ब्रिटेन: हिंदू-मुसलमान झगड़े के बाद 47 गिरफ़्तार, क्या कह रहे हैं लोग

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- Author, गगन सभरवाल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लंदन
ब्रिटेन के लेस्टर शहर में बीते शनिवार हिंदू और मुसलमान युवाओं के बीच झगड़ा होने के बाद स्थानीय पुलिस ने 47 लोगों को गिरफ़्तार किया है. इस शहर में दोनों पक्षों के बीच तनाव भड़कने की ये पहली घटना नहीं है. इस तनाव की शुरुआत 28 अगस्त को भारत-पाकिस्तान के बीच खेले गए क्रिकेट मैच से हुई थी.
इंग्लैंड के पूर्वी मिडलैंड्स में स्थित लेस्टर शहर की आबादी में लगभग 37 फ़ीसद लोग दक्षिण एशियाई मूल के हैं. इनमें से ज़्यादातर भारतीय मूल हैं.
लेस्टर पुलिस के कार्यकारी चीफ़ कांस्टेबल रॉब निक्सन ने बताया है कि शनिवार को एक-दूसरे पर हमला करते दोनों पक्षों के युवाओं को रोकने के दौरान 16 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. इस घटना में पुलिस का एक कुत्ता भी घायल हुआ है.
दोनों पक्षों के बीच बवाल होने की सूचना मिलने के बाद महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में तैनात पुलिसकर्मियों को वहां से हटाकर तनाव को शांत करने में लगाया गया.
लेस्टर पुलिस ने बताया है कि शनिवार को हुए बवाल की शुरुआत एक विरोध प्रदर्शन से हुई जिसकी अनुमति नहीं दी गई थी.
इसके बाद रविवार को हुए एक अन्य विरोध प्रदर्शन में 100 लोग शामिल हुए.
हालांकि, पुलिस का कहना है कि रविवार को हुए प्रदर्शन में किसी तरह की अप्रिय घटना सामने नहीं आई है.
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स्थानीय लोगों की प्रतिक्रियाएं

लेस्टर के हिंसा प्रभावित इलाके बेलग्रेव रोड में एक रेस्तरां मालिक धर्मेश लखानी ने बीबीसी के साथ अपनी चिंताएं साझा की हैं.
वह कहते हैं, "हम अपने सहकर्मियों, कर्मचारियों और ग्राहकों को लेकर चिंतित हैं. वे कह रहे हैं कि वे काफ़ी डरे हुए हैं और फ़ोन करके अपनी बुकिंग रद्द करवा रहे हैं."
धर्मेश लखानी के लिए ये सब कुछ काफ़ी परेशान करने वाला है क्योंकि महंगाई संकट की वजह से उनका रेस्तरां इस समय काफ़ी चुनौतीपूर्ण दौर से गुज़र रहा है.
धर्मेश उन चुनिंदा लोगों में शामिल हैं जिन्होंने शनिवार की घटना को अपनी आंखों से देखा था.
वह कहते हैं, "पुलिस इस हिंसा को रोकने के लिए काफ़ी संघर्ष कर रही थी और मुझे ये देखकर काफ़ी दुख हुआ कि ये सब मेरे शहर में हो रहा है."
इसके साथ ही वह कहते हैं कि ''इस स्थिति में सुधार और लेस्टर में शांति कायम करने के लिए दोनों पक्षों के बीच बातचीत और एक-दूसरे को स्वीकार करने की ज़रूरत है."

