ब्रिटेन के लेस्टर में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच कैसे भड़की हिंसा, क्या है 'इंडिया कनेक्शन'?

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    • Author, रेहा कंसारा और अब्दीरहीम सईद
    • पदनाम, बीबीसी ट्रेंडिंग और बीबीसी मॉनिटरिंग
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मुख्य तथ्य

  • कुछ लोग तनाव और उसकी प्रतिक्रिया को हिंदुत्व की विचारधारा से जोड़ते हैं. उनका मानना है कि भारतीय हिंदूवादी राजनीति को लेस्टर में लाया जा रहा है, लेकिन अब तक बीबीसी को इस तरह के किसी समूह से मामले का कोई सीधा संबंध नहीं मिला है.
  • कई वीडियो और सोशल मीडिया पर शेयर किए गए पोस्ट पूरी तरह से झूठे नहीं थे, लेकिन उन्हें तोड़-मरोड़ कर और संदर्भ बदल कर शेयर किया गया.
  • दो लाख ट्विटर अकाउंट को बीबीसी ने मॉनिटर किया और पाया कि इनमें से एक लाख अकाउंट की जियो-लोकेशन भारत है.
  • कई भारतीय अकाउंट में कोई तस्वीर नहीं थी और उन्हें इस महीने की शुरुआत में ही बनाया गया था.
  • इन भारतीय अकाउंट्स से #Leicester, #HindusUnderAttack and #HindusUnderattackinUK जैसे हैशटैग का इस्तेमाल किया गया.
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ब्रिटेन के लेस्टर शहर में हिंदू और मुसलमान समुदाय के लोगों बीच हाल ही में हुए तनाव और हिंसा में 16 पुलिसकर्मी घायल हुए. इस तनाव की शुरुआत 28 अगस्त को भारत-पाकिस्तान के बीच खेले गए क्रिकेट मैच से बताई जा रही है.

लेकिन सवाल है कि इस हिंसा में ऑनलाइन मिसइन्फ़ॉर्मेशन यानी भ्रामक जानकारियों की क्या भूमिका थी और सांप्रदायिक तनाव इसके कारण कितनी तेज़ी से फैला? ये समझने के लिए बीबीसी ने एक सप्ताह तक लेस्टर हिंसा को लेकर फैलाई गई ग़लत ख़बरों और दावों की पड़ताल की और ये देखना चाहा कि कैसे हिंसा के समय और उसके बाद इन ग़लत दावों ने माहौल को और बिगाड़ने का काम किया.

टेम्पररी चीफ़ कॉन्स्टेबल रॉब निक्सन ने 'बीबीसी टू' के शो 'न्यूज़नाइट' पर कहा कि लोगों ने जान-बूझ कर सोशल मीडिया का इस्तेमाल माहौल को और ख़राब करने के लिए किया.

मेयर सर पीटर सोल्सबी ने भी ऑनलाइन डिसइन्फॉर्मेशन को तनाव बढ़ाने के लिए ज़िम्मेदार बताते हुए कहा था कि सोशल मीडिया के कारण ये मामला बढ़ा वरना 'स्थानीय तौर पर ऐसा होने का कोई कारण नज़र नहीं आता.'

जब हमने लेस्टर में लोगों से और समुदाय के नेताओं से बात की तो उन लोगों ने कुछ ख़ास तरह की भ्रामक सूचनाओं का ज़िक्र किया जिसने 17 और 18 सितंबर को हिंसा के दौरान माहौल को और ख़राब किया.

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वो 'भ्रामक सूचना' जिसे कई लोगों से शेयर किया गया

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ऐसी ही एक ग़लत ख़बर को कई लोगों ने शेयर किया, जो इस तरह थी-

"आज मेरी 15 साल की बेटी किडनैप होते-होते बची... तीन भारतीय लड़कों ने उससे पूछा कि क्या वह मुस्लिम है? जब उसने 'हां' कहा तो उनमें से एक ने उसे पकड़ने की कोशिश की."

फे़सबुक पर ये पोस्ट लिखी गई थी और लिखने वाले ने ख़ुद को लड़की का पिता बताया.

इस पोस्ट को 13 सितंबर को जब एक कम्युनिटी वर्कर माजिद फ़्रीमैन ने ट्विटर पर शेयर किया तो इसे सैकड़ों लाइक्स मिले.

लेकिन इस मामले में किडनैपिंग की कोई कोशिश नहीं की गई थी जैसा कि दावा किया जा रहा था.

