श्रीलंका में सियासी संकट, 13 जुलाई को क्या-क्या हुआ?

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  • श्रीलंका में थम नहीं रहा प्रदर्शनों का सिलसिला, आंदोलनकारी पीएम आवास में घुसे
  • प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे और पीएम रनिल विक्रमसिंघे से इस्तीफ़ा मांग रहे हैं
  • रनिल विक्रमसिंघे को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया है, उन्होंने आपातकाल की घोषणा की है
  • गोटाबाया राजपक्षे मालदीव भाग गए हैं, उन्होंने 13 जुलाई को इस्तीफा देने को कहा था लेकिन नहीं दिया
  • प्रदर्शनकारियों ने कहा है जब तक राजपक्षे और विक्रमसिंघे नहीं हटते वे पीछे नहीं हटेंगे
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श्रीलंका में राजनीतिक उथलपुथल जारी है. राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के इस्तीफ़े की मांग करते हुए राष्ट्रपति भवन में घुसे प्रदर्शनकारियों ने वहां कब्जा कर रखा है. लेकिन 13 जुलाई को इस्तीफ़ा देने का ऐलान कर चुके राष्ट्रपति ने 12 जुलाई को रात को ही देश छोड़ दिया. अभी तक उनका इस्तीफ़ा नहीं आया है.

प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे से भी तुरंत इस्तीफ़ा देने के मांग कर रहे हैं.

लेकिन स्पीकर के मुताबिक उन्हें श्रीलंका के संविधान के प्रावधानों के तहत कार्यवाहक राष्ट्रपति बना दिया गया है.

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के इस्तीफ़े की मांग को लेकर पिछले तीन दिन से जारी प्रदर्शन ने आज उस समय नया मोड़ ले लिया जब प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे के दफ्तर में घुस गए.

इससे पहले उन्होंने राष्ट्रीय टीवी चैनल के स्टूडियो पर कब्ज़ा कर चैनल को ऑफ एयर कर दिया. थोड़ी देर के बाद उन्होंने दूसरे राष्ट्रीय टीवी स्टेशन को ऑफ एयर कर दिया.

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रनिल विक्रमसिंघे ने इमरजेंसी लगाई

रनिल विक्रमसिंघे के कार्यवाहक राष्ट्रपति बनने के बाद श्रीलंका में आपातकाल की घोषणा कर दी गई है. इसके साथ ही पश्चिमी प्रांत में कर्फ्यू लगा दिया गया है. ये जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय के एक प्रवक्ता ने दी है.

इससे पहले रनिल विक्रमसिंघे के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी पीएम दफ्तर में घुस गए. पीएम दफ्तर में घुसे उत्साहित प्रदर्शनकारी नारेबाज़ी कर रहे थे, सेल्फी ले रहे थे और रनिल विक्रमसिंघे और राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षा के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी कर रहे थे.

प्रदर्शनकारियों के समूह चिल्लाते हुए और ढोल बजाते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय में दाख़िल हो रहे थे.रनिल विक्रमसिंघे ने पहले इस्तीफा देने का वादा किया था. लेकिन अब तक उन्होंने पीएम पद से इस्तीफा नहीं दिया है. इससे नाराज होकर प्रदर्शनकारी पीएम दफ्तर में घुस आए थे.

अब कार्यवाहक राष्ट्रपति बनने के बाद विक्रमसिंघे ने टीवी पर जारी एक बयान में सेना और पुलिस को श्रीलंका की स्थिति संभालने के निर्देश दिए हैं.

हालांकि आपातकाल के बावजूद हज़ारों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय में घुसने की कोशिश की. प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षा बलों को आंसू गैस के गोले चलाने पड़े.

पीएम कार्यालय के बाहर मौजूद बीबीसी संवाददाता टेसा वॉन्ग के मुताबिक़ वहां पूरी तरह अफ़रा-तफ़री का माहौल था. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि पीएम रनिल विक्रमसिंघे अपने पद से इस्तीफ़ा दें.

प्रदर्शनकारी ये कह रहे हैं कि अगर शाम तक राष्ट्रपति गोटाबाया और पीएम विक्रमसिंघे का इस्तीफ़ा नहीं हुआ तो वे संसद समेत सभी सरकारी इमारतों पर कब्जा कर लेंगे.

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इमेज कैप्शन, कार्यवाहक राष्ट्रपति रनिल विक्रमसिंघे

श्रीलंका छोड़ चुके राष्ट्रपति राजपक्षे का अब तक इस्तीफा नहीं

सुबह, श्रीलंका की संसद के स्पीकर ने घोषणा की थी कि राष्ट्रपति बुधवार की शाम तक इस्तीफ़ा भेजने की व्यवस्था कर रहे हैं. लेकिन बुधवार देर शाम तक उन्होंने इस्तीफ़ा नहीं भेजा था.

स्पीकर ने कहा था गोटबाया राजपक्षे ने उन्हें फ़ोन कर कहा था कि वह बुधवार की शाम तक अपना अधिकारिक इस्तीफ़ा भेज देंगे.

राजपक्षे श्रीलंका छोड़कर मालदीव चले गए हैं. राष्ट्रपति राजपक्षे के इस्तीफ़े के बाद श्रीलंका में अंतरिम राष्ट्रपति एक महीने के लिए कार्यभार संभाल सकेंगे और नए चुनावों के लिए रास्ता साफ़ हो सकेगा. कार्यवाहक राष्ट्रपति विक्रमसिंघे आगे हालात कैसे संभालते हैं ये देखने वाली बात होगी.

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अमेरिकी दूतावास ने काम बंद किया

इस बीच, कार्यवाहक राष्ट्रपति रनिल विक्रमसिंघे ने कहा है कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, ट्राइ-फोर्सेज कमांडरों और इंस्पेक्टर जनरल पुलिस (आईजीपी) की एक समिति बनाई गई है जिसकी ज़िम्मेदारी श्रीलंका में सुरक्षा बहाल करने और हालात सुधारने की है.

उन्होंने कहा कि सेना और पुलिस को श्रीलंका के मौजूदा हालात को नियंत्रित करने की ज़िम्मेदारी दी गई है. रनिल विक्रमसिंघे ने एक विशेष वीडियो बयान में कहा है कि इस समिति को सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और व्यवस्था बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं.

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विक्रमसिंघे ने प्रदर्शनकारियों पर फासीवाद फैलाने के आरोप लगाते हुए कहा है कि देश में आपातकाल और कर्फ्यू लाग किया जाएगा ताकि फासीवाद को रोका जा सके और व्यवस्था बहाल की जा सके.

इधर, श्रीलंका की राजधानी कोलंबो स्थित अमेरिकी दूतावास ने बुधवार दोपहर से सभी सेवाओं को रद्द कर दिया है. अमेरिकी दूतावास ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है.

दूतावास ने लिखा है कि गुरुवार को भी सभी कॉन्सुलर सेवाओं को रद्द कर दिया गया है. दूतावास ने कहा असुविधा के लिए माफ़ी मांगी है और कहा है कि सभी अप्वाइंट्स के लिए नया समय दिया जाएगा.

वीडियो कैप्शन, श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया ने देश छोड़ा, सड़कों पर हंगामा

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