कनाडा बसना चाहते हैं अफ़ग़ान दुभाषिए, मगर क्या तालिबान जाने देंगे?

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- Author, बर्न्ड डेबसमैन जूनियर
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, वाशिंगटन
अफ़ग़ानिस्तान के सैफ़ुल्ला मोहम्मद ज़ाहिद 2011 के अंत में कंधार प्रांत में कनाडा के सैनिकों के लिए दुभाषिया का काम रहे थे. उस समय उन्हें तालिबान का भेजा एक ख़त मिला.
वो याद करते हैं, "उन्होंने लिखा था कि वे जानते हैं कि मैं 'काफ़िरों' के लिए काम कर रहा हूं. उन्होंने मुझे वो काम छोड़ने को कहा. उन्होंने कहा कि यदि मैंने ऐसा नहीं किया तो वे मुझे और मेरे परिवार को मार डालेंगे."
तालिबान का जन्मस्थान कहे जाने वाले कंधार प्रांत में कनाडा और नेटो के सुरक्षा बलों के साथ छह साल बाद ज़ाहिद को कनाडा जाना पड़ा, क्योंकि तालिबान की धमकी बेकार की नहीं थी.
कनाडा के कैलगरी के अपने घर से ज़ाहिद ने बीबीसी को बताया, "तालिबान ने मेरे पिता की गोली मारकर हत्या कर दी थी. तब से, मेरा परिवार अफ़ग़ानिस्तान के एक प्रांत से दूसरे प्रांत में घूम रहा है. हम सभी लंबे समय से तालिबान के निशाने पर हैं."
सैफ़ुल्ला मोहम्मद ज़ाहिद उन सैकड़ों अफ़गानों में शामिल हैं, जो कनाडा की सेना के लिए दुभाषिए और अन्य काम कर चुके हैं. उन लोगों में से कई अपने परिवारों को अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकाले जाने की उम्मीद में अभी भी हैं. अपने देश में उन्हें तालिबान के बदला लेने का ख़तरा है.
2021 के अगस्त में काबुल पर तालिबान के क़ब्ज़े के बाद कनाडा सरकार ने अपने यहां 40 हज़ार अफ़ग़ानों को शरण देने का वादा किया था. लेकिन 21 अप्रैल, 2022 तक कनाडा में केवल 11,300 अफ़ग़ान ही पहुंच पाए हैं.
अपना वादा पूरा करने के लिए कनाडा सरकार ने अपने देश में पहले से मौजूद अफ़ग़ान दुभाषियों के परिजनों के लिए कनाडा में स्थायी तौर पर बसने के रास्ते की घोषणा की.
लेकिन उस योजना के आलोचकों ने कनाडा सरकार पर अनुचित और बेवजह की बाधाएं खड़ी करने का आरोप लगाया है. उन बाधाओं में दस्तावेज़ों और बायोमेट्रिक्स की शर्त शामिल है, जिसके चलते परिजनों के निकलने में बहुत देर हो रही है.
कनाडा में बसे कई अफ़ग़ान दुभाषियों ने कनाडा आने के लिए ज़रूरी उन दर्जनों दस्तावेज़ों के बारे में बताया. उनका कहना है कि तालिबान के शासन में सुरक्षित रहते हुए उन दस्तावेज़ों को जुटाना कुछ लोगों के लिए ही संभव है.
ज़ाहिर है उन शर्तों के चलते अफ़ग़ान दुभाषिओं के परिजनों के लिए कनाडा जाना आसान नहीं है. अभी तक तो इस योजना के तहत एक भी अफ़ग़ान कनाडा नहीं जा पाए हैं.
कनाडा के विपक्षी न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी की जेनी क्वान सरकार की इस नीति की कड़े आलोचक हैं. वे अभी कम से कम 300 अफ़ग़ान परिवारों और क़रीब 5,000 लोगों के मामलों की पैरवी कर रही हैं.
उन्होंने बताया कि मुख्य समस्या ये है कि फ़िलहाल अफ़ग़ानिस्तान का कोई भी इंसान किसी तीसरे देश की यात्रा नहीं कर सकता, यदि उनसे बायोमेट्रिक पहचान और ज़रूरी कागज़ी कार्रवाई करने को कहा जाए.
उन्होंने कहा, "इसके लिए उन्हें तालिबान द्वारा चलाए जा रहे कार्यालय में जाकर पासपोर्ट मांगना होगा. आप सोच सकते हैं कि तब ज़रूर ख़तरे की घंटी बजेगी, जब किसी का पूरा परिवार ये कहे कि कनाडा जाने के लिए उन्हें पासपोर्ट चाहिए."

