श्रीलंका में आंदोलन के दौरान फैले तरह-तरह के दावों का सच जानिए

प्रदर्शनकारियों ने जब कोलंबो स्थित राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री कार्यालय में तोड़फोड़ की, उसके बाद दूसरी इमारतों पर क़ब्ज़े को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के भरमाने वाले दावे सामने आए.

इमेज स्रोत, EPA/CHAMILA KARUNARATHNE

    • Author, मेधावी अरोड़ा
    • पदनाम, बीबीसी डिसइन्फॉर्मेशन यूनिट

पिछले कई दशकों के सबसे ख़राब आर्थिक संकट के चलते श्रीलंका में पिछले हफ़्ते आंदोलनकारियों ने देश के आधिकारिक भवनों पर क़ब्ज़ा कर लिया. इस वाक़ये के बाद वहाँ चल रहा विरोध प्रदर्शन और तेज़ हो गया है.

हालांकि प्रदर्शनकारियों ने जब कोलंबो स्थित राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री कार्यालय में तोड़फोड़ की, उसके बाद दूसरी इमारतों पर क़ब्ज़े को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के भरमाने वाले दावे सामने आए.

हमने एक वायरल हुआ वीडियो देखा, जिसमें दावा किया गया था कि श्रीलंका के नेशनल ब्रॉडकास्टर पर क़ब्ज़ा कर लिया गया. वहीं एक अन्य वीडियो में केंद्रीय बैंक पर क़ब्ज़ा किए जाने का दावा किया गया था.

हालांकि सच यही था कि प्रदर्शनकारियों ने श्रीलंका के नेशनल ब्रॉडकास्टर को अपने 'क़ब्ज़े' में नहीं लिया था.

सच ये था कि इंटरव्यू के लिए मिले 15 मिनट के एयरटाइम के बाद सभी प्रदर्शनकारी रूपवाहिनी के परिसर से बाहर चले गए थे.
इमेज कैप्शन, सच ये था कि इंटरव्यू के लिए मिले 15 मिनट के एयरटाइम के बाद सभी प्रदर्शनकारी रूपवाहिनी के परिसर से बाहर चले गए थे.

तो सच क्या था?

बुधवार को दुनिया के प्रमुख मीडिया संस्थानों ने ग़लती से बता दिया कि प्रदर्शनकारियों ने श्रीलंका के नेशनल ब्रॉडकास्टर 'रूपवाहिनी' को अपने क़ब्ज़े में ले लिया है.

वहीं सोशल मीडिया पर डाले गए कई पोस्टों में ग़लत बताया गया कि प्रदर्शनकारियों ने नेशनल ब्रॉडकास्टर पर क़ब्ज़ा करके वहाँ पर एंकरिंग की.

आख़िर में रूपवाहिनी के परिसर में बुधवार को क्या हुआ, इसकी पड़ताल के लिए बीबीसी ने रूपवाहिनी के डायरेक्टरों से बातचीत की.

रूपवाहिनी के असिस्टेंट डायरेक्टर और विदेश समाचार सेवा के प्रमुख प्रसाद कौशल्या डोडांगोदगे ने बीबीसी को बताया कि बुधवार दोपहर को प्रदर्शनका​री अपनी मांगें लेकर संस्था के परिसर में बिन बुलाए पहुँचे थे. संस्था के डायरेक्टरों के साथ हुई चर्चा के बाद प्रदर्शनकारियों को इंटरव्यू का एक स्लॉट दिया गया.

इस इंटरव्यू के दौरान एक प्रदर्शनकारी ने एक भ्रामक दावा कर दिया. उस प्रदर्शनकारी ने सिंहली भाषा में कहा कि अब से रूपवाहिनी केवल 'जन अर्गलया' यानी सरकार के ख़िलाफ़ चल रहे 'जन आंदोलन' का ही प्रसारण करेगी.

लेकिन प्रसाद ने बीबीसी को बताया कि रूपवाहिनी इस बयान से सहमत नहीं है. इंटरव्यू के लिए मिले 15 मिनट के एयरटाइम के बाद सभी प्रदर्शनकारी रूपवाहिनी के परिसर से बाहर चले गए. साथ ही कुछ समय के लिए प्रसारण को रोक दिया गया. हालांकि बाद में नियमित कार्यक्रमों को फिर से बहाल करते हुए प्रसारण को सामान्य कर दिया गया.

इस बीच, देश दुनिया के विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्मों सहित सोशल मीडिया पर भी यह भ्रामक दावा छा गया कि प्रदर्शनकारियों ने श्रीलंका के नेशनल ब्रॉडकास्टर रूपवाहिनी को अपने क़ब्ज़े में ले लिया है.

वीडियो में दिख रहे प्रदर्शनकारी कोलंबो के जनाधिपति मावता रोड पर मौजूद फाटकों को तोड़ रहे थे. हालांकि इसमें प्रदर्शनकारियों को केंद्रीय बैंक में घुसते नहीं दिखाया गया था.
इमेज कैप्शन, वीडियो में दिख रहे प्रदर्शनकारी कोलंबो के जनाधिपति मावता रोड पर मौजूद फाटकों को तोड़ रहे थे. हालांकि इसमें प्रदर्शनकारियों को केंद्रीय बैंक में घुसते नहीं दिखाया गया था.