इसके एक दिन बाद लेस्टर पुलिस ने मामले की पड़ताल के बाद बयान जारी करते हुए कहा कि 'तरह की कोई घटना नहीं हुई.'

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जिसके बाद माजिद ने अपना पुराना ट्वीट डिलीट कर दिया और कहा कि उनका ट्वीट परिवार के साथ बातचीत पर आधारित था. माजिद ने इसके बाद पुलिस के बयान को ट्वीट किया. लेकिन तब तक उस ट्वीट के कारण नुक़सान हो चुका था और किडनैपिंग की ये झूठी ख़बर कई प्लेटफ़ॉर्म पर फैल गई थी.

ये मैसेज व्हॉट्सऐप पर 'फ़ॉर्वर्डेड मेनी टाइम्स' के टैग से साथ फैल रहा था जिसे कई लोगों ने सच मान लिया. हज़ारों-सैकड़ों फ़ॉलोवर्स वाले इंस्टाग्राम अकाउंट ने इस पोस्ट के स्क्रीनशॉट शेयर किए और इसके साथ दावा किया कि हिंदू लड़के ने इस किडनैपिंग की कोशिश की.

हालांकि प्राइवेट मैसेजिंग ऐप पर इस मैसेज के वायरल होने का स्केल क्या रहा, ये ठीक-ठीक पता लगाना संभव नहीं है. हालांकि पब्लिक पोस्ट के लिए हमने क्राउडटैंगल टूल का इस्तेमाल किया और हमें 'किडनैपिंग की कोशिश' की कोई पोस्ट तो नहीं मिली, लेकिन संभव है कि ये दावा प्राइवेट मैसेज ग्रुप में अभी भी फैलाया जा रहा हो.

लेस्टर में कई लोग ये कहते हैं कि इस तनाव की जड़ें काफ़ी पीछे तक जाती हैं. कई मीडिया रिपोर्टों में लेस्टर में हुई एक घटना का ख़ास तौर पर ज़िक्र मिलता है जो 28 अगस्त को दुबई में हुए एशिया कप में पाकिस्तान पर भारत की नाटकीय जीत के बाद हुई थी.

लेकिन इसके बाद कई तरह की भ्रामक सूचनाएं फैलने लगीं और ये पूरी तरह से झूठी ख़बरें नहीं थी बल्कि तथ्यों को अलग-अलग संदर्भों में और तोड़-मरोड़कर फैलाई गई थीं.

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मैच से पहले 22 मई को पड़ा तनाव का बीज

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कुछ तो ज़रूर हुआ था. हिंसा फैलने और पुलिस के आने से पहले उस रात का वीडियो सामने आया जिसमें भारत की जर्सी पहने लोगों का एक समूह 'पाकिस्तान मुर्दाबाद' के नारे लगाता हुए मेल्टन रोड पर मार्च करता दिखा.

लेकिन सोशल मीडिया पर एक दूसरा वीडियो वायरल होने लगा जिसे देखकर ऐसा लग रहा था मानो इस समूह ने एक मुलसमान पर हमला किया. लेकिन बाद में ये पता लगा कि वो व्यक्ति सिख था.

लेस्टर में कुछ लोगों का कहना है कि इस घटना के बीज काफ़ी पहले पड़ गए थे. वे 22 मई की एक घटना का ज़िक्र करते हैं. सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया जिसमें 19 साल के एक मुस्लिम लड़के का पीछा एक समूह कर रहा था. सोशल मीडिया पर कहा गया कि ये 'हिंदू चरमपंथियों' का समूह था. कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में इसे हिंदुत्व से जोड़ा गया जो भारत में दक्षिणपंथी हिंदू राष्ट्रवादियों की विचारधारा है.

हालांकि इस वीडियो में बहुत कुछ नहीं दिखता. ये एक धुंधला और ब्लैक एंड व्हाइट वीडियो है जिसमें सड़क पर भागते कुछ आदमी नज़र आते हैं. वीडियो से ये पता लगाना मुश्किल है कि इसमें दिख रहे लोग कौन हैं और उनकी पृष्ठभूमि क्या है.

इस मामले पर पुलिस ने कहा है कि वो पब्लिक ऑर्डर के उल्लंघन की रिपोर्ट की जांच कर रही है और इस मामले में एक 28 वर्षीय व्यक्ति से पूछताछ की गई है और जांच जारी है. लेकिन वीडियो में पीड़ित कौन था उस व्यक्ति की धार्मिक पहचान की जानकारी नहीं दी गई है.

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इस मामले की जांच अब भी जारी है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसको लेकर धार्मिक रूप से प्रेरित पोस्ट शेयर किए गए.

