्ली आयी थीं. "उस फ़र्ज़ीवाड़े के पीछे यूक्रेन सरकार का असली चेहरा छिपा है. भारतीय देवी माँ काली को एक प्रोपेगंडा पोस्टर पर चित्रित किया गया है, जो दुनिया भर में हिंदू भावनाओं पर हमला है."

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पहले भी हुए हैं विवाद
राजनीतिक और विदेशी मामलों के जानकार डॉक्टर सुव्रोकमल दत्ता कहते हैं कि वो यूक्रेन के "अपमान" से अचंभित नहीं हैं.
"जिस तरह से यूक्रेन ने भारत की संस्कृति और माँ काली को लेकर गंदगी फैलाने की कोशिश की है, जिस तरह से हिन्दू संस्कृति को यूक्रेन ने दुत्कारने की कोशिश की है यह पहली बार नहीं हुई है. यूक्रेन ने पहले भी किया है, आज भी किया है और आगे भी करेगा."
"जिस तरह से मां काली को अश्लील तरीक़े से दिखाया गया है वो कोई नई बात नहीं है. यूक्रेन हमेशा भारत विरोधी रहा है. 1998 में जब अटल बिहार वाजपेयी के नेतृत्व में भारत ने परमाणु परीक्षण किया था तो यूक्रेन ने संयुक्त राष्ट्र में भारत के ख़िलाफ़ वोट किया था. यूक्रेन हमेशा से पाकिस्तान के पक्ष में रहा है. ये कहीं न कहीं दर्शाता है यूक्रेन की भारत विरोधी मानसिकता."
डॉक्टर सुव्रोकमल दत्ता कहते हैं कि पिछले साल फ़रवरी में रूस ने जब यूक्रेन पर आक्रमण किया था तब से भारत ने एक निष्पक्ष भूमिका अदा की है.
"यूक्रेन की मांग थी कि उसे भारत का रूस के ख़िलाफ़ समर्थन मिल जाए लेकिन भारत ने निष्पक्षता दिखाई, उससे भी यूक्रेन को ये बात हज़म नहीं हुई है"
सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सलाहकार कंचन गुप्ता ने एक ट्वीट में यूक्रेन की इस हरकत की खुल कर निंदा की "आप संयुक्त राष्ट्र में लगातार भारत विरोधी रुख़ अपनाते हैं. आप 1998 के परमाणु परीक्षणों के बाद भारत के ख़िलाफ़ यूएनएससी प्रतिबंधों के लिए मतदान करते हैं. आप धारा 370 के निरस्त होने के बाद कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप के लिए ज़ोर देते हैं. आप भारत के ख़िलाफ़ इस्तेमाल करने के लिए पाकिस्तान को सैन्य उपकरण बेचते हैं. फिर भी आप भारत की मदद चाहते हैं."
सोशल मीडिया पर भी भारतीयों की तीखी प्रतिक्रियाएं आयी हैं और कई ने यूक्रेन से नाराज़गी का इज़हार किया है.
धर्मा नामी ट्विटर हैंडल से किये गए एक ट्वीट में कहा गया, "अगर कोई एक काम था जो आपको नहीं करना चाहिए था, तो वह बिल्कुल यही था. नया भारत इसे बर्दाश्त करने वाला नहीं है. हम इसे याद रखेंगे. अगर आप लोगों को लगता है कि आप भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का मज़ाक़ उड़ाएंगे, तो आपको मोदी सरकार के अलग-अलग रुख़ की प्रतीक्षा करनी चाहिए."

