अफ़ग़ानिस्तान: तालिबान को कैसे और कितने विदेशी आधुनिक हथियार मिले?

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    • Author, विकास पांडे और शादाब नज़्मी
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़, दिल्ली

हाल ही में सोशल मीडिया पर पोस्ट हुए एक वीडियो में तालिबान के लड़ाके कंधार एयरपोर्ट पर अमेरिका के ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर को निहार रहे थे.

चार-ब्लेड वाला यह बहुउद्देश्यीय हेलिकॉप्टर रनवे पर धीरे-धीरे घूम रहा था. इस वीडियो ने दुनिया को एक संदेश दिया. तालिबान अब वैसा ग्रुप नहीं रहा, जो पुराने पिकअप ट्रकों पर कलाशनिकोव असॉल्ट राइफ़ल्स लिए घूमते थे.

15 अगस्त को काबुल पर नियंत्रण के बाद दूसरी जगहों पर तालिबानी लड़ाकों को अमेरिकी हथियारों और वाहनों के साथ देखा गया.

सोशल मीडिया पोस्ट में देखा गया कि तालिबान के कुछ लड़ाके पूरी तरह लड़ाकू पोशाक में थे और उस रूप में उन्हें दुनिया के किसी भी विशेष बलों से अलग नहीं पाया जा सकता था.

उनकी पहचान बन चुकी लंबी दाढ़ी नहीं थी और न ही वे पारंपरिक सलवार-कमीज पहने हुए थे. निश्चित तौर पर उनके पास जंग लगे हथियार भी नहीं थे. वे सैनिकों के अनुकूल पोशाक में थे.

अफ़ग़ान नेशनल डिफ़ेंस एंड सिक्योरिटी फोर्सेज़ (एंड्स) के सैनिकों के एक के बाद एक सभी शहर छोड़ देने के बाद उन्होंने उनके हथियारों को ज़ब्त कर लिया.

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने कहा कि इससे तालिबान अब वायुसेना संपन्न दुनिया का अकेला चरमपंथी समूह बन गया है.

तालिबान के लड़ाके

तालिबान के पास कितने विमान?

अमेरिका के अफ़ग़ानिस्तान पुनर्निर्माण के विशेष महानिरीक्षक (सिगार) की एक रिपोर्ट के अनुसार, जून के अंत में अफ़ग़ान वायुसेना के पास लड़ाकू हेलिकॉप्टर और विमान मिलाकर कुल 167 एयरक्रॉफ़्ट थे.

लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि तालिबान ने उन 167 में से कितनों को अपने नियंत्रण में ले लिया है. प्लैनेट लैब्स की ओर से बीबीसी को मिली कंधार हवाईअड्डे की सैटेलाइट इमेज़ में कई अफ़ग़ान सैनिक रनवे पर खड़े दिख रहे हैं.

दिल्ली के ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के सैन्य उड्डयन विशेषज्ञ अंगद सिंह ने बताया कि कंधार पर तालिबान के क़ब्ज़ा कर लेने के छह दिन बाद की एक तस्वीर में पाँच विमान दिख रहे हैं. इनमें कम से कम दो एमआई-17 हेलिकॉप्टर, दो ब्लैक हॉक्स (यूएच-60) और तीसरा हेलिकॉप्टर (यूएच-60 भी हो सकता है) दिखा.

इसके विपरीत, 16 जुलाई को ली गई एक अन्य सैटेलाइट इमेज़ में 16 एयरक्राफ़्ट देखे जा सकते हैं. इनमें 9 ब्लैक हॉक्स और दो एमआई-17 हेलिकॉप्टर और पाँच फ़िक्स्ड विंग विमान शामिल हैं.

इसका मतलब है कि इनमें से कुछ विमानों को या तो देश से बाहर या दूसरे एयरबेस पर ले जाया गया.

तालिबान के हथियार

तालिबान ने हेरात, ख़ोस्त, कुंदूज़ और मज़ार-ए-शरीफ़ समेत बाक़ी के नौ अफ़ग़ान एयरबेस पर भी क़ब्ज़ा कर लिया है. हालाँकि यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है कि उन्होंने वहाँ से कितने एयरक्राफ्ट ज़ब्त किए. ऐसा इसलिए कि इन एयरपोर्ट के सैटेलाइट इमेज़ उपलब्ध नहीं हो पाए.