सेंट्रल बैंक पर भी नहीं हुआ क़ब्ज़ा

सोशल मीडिया पर एक और ग़लत दावा वायरल हुआ कि प्रदर्शनकारियों ने श्रीलंका के केंद्रीय बैंक को भी अपने क़ब्ज़े में ले लिया है.

सोशल नेटवर्किंग साइट 'ट्विटर' पर 15 लाख से अधिक बार देखे गए एक वायरल वीडियो में दावा किया गया कि प्रदर्शनकारियों ने श्रीलंका के केंद्रीय बैंक पर धावा बोल दिया है.

इस वीडियो को एक स्वतंत्र न्यूज़ एजेंसी से संबंधित होने का दावा करने वाले एक ट्विटर हैंडल से पोस्ट किया गया था.

इस वीडियो में प्रदर्शनकारियों की एक बड़ी भीड़ दिखाई दे रही है. इस वीडियो में मौजूद कई लोग काले कपड़े पहने हुए थे. कुछ के सिर पर हेलमेट भी थे और कई लोग हाथों में श्रीलंका के झंडे भी लिए हुए थे. यह भीड़ किसी इमारत के बड़े गेट को खोलकर उसके परिसर में दाख़िल हो रहे थे.

लेकिन सच यह नहीं था. असल में प्रदर्शनकारियों ने देश के केंद्रीय बैंक पर धावा नहीं बोला था.

बीबीसी ने इस वायरल वीडियो में दिख रही तस्वीरों की पड़ताल की. वीडियो में दिख रहे प्रदर्शनकारी कोलंबो के जनाधिपति मावता रोड पर मौजूद फाटकों को तोड़ रहे थे. हालांकि इस वीडियो में प्रदर्शनकारियों को केंद्रीय बैंक में घुसते नहीं दिखाया गया.

मालूम हो कि जनाधिपति मावता रोड पर ही श्रीलंका का केंद्रीय बैंक स्थित है. गूगल मैप्स के अनुसार, यह राष्ट्रपति भवन से महज़ 400 मीटर दूर स्थित है.

बीबीसी ने स्थानीय सूत्रों और श्रीलंका की एक फ़ैक्ट चेकिंग संस्था 'वॉचडॉग' से इस बारे में पड़ताल की. कोलंबों में मौक़े पर मौजूद उनके लोगों ने इस बात को पुष्ट किया कि किसी भी प्रदर्शनकारी ने केंद्रीय बैंक के परिसर में प्रवेश नहीं किया था.

सोशल मीडिया पर इन झूठे दावों को काफ़ी शेयर किया गया. बीबीसी ने ट्विटर की प्रतिक्रिया जानने के लिए उनसे संपर्क किया. बीबीसी ने पाया कि ट्विटर ने अपनी नीतियों के अनुरूप एक ट्वीट पर 'फॉल्स कॉन्टेक्स्ट' का लेबल लगाया हुआ था.

प्रदर्शनकारियों को तितर बितर करने के लिए आंसू गैस छोड़ती पुलिस

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इमेज कैप्शन, प्रदर्शनकारियों को तितर बितर करने के लिए आंसू गैस छोड़ती पुलिस

भारत को लेकर फैले तरह तरह के भ्रामक दावे

भारत सरकार ने बुधवार को उन रिपोर्टों का खंडन किया कि श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे और पूर्व वित्त मंत्री बासिल राजपक्षे को वहां से भागने में भारत ने मदद की थी.

मालूम हो कि श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे बुधवार को मालदीव भाग गए. उसके बाद अपनी पत्नी और निजी अंगरक्षकों के साथ वे गुरुवार को मालदीव छोड़कर सिंगापुर चले गए.

इस बारे में श्रीलंका में मौजूद भारतीय उच्चायोग ने एक बयान जारी कर इस दावे का खंडन किया कि राजपक्षे को भागने में मदद करने में भारत सरकार का कोई हाथ था. भारतीय उच्चायोग ने ऐसी रिपोर्टों को 'आधारहीन और अटकलबाज़ी' क़रार दिया.

ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब भारत सरकार ने श्रीलंका के नेताओं को भागने में मदद करने से इनकार करने को लेकर कोई बयान जारी किया हो.

इससे पहले मई में प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने जब इस्तीफ़ा दिया था, तब उसके एक दिन बाद भी ऐसा हुआ था. उस समय श्रीलंका में भारतीय उच्चायोग ने 'कुछ राजनीतिक लोग और उनके परिजनों' के भारत भाग जाने की रिपोर्टों का खंडन किया था.

रविवार को भारत सरकार ने एक और रिपोर्ट का खंडन किया, जिसमें बताया गया था कि भारत सरकार ने श्रीलंका में सेना भेजी है. ऐसा ही बयान भारत सरकार ने मई में भी जारी किया था.

भारत ने श्रीलंका को आंदोलनकारियों पर पानी छोड़ने वाली गाड़ियों की आपूर्ति करने को लेकर फैली अफवाहों को भी खंडन किया था.

(जोश चीतम और मरियम अज़वर के अतिरिक्त इनपुट के साथ.)

वीडियो कैप्शन, श्रीलंका की हैरान-परेशान करने वाली तस्वीरें सारी दुनिया देख रही है.

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