गुल आग़ा शेरजई: 'अफ़ग़ानिस्तान का बुलडोज़र अब तालिबान का बुलडोज़र बन गया'

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- Author, ख़ुदा-ए-नूर नासिर
- पदनाम, बीबीसी अफ़गान सेवा
यदि आप अफ़ग़ानिस्तान में रहे हैं या पिछले 20 सालों में अफ़ग़ानिस्तान की राजनीति और स्थिति को करीब से देखने की कोशिश की है, तो आप निश्चित रूप से 'अफ़ग़ानिस्तान के बुलडोज़र' को जानते होंगे.
अब यह बुलडोज़र अफ़ग़ानिस्तान का ही नहीं बल्कि 'इस्लामिक अमीरात' का बुलडोज़र भी हो गया है.
ग़ुल आग़ा शेरजई सीआईए के पूर्व एजेंट और वारलॉर्ड हैं. वो कंधार और नंगरहार प्रांत के गवर्नर रह चुके हैं.
उन्होंने रविवार को तालिबान के प्रति वफ़ादारी की शपथ ली है. तालिबान का कहना है कि ग़ुल आग़ा शेरजई अब तालिबान सरकार का हिस्सा होंगे.
साल 2001 में जब नेटो बलों का नेतृत्व करते हुए अमेरिका ने तालिबान को खदेड़ने के लिए अफ़ग़ानिस्तान पर हमला बोला तो ग़ुल आग़ा शेरजई ऐसे पहले वारलॉर्ड थे जिन्होंने अमेरिका का समर्थन किया.
दक्षिणी प्रांत कंधार में वो सीआईए के साथ आ गए और तालिबान के ख़िलाफ़ लड़ाई में जुट गए.
अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की सत्ता आने से पहले वो कंधार प्रांत के गवर्नर थे और साल 2001 में तालिबान को सत्ता से हटाए जाने तक वो कंधार से बाहर ही रहे.
लेकिन तालिबान को सत्ता से हटाए जाने के बाद वो फिर कंधार लौट आए थे और गवर्नर का पद संभाल लिया था.
वो सीआईए और पूर्व अफ़ग़ानिस्तानी राष्ट्रपति हामिद करज़ई के क़रीबी थे.
ऐसे में तालिबान के सत्ता से बाहर होते ही उन्हें कंधार मिल गया और वो 2003 तक इस प्रांत के गवर्नर रहे. बाद में वो नंगरहार के गवर्नर बने.

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ग़ुल आग़ा शेरजई को बुलडोजऱ क्यों कहा जाता है?
पूर्व गवर्नर और अफ़ग़ान सरदार ग़ुल आग़ा शेरजई के क़रीबी दोस्तों के मुताबिक उन्होंने 2005 से 2013 तक नंगरहार का गवर्नर रहते हुए नंगरहार प्रांत में बुलडोज़र का खिताब पाया.
उनके दोस्तों का कहना है कि जब गवर्नर रहते हुए ग़ुल आग़ा शेरजई नंगरहार प्रांत के दूर-दराज़ इलाक़ों का दौरा किया करते थे तो आम लोगों की सबसे बड़ी और एकमात्र मांग सड़क हुआ करती थी.
सड़क ना होने या बंद होने की वजह से होने वाली मुश्किलों को लोग उनके सामने रखते. शेरजई ना सिर्फ़ मांग मान लेते बल्कि काम भी तुरंत शुरू करवाते थे.
गवर्नर शेरजई अक्सर इन दूरदराज़ के इलाक़ों में अपने दौरे के दौरान ग्रामीणों को नक़द और मशीनरी देते थे और वे बिना इंतजार किए वहां काम शुरू कर देते थे और बुलडोज़र और अन्य मशीनरी के साथ सड़कों का निर्माण शुरू हो जाता था.
ग़ुल आग़ा शेरजई की एक निजी निर्माण कंपनी भी थी और सूत्रों के अनुसार वह अक्सर सड़कें बनाने का काम करने के लिए अपनी निर्माण कंपनी के बुलडोज़र और अन्य बड़ी मशीनरी का इस्तेमाल करते थे. यही कारण है कि उन्हें बुलडोज़र के रूप में जाना जाने लगा.
दिलचस्प बात यह है कि ग़ुल आग़ा शेरजई ने ख़ुद को बुलडोज़र कहने में कोई गुरेज नहीं किया और अफ़ग़ानिस्तान में 2014 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान उनका चुनाव चिन्ह बुलडोज़र ही था.
लंबे और तगड़े शरीर वाले ग़ुल आग़ा शेरजई को कभी टाइम पत्रिका ने 'जब्बा द हट' का नाम दिया था.
ग़ुल आग़ा शेरजई के एक क़रीबी के मुताबिक कंधार के बाद वह लंबे समय से राष्ट्रपति हामिद करज़ई से हेरात, कंधार या नंगरहार के गवर्नर पद की मांग कर रहे थे. उन्होंने करज़ई से कहा था कि मुझे किसी और प्रांत की गवर्नरशिप नहीं चाहिए.
शेरजई के क़रीबी सहयोगी के अनुसार वह उन तीनों प्रांतों में इसलिए दिलचस्पी रखते थे क्योंकि ईरान और पाकिस्तान के साथ इन तीनों प्रांतों से कारोबारी रास्ते जाते थे. इन कारोबारी चौकियों से अवैध धन की उगाही की जा सकती थी.
ग़ुल आग़ा शेरजई तालिबान के कट्टर विरोधियों में शामिल थे और उन्हें 'तालिबान का क़साई' कहा जाता था. 2001 में जब तालिबान को खदेड़ दिया गया था तो उन्होंने कई तालिबान और अल-क़ायदा लड़ाकों को मरवा डाला था.