हालांकि सोशल मीडिया पर फैलाई कई ग़लत सूचनाओं और तोड़-मरोड़ कर पेश किए गए तथ्यों ने वास्तव में माहौल को किस हद तक प्रभावित किया है, इसका सटीक तरीके से अंदाज़ा लगाना बेहद मुश्किल है.

कैसे लाखों भारतीय अकाउंट् ने फैलाई अप्रामाणिक जानकारी

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इन तीन घटनाओं ने ना सिर्फ़ सोशल मीडिया पर गतिविधियों और प्रतिक्रियाओं की बाढ़ ला दी बल्कि 17-18 सितंबर को लेस्टर में फैले तनाव में इनकी सबसे ज़्यादा चर्चा रही.

बीबीसी मॉनिटरिंग ने कमर्शियल ट्विटर एनालिसिस टूल ब्रैंडवॉच का इस्तेमाल कर एक पड़ताल की और पाया कि पांच लाख ऐसे ट्वीट थे जो लेस्टर की घटना को लेकर अंग्रेज़ी में किए गए.

दो लाख ट्वीट का सैंपल साइज़ बीबीसी मॉनिटरिंग ने लिया कि इनमें से आधे अकाउंट यानी एक लाख अकाउंट की जियो-लोकेशन भारत है. इन भारतीय अकाउंट में #Leicester, #HindusUnderAttack and #HindusUnderattackinUK जैसे हैशटैग का इस्तेमाल किया गया.

बीबीसी ने पाया कि कई अकाउंट्स ने इन हैशटैग के साथ सूचना को तोड़-मरोड़ कर पेश किया.

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भारत की लोकेशन वाले इन अकाउंट्स में से कई में कोई प्रोफ़ाइल फ़ोटो तक नहीं थी और ये अकाउंट इस महीने में ही बनाए गए थे. ये क्लासिक संकेत है कि इस अकाउंट पर होने वाली गतिविधि 'अप्रामाणिक' है और इस बात की ओर भी इशारे करती है एक ही आदमी कई अकाउंट के ज़रिए एक नैरेटिव फैलाने का काम कर रहा है.

बीबीसी ने इन हैशटैग्स के साथ शेयर किए गए टॉप-30 लिंक की भी पड़ताल की. इनमें से 11 आर्टिकल के लिंक न्यूज़ वेबसाइट ऑपइंडिया डॉट कॉम के हैं. ये वेबसाइट ख़ुद के बारे में लिखती है- 'ब्रिंगिंग द राइट साइ़ड ऑफ़ इंडिया टू यू.'

साथ ही संभावित रूप से अप्रामाणिक अकाउंट्स के साथ-साथ ऑपइंडिया की ख़बरों के लिंक ऐसे अकाउंट्स ने भी साझा किए हैं जिनके फ़ॉलोवर हज़ारों में हैं.

ऑपइंडिया का एक लेख ऐसा है जिसमें उन्होंने ब्रितानी थिंक टैंक 'हेनरी जैक्सन सोसाइटी' की शोधकर्ता शॉरलेट लिटिलवुड के जीबी न्यूज़ को दिए गए इंटरव्यू का हवाला देते हुए लिखा है कि कई हिंदू परिवार मुसलमानों की हिंसा के डर के कारण लेस्टर छोड़ कर जा रहे हैं. इस ऑर्टिकल को 2500 बार रीट्वीट किया गया है.

लेस्टर पुलिस का कहना है कि उन्हें इस तरह हिंदू परिवारों के लेस्टर छोड़ कर जाने की कोई जानकारी नहीं है.

यहां ग़ौर करने वाली बात ये है कि 17-18 सितंबर से पहले बड़ी संख्या में ट्वीट सामने नहीं आ रहे थे.

ब्रिटेन में वायरल हो रहे सोशल मीडिया पोस्ट में ये भी दावा किया गया कि बसों में भर कर हिंदू कार्यकर्ता लेस्टर पहुंच रहे हैं ताकि माहौल में और तनाव पैदा हो.

23 सितंबर तक पुलिस ने 47 लोगों को इस मामले में गिरफ़्तार किया गया है जिनमें से आठ लोगों को अभियुक्त बनाया गया है, 47 लोगों में से 36 लोग ही लेस्टर के रहने वाले हैं. आठ बर्मिंघम से हैं और दो लोग लंदन के रहने वाले हैं. लेकिन जिन आठ लोगों को अभियुक्त बनाया गया है वे सभी लेस्टर के ही रहने वाले हैं.

