तालिबान ने भारत की ओर बढ़ाया 'दोस्ती का हाथ', कहा- अच्छे रिश्ते चाहते हैं

शेर मोहम्मद अब्बास स्तानिकज़ई ने

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तालिबान के प्रमुख नेता शेर मोहम्मद अब्बास स्टानिकज़ई ने कहा है कि तालिबान भारत के साथ 'दोस्तान संबंध' बनाने का इच्छुक है. स्टानिकज़ई क़तर के दोहा में अमेरिका और तालिबान के बीच हुई बातचीत का अहम हिस्सा रहे हैं.

उन्होंने यह बात न्यूज़ चैनल सीएनएन-न्यूज़ 18 को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कही.

ऐसी अटकलें हैं कि मोहम्मद अब्बास स्टानिकज़ई को तालिबान अपना विदेश मंत्री बना सकता है.

दोहा से दिए इस इंटरव्यू में अब्बास ने कहा कि तालिबान भारत समेत सभी पड़ोसी देशों से अच्छे संबंध चाहता है.

भारत के प्रति तालिबान प्रशासन के विचार पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "हमारी विदेश नीति पूरी दुनिया और सभी पड़ोसी देशों से अच्छे संबंध विकसित करने की है. अमेरिकी सेना अफ़गानिस्तान में कम से कम 20 साल तक रही. इसके बाद भी अमेरिका और नेटो देशों से हमारे अच्छे संबंध होंगे. इसलिए मुझे लगता है कि उन्हें अफ़गानिस्तान के पुनर्निर्माण में भी हिस्सा लेना चाहिए."

स्टानिकज़ई ने कहा, "यही बात भारत पर भी लागू होती है. हम सभी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते जारी रखना चाहते हैं. सिर्फ़ भारत ही नहीं, बल्कि हमारे सभी पड़ोसी देशों- तजाकिस्तान, ईरान और पाकिस्तान के साथ हम अच्छे रिश्ते चाहते हैं."

अफ़गान महिला

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'भारत को कोई ख़तरा नहीं होगा'

स्टानिकज़ई ने उन अटकलों को 'ग़लत' करार दिया, जिनमें आशंका जताई जा रही है कि तालिबान भारत के ख़िलाफ़ सख़्त रवैया अख़्तियार कर सकता है और पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत को निशाना बना सकता है.

उन्होंने कहा, "मीडिया में जो बातें चलती हैं, वो अक्सर ग़लत ही होती हैं. हमारी तरफ़ से न तो कोई ऐसा बयान आया है और न ही संकेत."

विशेषज्ञ लगातार ऐसी आशंका ज़ाहिर कर रहे हैं कि तालिबान के क़ब्ज़े में आने के बाद अफ़गानिस्तान लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे समूहों के 'आतंकवादियों का पनाहगार' बन जाएगा, जिनसे भारत को भी ख़तरा है.

इस आशंका के बारे में पूछे जाने पर मोहम्मद अब्बास स्टानिकज़ई ने कहा कि अफ़गानिस्तान से भारत समेत किसी भी पड़ोसी देश को न तो अतीत में कोई ख़तरा था और न भविष्य में होगा.

उन्होंने कहा, "इसमें कोई शक़ नहीं है कि भारत और पाकिस्तान के बीच पुराना और लंबा राजनीतिक-भौगोलिक विवाद है, लेकिन हमें उम्मीद है कि वो अपने आंतरिक झगड़े के लिए अफ़गानिस्तान का इस्तेमाल नहीं करेंगे. वो लंबी सीमा साझा करते हैं और वो वहीं आपस में लड़ सकते हैं. हम किसी और को लड़ाई के लिए अफ़गानिस्तान का इस्तेमाल नहीं करने देंगे."

अफ़गान सिख

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'हिंदुओं और सिखों का अपना देश है अफ़गानिस्तान'

अफ़गानिस्तान में फँसे हिंदू और सिख लोगों को सुरक्षित वापस भेजे जाने के सवाल पर अब्बास ने कहा कि अफ़गानिस्तान सबका देश है.

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि उन्हें 'बचाए जाने' की कोई ज़रूरत नहीं है. अफ़ग़ानिस्तान उनका भी घर और देश हैं. वो यहाँ शांतिपूर्वक रह सकते हैं, उनकी ज़िंदगी को यहाँ कोई ख़तरा नहीं है. वो यहाँ वैसे ही रह सकते हैं, जैसे पहले रहते थे. हमें उम्मीद है कि पिछले 20 वर्षों में अफ़ग़ानिस्तान से भारत गए हिंदू और सिख दोबारा यहाँ वापस आएँगे."

शेर मोहम्मद अब्बास स्टानिकज़ई ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में भारतीय निवेश तालिबान के लिए महत्वपूर्ण है.