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यूक्रेन के ख़िलाफ़ कड़ा रुख़ अपनाने की मांग
यूक्रेन की उप-विदेश मंत्री हाल में भारत आयीं ताकि रूस के ख़िलाफ़ और अपने देश के पक्ष में भारत को राज़ी कर लें. लेकिन वो अपने मक़सद में कामयाब नहीं हुईं.
डॉक्टर सुव्रोकमल दत्ता ने दलील दी कि यूक्रेन की इसी उप-विदेश मंत्री ने एक बार नहीं कई बार मांग की है कि भारत पर प्रतिबंध अमेरिका और नाटो देशों की तरफ़ से लगनी चाहिए (रूस से तेल ख़रीदने के कारण).
जबकि भारत का हमेशा से ये कहना है कि ये पूरा मामला शांति से सुलझाया जा सकता है. यूक्रेन चाहता है कि रूस को अलग-थलग कर दिया जाए और भारत उसका साथ दे. भारत ने ऐसा नहीं किया. यूक्रेन को ये बात हज़म नहीं हुई और उसके बाद से इसने भारत विरोधी पक्ष दिखाया है.
कश्मीर के मुद्दे पर यूक्रेन ने हमेशा से ही पाकिस्तान का साथ दिया है. यूक्रेन ने कश्मीर में और दूसरी जगहों पर चरमपंथ का कभी खंडन नहीं किया है अंतरराष्ट्रीय पटल पर.
"जब यूक्रेन की सोच इस तरह की रही है तो उसके बाद ये अपेक्षा करना कि यूक्रेन भारत के पक्ष में अच्छी बात कहेगा या भारत के इतिहास और इसकी संस्कृति को लेकर एक अच्छा रुख़ रखेगा इसकी हमें तो अपेक्षा भी नहीं है."
डॉक्टर दत्ता भारत सरकार से यूक्रेन के ख़िलाफ़ कड़ा रुख़ अपनाने की मांग करते हैं.
वो कहते हैं, "समय आ गया है कि जिस तरह से यूक्रेन एजेंडा चला रहा है भारत के ख़िलाफ़ और हिन्दुओं के विरुद्ध भारत सरकार को यूक्रेन के ख़िलाफ़ एक कड़ा रुख़ अपनाने की ज़रूरत है और अंतरराष्ट्रीय पटल पर यूक्रेन को कटघरे में खड़ा करने की ज़रूरत है. भारत सरकार यूक्रेन के ख़िलाफ़ घोर निंदा करने की ज़रूरत है."
भारत सरकार की तरफ़ से इस घटना पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है लेकिन कई विशेषज्ञों का कहना है कि यूक्रेन की ग़लती के पीछे कोई मक़सद ढूंढ़ना सही नहीं होगा.

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क्या ये ग़लती से हुआ?
यूक्रेन भारत विरोधी है ये भी दावे से नहीं कहा जा सकता. भारत के विदेश मंत्रालय में सोच ये है कि यह ग़लती हिंदू संस्कृति के बारे में अज्ञानता के कारण हो सकती है. यूक्रेन ने ट्वीट को डिलीट कर दिया और माफ़ी मांग ली, भारत सरकार के लिए फ़िलहाल इतना काफ़ी है
काली शक्ति, विनाश और निर्माण और विनाश के चक्र से जुड़ी एक हिंदू देवी है. ख़ास तौर से भारत से बाहर हिंदू पौराणिक कथाओं में उनकी भूमिका के बारे में समझ या ज्ञान की कमी हो सकती है. हिन्दू संस्कृति के बारे में कम जानकारी की वजह से भी कई ऐसे मामले सामने आये हैं जिन्हें अपमान की श्रेणी में रखा जाता है.
हाल के महीनों में ऑस्ट्रेलिया समेत कुछ पश्चिमी देशों में हिन्दू मंदिरों पर हमले हुए हैं जिनकी भारत सरकार ने निंदा की है.
लेकिन दूसरी तरफ़ कई हिन्दू संस्थाओं ने जान बूझ कर हिन्दुओं और उनकी संस्कृति पर आक्रमण की वारदातों पर चिंता जताई है.
उनका कहना है कि हिन्दू-विरोधी "हिन्दूफ़ोबिया" की वारदातें बढ़ रही हैं.
शायद इसीलिए पिछले महीने जॉर्जिया अपने संकल्प में "हिंदू-विरोधी कट्टरता" की निंदा करने वाला पहला अमेरिकी राज्य बन गया, जिसमें दावा किया गया है कि 100 से अधिक देशों में 1.2 अरब से अधिक धर्म के लोगों के साथ, हिंदू धर्म विविध परंपराओं और विश्वास प्रणालियों का गढ़ है.
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