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18 सितंबर को एक वीडियो व्हाट्सएप और ट्विटर पर सामने आया जिसमें लंदन के एक मंदिर के सामने बस खड़ी नज़र आ रही है.

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इमेज कैप्शन, 18 सितंबर को एक वीडियो व्हाट्सएप और ट्विटर पर सामने आया जिसमें लंदन के एक मंदिर के सामने बस खड़ी नज़र आ रही है.

भ्रामक सूचना- बस में लंदन से लेस्टर गए हिंदू

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18 सितंबर को एक वीडियो व्हॉट्सऐप और ट्विटर पर सामने आया जिसमें लंदन की एक मंदिर के सामने बस खड़ी नज़र आ रही है. इस वीडियो में एक आवाज़ भी सुनाई दे रही है जिसनें दावा किया जा रहा है कि ये बस लेस्टर से वापस आ रही है.

इसके अगले दिन बस के मालिक ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर कहा, "कई लोग मुझे फ़ोन कर रहे हैं, मुझे धमका रहे हैं और बिना किसी वजह के गालियां दे रहे हैं."

उन्होंने बताया कि बीते दो महीने से उनकी कोई भी बस लेस्टर गई ही नहीं है. उन्होंने प्रमाण के तौर पर जीपीएस ट्रैकर का रिकॉर्ड पेश किया जिसमें पिछले वीडियो में दिखने वाली बस की लोकेशन 17-18 सितंबर वाले सप्ताहांत में दक्षिण-पूर्वी इंग्लैंड है.

बर्मिंघम में सोमवार 19 सितंबर को आग लगने के कारणों के बारे में झूठे दावे प्रसारित किए गए. ट्विटर पर हज़ारों बार देखे गए पोस्ट बिना सबूत के आग लगाने के लिए "इस्लामी चरमपंथियों" को दोषी ठहराते रहे.

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बर्मिंघम में सोमवार 19 सितंबर को आग लगने के कारणों के बारे में झूठे दावे प्रसारित किए गए

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लेकिन जब वेस्ट मिडलैंड्स फ़ायर सर्विस ने आग लगने के कारण की जांच की तो पाया कि ये दुर्घटना इमारत के बाहर जल रहे कचरे की आग फैलने कारण हुई.

यक़ीनन ये नहीं कहा जा सकता कि लेस्टर की घटना के बाद सभी सोशल मीडिया पोस्ट झूठी और भ्रामक ही थीं.

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मुस्लिम इलाके में 'जय श्रीराम' के नारे वाला वीडियो

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लेस्टर तनाव में जो वीडियो सबसे ज़्यादा वायरल हुए उनमें से एक था जिसमें चेहरा ढके हुए हिंदू लोग 'जय श्रीराम' के नारे लगाते हुए ग्रीन लेन रोड पर मार्च कर रहे थे. ये वो इलाका है जहां बड़ी आबादी मुसलमानों की है.

एक और वीडियो फैलाया गया जिसमें कहा गया कि एक मुसलमान आदमी मंदिर से भगवा झंडा उतार रहा है. शहर के बेलग्रेव रोड स्थित एक मंदिर से शनिवार 17 सितंबर की रात को एक झंडा उतारा गया था और पुलिस इसकी जांच कर रही है. हालांकि झंडा उतारने वाला कौन था, उसकी पहचान अब तक ज़ाहिर नहीं की गई है.

झूठे दावों और भड़काऊ सोशल मीडिया पोस्ट ने हिंदुओं और मुसलमानों के बीच तनाव को बढ़ाया दिया, ये समुदाय जो सालों से एक दूसरे के साथ रह रहे हैं.

दशकों से लेस्टर शहर दक्षिण एशियाई लोगों का घर रहा है जो भारत और पूर्वी अफ़्रीका से ब्रिटेन आए थे और वे साथ-साथ रहते रहे हैं और समान अधिकारों के लिए एक साथ संघर्ष किया है.

कुछ लोग तनाव और उसकी प्रतिक्रिया को हिंदुत्व की विचारधारा से जोड़ते हैं. उनका मानना है कि भारतीय राजनीति को लेस्टर में लाया जा रहा है, लेकिन अब तक बीबीसी को इस तरह के किसी समूह से मामले का कोई सीधा संबंध नहीं मिला है.

यह निश्चित तौर पर बता पाना मुश्किल है कि इस हिंसक तनाव का कारण क्या रहा, लेकिन एक बात स्पष्ट है कि सोशल मीडिया पर लोगों को बांटने की कोशिश की गई.

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