सोवियत संघ का वो अंतरिक्ष यात्री जिसे धरती पर लौटने से मना कर दिया गया

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- Author, कार्लोस सेरानो
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़ वर्ल्ड
अंतरिक्ष यात्री सर्गेइ क्रिकालेव सोवियत संघ के एमआईआर स्पेस स्टेशन से पूरी दुनिया देख सकते थे. लेकिन उस ऊंचाई से उन्हें वो राजनीतिक संघर्ष नहीं दिख रहा था जिसकी आग में उनका देश जल रहा था.
ये बात 18 मई, साल 1991 की है जब क्रिकालेव सोयूज़ स्पेस क्राफ़्ट में बैठकर पांच महीने लंबे मिशन पर एमआईआर स्पेस स्टेशन पहुंचे थे. उनके साथ सोवियत संघ के एक अन्य वैज्ञानिक अनातोली अर्टेबार्स्की और ब्रितानी वैज्ञानिक हेलेन शरमन भी गई थीं.
उनका विमान कज़ाकिस्तान के बैकानूर अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च हुआ था.
ये वही केंद्र था जिसके दम पर सोवियत संघ ने अमेरिका को स्पेस रेस में पछाड़कर पृथ्वी की कक्षा में पहला उपग्रह स्थापित करने से लेकर एक कुत्ते लाइका को अंतरिक्ष यात्रा पर भेजने और अंतरिक्ष में पहले इंसान यूरी गैगरिन को 1961 में पहुंचाने में सफलता प्राप्त की थी.
इस समय तक एमआईआर स्पेस स्टेशन (मीर अंतरिक्ष केंद्र) अंतरिक्ष अभियानों के क्षेत्र में सोवियत ताक़त का प्रतीक बन चुका था.
क्रिकालेव एक नियमित मिशन पर अंतरिक्ष में गए थे. उन्हें कुछ कलपुर्ज़ों को ठीक करके स्टेशन में सुधार लाना था. लेकिन जहां अंतरिक्ष में सब कुछ बिल्कुल ठीक ढंग से चल रहा था, वहीं, ज़मीन पर सोवियत संघ तेज़ी से बिखरता दिख रहा था.
कुछ महीनों में ही, जब क्रिकालेव अंतरिक्ष में थे, विशाल और ताक़तवर सोवियत संघ बिखर गया. इसके चलते एक आसान मिशन पर अंतरिक्ष केंद्र पहुंचे क्रिकालेव कई महीनों के लिए अधर में लटक गए.
उन्हें पहले से तय समय के दोगुने से ज़्यादा समय अंतरिक्ष में गुज़ारना पड़ा.
ये सर्गेइ क्रिकालेव नाम के उस अंतरिक्ष यात्री की कहानी है जो दस महीनों का लंबा वक़्त गुज़ारकर वापस धरती पर उतरे तो उनके देश का नाम दुनिया के नक्शे से मिट चुका था.
अपने इस मिशन की वजह से वह दुनिया भर में 'सोवियत संघ के अंतिम नागरिक' के रूप में चर्चित हैं.

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सबसे ज़्यादा चर्चित अंतरिक्ष यात्री
सर्गेइ क्रिकालेव का जन्म साल 1958 में सोवियत संघ के लेनिनग्राद शहर में हुआ था जिसे अब सेंट पीटर्सबर्ग कहा जाता है.
उन्होंने साल 1981 में लेनिनग्राद मैकेनिकल इंस्टीट्यूट से मैकेनिकल इंजीनियरिंग विषय में स्नातक तक की पढ़ाई की और चार साल की ट्रेनिंग के बाद वह एक अंतरिक्ष यात्री बन गए.
साल 1988 में वह पहली बार एमआईआर स्पेस स्टेशन (मीर अंतरिक्ष केंद्र) पहुंचे जो कि धरती से चार सौ किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी का चक्कर लगा रहा था.
फ़िलहाल, क्रिकालेव रूसी स्पेस एजेंसी रॉसकॉसमॉस के उस विभाग के निदेशक हैं जिसके द्वारा अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजा जाता है.
साल 1991 के मई महीने में क्रिकालेव ने अपनी दूसरी अंतरिक्ष यात्रा की थी.
अंतरिक्ष अभियानों की इतिहासकार कैथलीन लेविस बताती हैं, "क्रिकालेव दुनिया भर में काफ़ी लोकप्रिय हो गए क्योंकि वह एक ऐसे अंतरिक्ष यात्री थे जिन्होंने अंतरिक्ष केंद्र के रेडियो से धरती पर मौजूद आम लोगों से बात की."
लेविस क्रिकालेव द्वारा अंतरिक्ष में बिताए गए लंबे वक़्त की ओर इशारा करते हुए वो कहती हैं कि वे रेडियो का इस्तेमाल करके धरती पर मौजूद उन आम लोगों से बात करते थे जिन्हें उनकी फ़्रीक्वेंसी मिल जाती थी.