तालिबान लड़ाके और अफ़ग़ानिस्तान की मीडिया इन हवाई अड्डों से ज़ब्त किए गए विमानों और मानवरहित ड्रोनों की तस्वीरों को पोस्ट करते रहे हैं. कुछ स्वतंत्र वेबसाइटों ने भी कुछ एयरक्राफ्ट को वहाँ देखा है.

लेकिन एक राय यह भी है कि तालिबान के हाथों में पड़ने से पहले कई विमानों को अफ़ग़ानिस्तान के बाहर ले जाया गया.

अपना नाम गोपनीय रखने की शर्त पर दिल्ली के एक विमानन विशेषज्ञ ने बताया कि उज़्बेकिस्तान के टर्मेज़ हवाई अड्डे की 16 अगस्त को ली गई सैटेलाइट इमेज़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि वहाँ उस वक़्त दो दर्जन से अधिक हेलिकॉप्टर मौजूद थे. इनमें एमआई-17, एमआई-25, ब्लैक हॉक्स और कई ए-29 लाइट अटैक और सी-208 एयरक्राफ्ट थे.

सिक्योरिटी थिंक-टैंक 'सीएसआईएस' के जानकारों की राय है कि ये विमान और हेलिकॉप्टर अफ़ग़ान वायुसेना के हो सकते हैं.

तालिबान के लड़ाके

तालिबान को और कौन से हथियार विरासत में मिले?

जहाँ तक तालिबान की वायु शक्ति का सवाल है, विशेषज्ञ इस पर सहमत हैं कि उनके पास अत्याधुनिक बंदूकों, राइफ़लों और गाड़ियों को संभालने का अनुभव है. अफ़ग़ानिस्तान में ऐसे बहुत से लोग हैं.

अमेरिकी सरकार की एकाउंटे​बिलिटी रिपोर्ट के अनुसार, 2003 से 2016 के बीच, अमेरिका ने अफ़ग़ान बलों को भारी मात्रा में सैन्य उपकरण दिए. विभिन्न प्रकार की 3,58,530 राइफ़ल्स, 64,000 से अधिक मशीनगन, 25,327 ग्रेनेड लॉन्चर और 22,174 हमवी (हर तरह की सतहों पर चलने वाली गाड़ी).

2014 में नेटो सैनिकों की युद्ध वाली भूमिका ख़त्म होने के बाद, अफ़ग़ान सेना को देश को सुरक्षित करने का काम सौंपा गया था. लेकिन उसे तालिबान का मुक़ाबला करने में परेशानी हो रही थी. उसके बाद अमेरिका ने उसे और उपकरण देकर उसका पुराना हुलिया बदल दिया.

उसने केवल, 2017 में अफ़ग़ान सेना को क़रीब 20,000 एम16 राइफ़ल दिए. सिगार के अनुसार, अमेरिका ने 2017 और 2021 के बीच अफ़ग़ान सुरक्षा बलों को कम से कम 3,598 एम4 राइफ़ल और 3,012 हमवी दिए.

अफ़ग़ान सेना के पास मोबाइल स्ट्राइक फ़ोर्स की गाड़ियाँ भी थीं, जिनका उपयोग तत्काल तैनाती की ज़रूरत पड़ने पर किया जाता था. 4x4 के इन वर्कहॉर्सेज़ का उपयोग लोगों या उपकरणों को ले जाने के लिए किया जा सकता है.

तालिबान के लड़ाके

नए मिले हथियारों का तालिबान क्या करेंगे?

यह सामान पर निर्भर करता है.

सीएनए कंसल्टिंग ग्रुप के निदेशक और अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी बलों के पूर्व सलाहकार डॉ. जोनाथन श्रोडेन कहते हैं, ''तालिबान के लिए एयरक्राफ्ट पकड़ना भले आसान हो, लेकिन उन्हें चलाना और उसका रखरखाव करना बहुत कठिन होगा. इसके पुर्जों को अक्सर सर्विस करने और कभी-कभी बदलने की आवश्यकता होती है. किसी वायुसेना की ताक़त उसके हर एयरक्राफ्ट की उड़ान क्षमता बरक़रार रखने के लिए काम करने वाले तकनीशियनों की टीम पर निर्भर करती है.''