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संगीत प्रेमी बुलडोज़र
अफ़ग़ानिस्तान के बुलडोज़र के नाम से मशहूर ग़ुल आग़ा शेरजई के क़रीबी सहयोगियों के मुताबिक वो संगीत प्रेमी हैं और कई मौकों पर ख़ुद भी गाते हैं.
'राका जाम राका जाम' ग़ुल आग़ा शेरजई का गाया गया एक पश्तो गाना है जो कई साल पहले वायरल हुआ था.
'राका जाम' पश्तो गाने के बहुत से चाहने वाले हैं लेकिन नंगरहार का गवर्नर रहते हुए उनके एक बेहद करीबी रहे दोस्त का कहना है कि जब शेरजई बुलेटप्रूफ गाड़ी में लॉन्ग ड्राइव पर जाया करते थे तो ये गाना गाया करते थे.
उनके ये मित्र बताते हैं कि सफर के दौरान वो पूछते रहते थे कि गाना कैसा है, मज़ा आ रहा है या नहीं और हम कहते थे कि बहुत मज़ा आ रहा है.
वो कहते हैं कि हम और बाकी दोस्त उनकी गायकी से हैरान रह जाया करते थे.
नंगरहार का गवर्नर रहते हुए उनके करीबी दोस्त रहे इस व्यक्ति का कहना है कि वो लोग काबुल से नंगरहार तक एक ही गाड़ी में शेरजई के साथ यात्रा करते थे.
वो बताते हैं, "ऐसी ही एक यात्रा के दौरान जलालाबाद के पास सड़क पर निर्माण कार्य चल रहा था. गवर्नर शेरजई ने देखा कि एक मज़दूर सड़क किनारे से मिट्टी उठाकर रेत में मिला रहा था."
"गवर्नर ने नीचे जाकर मजदूर को कॉलर से पकड़ लिया और बाकी सामग्री के साथ मिट्टी मिलाने के लिए उसे बहुत डांटा."
शेरज़ई के दोस्त के मुताबिक जब वो मज़दूर को डांट रहे थे तो कंस्ट्रक्शन कंपनी का इंचार्ज मौके पर आया जो चीनी नागरिक था. गवर्नर शेरजई ने उन्हें भी गिरेबान से पकड़ लिया और उन्हें भी बहुत डांटा. फिर उन्हें पता चला कि ये गवर्नर शेरजई हैं.
'अफ़ग़ानिस्तान का बुलडोज़र अब तालिबान का बुलडोज़र बन गया'
तालिबान के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो शेयर किए हैं जिनमें ग़ुल आग़ा शेरजई तालिबान नेता खलीलउर्रहमान हक्कानी के प्रति वफ़दारी की क़सम खाते दिख रहे हैं.
इससे पहले जब तालिबान ने काबुल पर क़ब्ज़ा किया था तब ग़ुल आग़ा शेरजई ने एक वीडियो जारी करके तालिबान को बधाई दी थी और उनका स्वागत किया था.
तालिबान की तरफ से जारी वीडियो में मुफ़्ती ज़ाकिर वफ़ादारी की क़सम खिलाने के बाद तकबीर के नारे लगाए जाते हैं और कहते हैं कि जनाब शेरजई ने एलान किया है कि वो अफ़ग़ानिस्तान के बुलडोज़र हैं. जवाब में शेरजई सिर हिलाते हुए कहते हैं कि हां, बिलकुल.
मुफ़्ती ज़ाकिर फिर कहते हैं, "अब मैं ये कहता हूं कि वो बुलडोज़र होंगे"
मुफ्ती जाकिर कहते हैं, "अब मैं कहता हूं कि वे हम सब, इस्लामी अमीरात और अमीर-उल-मोमीनीन की जानिब से पूरे अफ़ग़ानिस्तान को बनाने वाले बुलडोज़र होंगे."
इसके बाद ग़ुल आग़ा शेरजई, खलीलउर्रहमान हक्कानी और बाकी सभी मौजूद लोग इंशा अल्लाह कहते हुए नज़र आते हैं.
तालिबान नेताओं का कहना है कि उन्हें अब किसी भी अफ़ग़ान राजनेता के प्रति कोई दुश्मनी नहीं है और सभी अफ़ग़ान राजनेताओं के लिए "आम माफी" का ऐलान कर दिया गया है.
हालांकि तालिबान पर अपने कई विरोधियों के आत्मसमर्पण के बाद उनकी हत्या करने के आरोप भी लग रहे हैं. तालिबान ने इन्हें प्रोपेगैंडा कहकर खारिज किया है.
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