धर्मेश की तरह यास्मिन सुर्ती भी लेस्टर में बीते 40 साल से रह रही हैं.
वो कहती हैं कि ''यहां हिंदू, मुसलमान, सिख और काले लोगों के समुदाय बरसों से एक साथ मिल-जुलकर रहते आ रहे हैं. हमने एक साथ काम किया है. इस तरह की घटना यहां कभी नहीं हुई."
इसी इलाके में अपना बचपन बिताने वाले अहमद भी यास्मिन और धर्मेश से सहमत नज़र आते हैं.
वह कहते हैं, "यहां कुछ लोग हैं जो आरएसएस और हिंदुत्ववादी विचारधारा से जुड़े हैं. वे यहां लोगों को बांटना चाहते हैं. लेकिन ये समूह काफ़ी नया है और लेस्टर ने इससे पहले कभी ऐसी स्थितियां नहीं देखीं. कुछ नासमझ लोगों की वजह से हमारे सौहार्द को नुक़सान पहुंचा है और हिंदू समुदाय भी ऐसे लोगों से नाराज़ है."
उन्होंने ये भी बताया है कि 'प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोग तनाव में हैं और ऐसा नहीं होना चाहिए.''

शांति की अपील

लेस्टर स्थित मुस्लिम संस्थाओं के संघ से जुड़े सुलेमान नगदी ने बीबीसी को बताया, ''हमने सड़कों पर जो कुछ देखा है वो काफ़ी चेतावनी देने वाला है. भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच के बाद तनाव होता है, लेकिन इतना तनाव कभी नहीं देखा गया."
"हमें शांति की दरकार है, ये उपद्रव रुकने की ज़रूरत है और ऐसा तुरंत होना चाहिए. यहां कुछ असंतुष्ट युवा हैं जो बवाल मचा रहे हैं. हमें ये संदेश फैलाना चाहिए कि इस तनाव को ख़त्म करने के लिए लोग अपने बच्चों से बात करें और उन्हें समझाएं."
लेस्टर स्थित इस्कॉन मंदिर से जुड़े प्रद्युम्न प्रदीप गज्जर बताते हैं, "लेस्टर में जो कुछ हो रहा है वो काफ़ी दुखद और दिल तोड़ने वाला है. ये काफ़ी शर्मनाक भी है क्योंकि ब्रिटेन महारानी के निधन पर राष्ट्रीय शोक मना रहा है. ये देखना काफ़ी दुखद है कि 40-50 सालों में इन समुदायों ने जो नाम और इज्जत कमाई थी, वो ख़राब हो गई."

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भारतीय उच्चायोग ने दी प्रतिक्रिया

भारतीय उच्चायोग ने इन घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है, "हम लेस्टर के भारतीय समुदाय के ख़िलाफ़ हिंसा, हिंदू धर्म के परिसरों और प्रतीकों के साथ तोड़फोड़ की कड़ी निंदा करते हैं."
इस बयान में ये भी कहा गया है कि "हमने ये मसला ब्रितानी अधिकारियों के समक्ष उठाया है और हमलों में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ तुरंत कार्रवाई करने की मांग की है. हमने अधिकारियों से प्रभावित परिवारों को सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए भी कहा है."
इस घटना के बाद लेस्टर दक्षिण के सांसद जोनाथन ऐशवर्थ ने बीबीसी को बताया, "मैं ये बात स्पष्ट करना चाहता हूं कि लेस्टर में रहने वाले ज़्यादातर लोग पूरी तरह एकजुट हैं और मिल-जुलकर रहते हैं. यहां जो छिटपुट घटनाएं हुई हैं उनसे यहां के दो बड़े समुदाय प्रभावित हुए हैं, हम इससे हिल गए हैं.
लेस्टर में हमेशा से एकता रही है और हम अपनी एकता पर गर्व करते हैं. हां, ये बात सही है कि हमारे बीच मतभेद हैं, लेकिन हमारे बीच हमें एक दूसरे से अलग दिखाने वाली चीजों की तुलना में वो सब चीजें ज़्यादा हैं जो हमें एक जैसा दिखाती हैं, और मैं लेस्टर शहर के लोगों के बीच यही संदेश देना चाहता हूं."
इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि ''मुझे पता है कि लोग चिंतित हैं और मैं उन्हें आश्वस्त करना चाहता हूं कि मुझ जैसे संसद सदस्य स्तर के लोग समुदायों को एक-दूसरे के क़रीब लाने की कोशिशों में लगे हैं.'
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