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ज़ाहिद कहते हैं कि उनके परिजन जब तक अफ़ग़ानिस्तान में हैं, तब तक हर रोज़ उनकी जान जोख़िम में है.
उनके दो भाइयों में से एक तुर्की जा चुके हैं, जबकि दूसरे भाई अफ़ग़ानिस्तान में हैं लेकिन लापता हैं. अब उनकी दशा के बारे में किसी को कुछ नहीं मालूम.
उन्होंने बताया, "तालिबान घरों की तलाशी ले रहे हैं. मेरे दो अन्य सहयोगी कनाडा में रहते हैं. उनमें से एक ने अपने 11 परिजनों को खो दिया है. वहीं दूसरे सहयोगी की बहन को स्कूल में मार दिया गया."
ओटावा में रह रहे एक अन्य पूर्व दुभाषिए ग़ुलाम फ़ैज़ी ने बीबीसी को बताया कि उनके परिवार के 18 सदस्य अभी अफ़ग़ानिस्तान में ही हैं और वे कहीं छिपे हुए हैं.
परिवार के तीन अन्य सदस्य पाकिस्तान पहुंच गए हैं, जहां वे कनाडा जाने की अनुमति हासिल करने के लिए बेकार में इंतज़ार कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, "उन्हें वहाँ गए तीन महीने हो गए हैं. अब पाकिस्तान का उनका वीज़ा भी ख़त्म हो गया है. कुछ को तो कनाडा के अधिकारियों से कभी कोई जवाब ही नहीं मिला.
पश्चिमी देशों के लिए दुभाषिए या कोई और काम कर चुके अफ़गान तब बहुत निराश हो जाते हैं, जब वे यूक्रेन से भागने वालों के साथ पश्चिमी देशों का ख़ास व्यवहार देखते हैं.
यूक्रेन के लिए कनाडा के इमिग्रेशन मंत्री सीन फ्रेज़र ने एलान किया कि सीनियर सिटीज़न और 18 साल से छोटे लोगों को वीज़ा और बायोमेट्रिक्स की अधिकांश ज़रूरतों से छूट दी जाएगी.
इसका नतीज़ा ये हुआ कि मार्च तक यूक्रेन के 60 हज़ार से अधिक लोगों ने नई योजना के ज़रिए कनाडा जाने का आवेदन दिया है.
मालूम हो कि कनाडा का नियम है कि इमरजेंसी यात्रा कार्यक्रम के तहत आने वाले लोग वहां तीन साल तक रह सकते हैं.

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ज़ाहिद के अनुसार, "यूक्रेन की स्थिति को अफ़ग़ानों से बेहतर कोई नहीं समझता. हम पर भी रूस ने हमला किया था. सरकार उनके लिए जो कर रही है हम उसकी सराहना करते हैं, लेकिन उन्हें हमें भी नहीं भूलना चाहिए."
जेन क्वान की मांग है कि सरकार कुछ वक़्त के लिए अधिकांश ज़रूरी दस्तावेज़ों से अफ़ग़ानों को छूट दे दे और किसी तीसरे देश जाने के लिए उन्हें यात्रा दस्तावेज़ जारी करे.
उनका कहना है कि उसके सहारे योग्य अफ़ग़ान लोग वहां से निकल कर किसी तीसरे देश और फिर वहां से कनाडा जा सकते हैं.
यूक्रेन के नागरिकों को कनाडा लाने के लिए सरकार ने कहा कि जिनके पास पासपोर्ट नहीं है या जिनके पासपोर्ट एक्सपायर हो चुके हैं, उनके लिए वो सिंगल परमिट यात्रा दस्तावेज़ जारी कर सकता है.
क्वान कहती हैं कि सरकार को यूक्रेन के नागरिकों की तरह ही अफ़ग़ान लोगों के लिए भी उसी तरह के यात्रा दस्तावेज़ जारी करना चाहिए.
कनाडासरकार का पक्ष
बीबीसी ने इस बारे में इमिग्रेशन और नागरिकता मामलों के सरकारी प्रवक्ता एडन स्ट्रिकलैंड से कई सवाल पूछे.
इसके जवाब में उन्होंने बताया कि कड़वा सच तो ये है कि अफ़ग़ानिस्तान में पुनर्वास प्रयासों में हमारे सामने जो बाधाएं आईं, वो कभी और देखने को नहीं मिली थीं.
उन्होंने बताया कि कनाडा की चुनौती ये भी है कि अब अफ़ग़ानिस्तान में उसकी कोई उपस्थिति नहीं है. उनके अनुसार, कनाडा के क़ानून के तहत तालिबान को चरमपंथी संगठन का दर्जा मिला हुआ है, जिसके चलते कोई भी राजनयिक प्रयास किया जाना असंभव हैं.
हालांकि सरकारी प्रवक्ता ने माना कि अफ़ग़ानिस्तान से बाहर जाना वास्तव में बहुत ख़तरनाक है. उन्होंने स्वीकार किया कि उनकी योजना के लायक 'कई कमज़ोर और ख़तरे से जूझ रहे अफ़ग़ान' अभी भी वहां हैं.
उन्होंने दावा किया कि कनाडा सरकार उन्हें दोबारा बसाने के लिए तेज़ी से प्रयास कर रही है. उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि पाकिस्तान में अफ़ग़ान शरणार्थियों का जाना पाकिस्तान सरकार पर निर्भर करता है.
उन्होंने कहा, "हालात के लिहाज़ से हर क़दम पर अलग तरह की चुनौती है, लेकिन कनाडा की सरकार इसके लिए मज़बूती से प्रयास कर रही है.''
कनाडा सरकार का यह कथन हालांकि फैज़ी जैसे कई दुभाषियों को थोड़ी राहत दे सकते हैं.
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