उन्होंने कहा, "भारत ने अफ़गानिस्तान में विकास के जो काम किए है वो हमारी राष्ट्रीय संपत्ति है. हम उन्हें वैसे ही रखेंगे और हमें उम्मीद है जो काम अधूरे रह गए हैं भारत उन्हें भविष्य में पूरा करेगा. हम भारत को अधूरी पड़ी परियोजनाओं को पूरा करने और दोबारा काम शुरू करने के लिए आमंत्रित करते हैं."

अब्बास ने कहा कि अफ़गानिस्तान में काम करने वाले भारतीयों को सुरक्षा देना 'तालिबान का कर्तव्य' है.

भारतीयों को सुरक्षा देने के सवाल पर उन्होंने कहा, "अगर कोई आपके देश में आकर आपके लिए काम कर रहा है तो उसे सुरक्षा देना आपकी ज़िम्मेदारी है. मुझे नहीं लगता कि ऐसे सवाल पूछने की कोई ज़रूरत भी है."

शेर मोहम्मद अब्बास

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अब्बास ने भारतीय सैन्य अकादमी से ली है ट्रेनिंग

शेर मोहम्मद अब्बास स्टानिकज़ई के बारे में एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि उन्होंने देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) से प्रशिक्षण लिया है.

इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि फ़िलहाल इस समय वो भारत में आईएमए के किसी शख़्स से संपर्क में नहीं है, क्योंकि यह बहुत पुरानी बात है.

उन्होंने कहा, "तब मैं युवा था. यह तब की बात है, जब रूस भी अफ़ग़ानिस्तान में नहीं आया था. हाँ, यह सच है कि मैंने आईएमए में ट्रेनिंग ली और वहाँ से ग्रेजुएट हुआ."

तालिबान के साथ भारत के रिश्ते कैसे होंगे, इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं. दोनों पक्षों ने ही इस बारे में अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है.

पीएम मोदी और तालिबान के प्रवक्त सुहैल शाहीन

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भारत और तालिबान

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों गुजरात के सोमनाथ में कई परियोजनाओं का उद्घाटन करते हुए 'आतंक की सत्ता' के बारे में ज़िक्र किया था.

हालाँकि उन्होंने सीधे-सीधे तालिबान का नाम नहीं लिया था.

पीएम मोदी ने कहा था, "आतंक के बलबूते साम्राज्य खड़ा करने वाली सोच है, वो किसी कालखंड में कुछ समय के लिए भले ही हावी हो जाए, लेकिन उसका अस्तित्व कभी स्थायी नहीं होता. वो ज़्यादा दिनों तक मानवता को दबाकर नहीं रख सकता."

तालिबान ने प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि 'भारत को जल्द ही पता चल जाएगा कि तालिबान अपनी सरकार सुचारू रूप से चला सकते हैं.'

रेडियो पाकिस्तान को दिए इंटरव्यू में तालिबान के वरिष्ठ नेता शहाबुद्दीन दिलावर ने भारत को चेतावनी दी कि वो अफ़ग़ानिस्तान के आंतरिक मामलों में दख़ल न दे.

अफ़ग़ानिस्तान को लेकर भारत की दुविधा कई तरह की है.

तालिबान को मान्यता देने के ख़तरे से लेकर सुरक्षा को लेकर चिंता और साथ-साथ बड़ी रक़म वाली परियोजनाओं के भविष्य पर कश्मकश.

अफ़गान महिला

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भारत ने तालिबान से ख़ुद को दूर ही रखा है

सामरिक मामलों के जानकारों को लगता है कि भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती तो यही है कि वो तालिबान की हुकूमत को मान्यता दे या नहीं. वैसे, इसको लेकर राय बँटी हुई भी है.

कुछ विशेषज्ञ कहते हैं कि भारत को फ़िलहाल कोई जल्दबाज़ी नहीं दिखानी चाहिए क्योंकि तालिबान की विचारधारा में कोई ख़ास बदलाव नहीं आया है. वो तब भी लोकतंत्र लागू करने के ख़़िलाफ़ थे और वो अब भी लोकतंत्र के ख़िलाफ़ हैं.

भारत ने कभी भी तालिबान को मान्यता नहीं दी है. इससे पहले भी जब उनकी सरकार थी तब भी भारत ने, राजनयिक भाषा में जिसे -'एंगेज' करना कहते हैं, वो कभी नहीं किया.

सिर्फ़ एक बार जब इंडियन एयरलाइंस के विमान का चरमपंथियों ने अपहरण कर लिया था और उसे कंधार ले गए थे, तब पहली और आख़िरी बार भारत ने तालिबान के कमांडरों से औपचारिक बातचीत की थी. फिर भारत ने हमेशा ख़ुद को तालिबान से दूर ही रखा.

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अपने एक पुराने बयान में तब्दीली करते हुए एक पैराग्राफ़ में संदर्भ के तौर पर इस्तेमाल किए गए 'तालिबान' शब्द को हटा दिया था. यहाँ यह ज़िक्र करना भी महत्वपूर्ण है कि अगस्त महीने के लिए सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता भारत के पास है.

वीडियो कैप्शन, भारत, तालिबान को मान्यता देगा या नहीं?

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