लेविस कहती हैं, "उन्होंने इस तरह दुनिया भर में अनौपचारिक रिश्ते बनाए." क्रिकालेव कभी भी एमआईआर स्पेस स्टेशन में अकेले नहीं थे, लेकिन वह काफ़ी प्रसिद्ध थे.
लेविस कहती हैं, "स्पेस स्टेशन पर वह अकेले नहीं थे. लेकिन रेडियो पर सिर्फ़ वही बात कर रहे थे."
इतिहासकार लेविस मानती हैं कि अंतरिक्ष केंद्र में उनके साथ एक अन्य सोवियत नागरिक एलेक्ज़ेंडर वोल्कोव थे. लेकिन क्रिकालेव ही दुनिया भर में 'अंतिम सोवियत नागरिक' के रूप में चर्चित हुए.
लेविस कहती हैं, "स्पेस स्टेशन पर वह अकेले नहीं थे लेकिन वह एक पॉपुलर शख़्सियत बने."
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'जब बिखर गया सोवियत संघ'
साल 1990 से लेकर 1991 तक उन सभी गणराज्यों ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा कर दी जिन्हें मिलाकर सोवियत संघ बना था.
इसी समय सोवियत संघ के राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचोफ़ अपने चर्चित अभियान पेरेस्त्रोइका के ज़रिए देश का आधुनिकीकरण करते हुए उसे पूंजीवाद के क़रीब लाए और कई कंपनियों की आर्थिक ताक़त का विकेंद्रीकरण किया. इसके साथ ही उन्होंने निजी व्यवसायों के गठन का रास्ता खोल दिया.
कम्युनिस्ट पार्टी में इस प्रक्रिया का काफ़ी विरोध किया गया. साल 1991 की 19 से 21 अगस्त के बीच कम्युनिस्ट पार्टी के सबसे मज़बूत हिस्से ने गोर्बाचोफ़ के ख़िलाफ़ तख़्तापलट की कोशिश की.
ये तख़्तापलट विफल रहा लेकिन इसने सोवियत संघ को काफ़ी नुकसान पहुंचाया.
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'सब कुछ ठीक है'
जब गोर्बाचोफ़ अपने देश का नियंत्रण खो रहे थे तब क्रिकालेव अंतरिक्ष में मौजूद थे.
सोवियत संघ के सामने गहराए राजनीतिक और आर्थिक संकट की वजह से क्रिकालेव को अगला आदेश मिलने तक अंतरिक्ष में रहने को कहा गया.
साल 1993 में बीबीसी की एक डॉक्यूमेंट्री में क्रिकालेव ने कहा था, "हमारे लिए ये काफ़ी अप्रत्याशित था. जो सब कुछ हो रहा था, वो हमें समझ नहीं आया.
उन्होंने हमें जो थोड़ी-बहुत जानकारी दी, उससे हमने पूरी बात समझने की कोशिश की."
लेविस के मुताबिक़, क्रिकालेव को जो कुछ पता चला, वह पश्चिमी देशों के लोगों से बात करके पता चला क्योंकि उन दिनों सोवियत संघ में 'सब कुछ ठीक है' वाला राग अलापा जा रहा था.
क्रिकालेव की पत्नी एलिना तेरेखिना सोवियत स्पेस कार्यक्रम में एक रेडियो ऑपरेटर के रूप में काम कर रही थीं.
उन्होंने भी क्रिकालेव से बात की लेकिन उन्होंने भी अपने पति को ज़मीनी हालात से अवगत नहीं कराया.
बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री में तेरेखिना याद करते हुए कहती हैं, "मैं उन्हें दुखद बातें बताने से बच रही थी. मुझे लगता है कि वह भी यही कर रहे थे.
वह हमेशा कहते थे कि सब कुछ ठीक है, ऐसे में ये जानना काफ़ी मुश्किल था कि वह अपने दिल में क्या महसूस कर रहे थे."
कर्तव्य को पूरा करने की ज़िम्मेदारी
क्रिकालेव अंतरिक्ष में अपना मिशन आगे बढ़ाने के लिए तैयार हो गए. लेकिन वह ये स्वीकार करते हैं कि ये आसान नहीं था.
वह याद करते हुए कहते हैं, "क्या मेरे पास पर्याप्त शक्ति होगी. क्या मैं लंबे समय के लिए अपने आपको तैयार कर सकता हूं. मेरे पास इन सवालों के जवाब नहीं थे."
क्रिकालेव और वोल्कोव कभी भी वापस आ सकते थे लेकिन इसका मतलब अंतरिक्ष केंद्र को खाली छोड़ना होता.