अधिकांश विमान निजी अमेरिकी ठेकेदारों ने बनाए थे. उन्होंने अगस्त में तालिबान के हमले से पहले ही अफ़ग़ानिस्तान छोड़ना शुरू कर दिया था.

जॉर्ज टाउन विश्वविद्यालय में वैश्विक राजनीति और सुरक्षा की प्रोफ़ेसर और अफ़ग़ानिस्तान में काम कर चुकीं अमेरिकी वायु सेना की रिटायर्ड अधिकारी जोडी विटोरी इस पर सहमत हैं कि तालिबान के पास इन एयरक्राफ्ट को संभालने के लिए कुशलता की कमी है.

वे कहती हैं, "तालिबान की ओर से इन विमानों के उपयोग का तत्काल कोई ख़तरा नहीं है." वे यह भी कहती हैं कि अफ़ग़ान बलों के आत्मसमर्पण के पहले इन एयरक्राफ्ट को आंशिक तौर पर नष्ट किया जा सकता था.

तालिबान के हथियार

रैंड कॉरपोरेशन के एक शोधकर्ता और अमेरिकी रक्षा मंत्री के कार्यालय में अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व निदेशक जेसन कैंपबेल कहते हैं, ''हालाँकि, तालिबान पूर्व अफ़ग़ान पायलटों को इन एयरक्राफ्ट को उड़ाने के लिए मजबूर करने की कोशिश करेगा. तालिबान उन्हें और उनके परिजनों को धमकी देंगे. इसलिए, वे कुछ एयरक्राफ्ट उड़ाने में सक्षम हो सकते हैं. हालाँकि उनकी दीर्घकालिक संभावनाएँ धूमिल दिखती हैं."

यह भी कहा जाता है कि तालिबान के रूस निर्मित एमआई-17 को चलाने में सक्षम होने की संभावना है, क्योंकि ये एयरक्राफ्ट दशकों से अफ़ग़ानिस्तान में हैं. वहीं वे रखरखाव और प्रशिक्षण के लिए अपने समर्थक देशों का सहारा ले सकते हैं.

हासिल हुए अन्य हथियारों को संभालने में तालिबान को आसानी होगी. यहाँ तक ​​​​कि तालिबान के पैदल सैनिक भी ज़मीनी उपकरणों का उपयोग करने में सहज महसूस करते हैं. इतने सालों में, क़ब्ज़ा किए गए चेकप्वाइंट और सेना के भगोड़ों ने उन्हें इन हथियारों से परिचित करा दिया है.

तालिबान के लड़ाके

वॉशिंगटन में विल्सन सेंटर के उप-निदेशक माइकल कुगेलमैन कहते हैं कि तालिबान तक इन आधुनिक हथियारों की पहुँच एक "बड़ी विफलता" है.

इसका बुरा प्रभाव केवल अफ़ग़ानिस्तान तक सीमित नहीं होगा. ऐसी आशंका है कि छोटे हथियार काले बाज़ार में दिखाई पड़ सकते हैं और दुनिया भर में दूसरे विद्रोहों को बढ़ावा दे सकते हैं.

विटोरी कहती हैं कि अभी तत्काल ख़तरा नहीं है, लेकिन अगले कुछ महीनों में इसका एक सप्लाई चेन दिख सकता है. इसे रोकने की जिम्मेदारी पाकिस्तान, चीन और रूस जैसे पड़ोसी देशों पर है.

हालाँकि कैंपबेल का कहना है कि तालिबान अपना ज़िम्मेदार चेहरा पेश करने का इच्छुक है. हालाँकि उनके लिए दुनिया के समान विचार वाले संगठनों का समर्थन न करना बहुत कठिन होगा.

तालिबान की आपसी एकता, एक महत्वपूर्ण कारक है जो इन हथियारों का उपयोग तय करेगा.

जोडी विटोरी कहती हैं कि ऐसी संभावना है कि तालिबान से टूटकर अलग होने वाले समूह अपने साथ हथियार भी लेकर जा सकते हैं. ऐसे में, बहुत कुछ इस पर निर्भर करेगा कि अफ़ग़ानिस्तान पर क़ब्ज़ा करने का शुरुआती उत्साह शांत होने पर तालिबान का नेतृत्व किस प्रकार अपने समूह को एकजुट रख पाएगा.

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(साथ में, डेविड ब्राउन की रिपोर्टिंग)

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