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लेविस कहती हैं, "ये एक ब्यूरोक्रेटिक समस्या थी. वे स्टेशन को छोड़ना नहीं चाहते थे. लेकिन उनके पास एक अन्य अंतरिक्ष यात्री को भेजने के लिए पैसा भी नहीं था."
इसी समय रूस सरकार ने कज़ाकिस्तान के साथ अपने रिश्ते सुधारने के लिए कहा कि वे एक कज़ाक अंतरिक्ष यात्री को क्रिकालेव की जगह लेने के लिए भेजेंगे.
हालांकि, कज़ाकिस्तान के पास क्रिकालेव जितना अनुभवी अंतरिक्ष यात्री नहीं था और ऐसे में उसे तैयार करने में वक़्त लगना लाज़मी था.
इसी बीच क्रिकालेव अंतरिक्ष में ऐसे शारीरिक और मानसिक प्रभावों को झेल रहे थे जिनके बारे में आज भी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है.
नासा के मुताबिक़, अंतरिक्ष में समय बिताने से रेडिएशन का शिकार होने आदि का जोख़िम होता है जिससे कैंसर जैसी बीमारियों का ख़तरा होता है.
गुरुत्वाकर्षण बल की कमी से मांसपेशियों और बोन मास में कमी के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता में बदलाव हो सकता है और आइसोलेशन में रहने की वजह से मानसिक समस्याएं हो सकती हैं.
हालांकि, क्रिकालेव कहते हैं कि उन्हें ये हमेशा से पता था कि अंतरिक्ष केंद्र में बने रहना उनका कर्तव्य है.
क्रिकालेव के बदले कोई नहीं आया
इसके बाद अक्टूबर महीने में तीन नए अंतरिक्ष यात्री एमआईआर स्पेस स्टेशन पहुंचे. लेकिन इनमें से किसी को भी इतनी ट्रेनिंग नहीं मिली थी कि वे क्रिकालेव की जगह ले सकें.
लेविस के मुताबिक़, क्रिकालेव को लेकर जो लोग सबसे ज़्यादा चिंतित थे, वे सोवियत संघ के बाहर थे और उस शख़्स के हालातों की कल्पना कर रहे थे जिसे अंतरिक्ष में छोड़ दिया गया हो.
वहीं, रूसी सरकार के लिए ये कुछ ऐसा था कि उनके पास उस वक़्त अलग प्राथमिकताएं और चिंताएं थीं.
इसके बाद 25 अक्टूबर 1991 को कज़ाकिस्तान ने अपनी संप्रभुता का एलान कर दिया जिससे वह कॉस्मोड्रॉम जिससे क्रिकालेव का रिले छोड़ा जाना था, वह रूसी नियंत्रण से बाहर हो गया.
इसके बाद 25 दिसंबर 1991 को सोवियत संघ पूरी तरह बिखर गया.
उसी दिन गोर्बाचोफ़ ने सेहत ख़राब होने की बात कहते हुए इस्तीफ़ा दे दिया जिसके साथ सोवियत संघ का अंत हो गया.
सोवियत संघ 15 राष्ट्रों में बिखर गया और जिस देश ने क्रिकालेव को अंतरिक्ष में भेजा था, वो सोवियत संघ से रूस हो गया. जिस शहर में क्रिकालेव का जन्म हुआ था और जहां उन्होंने पढ़ाई की थी, उस शहर का भी नाम बदलकर सेंट पीटर्सबर्ग कर दिया गया.
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जब वापस लौटे क्रिकालेव
जब ज़मीन पर ये सब कुछ हो रहा था तब क्रिकालेव पृथ्वी को देखते हुए उनके साथियों द्वारा बजाए जा रहे गानों को सुन रहे थे और रेडियो पर लोगों से बात कर रहे थे.
इसके बाद 25 मार्च 1992 को क्रिकालेव और वोल्कोव पृथ्वी पर वापस आए. इस तरह क्रिकालेव ने अंतरिक्ष में 312 दिन बिताए और 5000 बार पृथ्वी के चक्कर लगाए.
वह कहते हैं, "वापस आना काफ़ी सुखद था. हालांकि, हमें गुरुत्वाकर्षण बल की वजह से दिक्क़त हुई लेकिन हम मानसिक बोझ से मुक्त हो गए.
मैं ये नहीं कहूंगा कि ये हर्षोल्लास का पल था, लेकिन ये काफ़ी अच्छा था."
लेकिन इस लंबी यात्रा के बाद भी क्रिकालेव अपने दूसरे रोमांच के लिए तैयार थे. वह साल 2000 में अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन जाने वाली पहली टीम के सदस्य बने.
आईएसएस उस नए अंतरिक्ष युग का प्रतीक है जिसने पुराने झगड़ों को पीछे छोड़कर ब्रह्मांड के रहस्यों को तलाशने के लिए सभी देशों के बीच सहयोग वाले मॉडल को जन्म दिया है.
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