अनिल मेनन बन सकते हैं चांद पर जाने वाले भारतीय मूल के पहले व्यक्ति

अनिल मेनन

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नासा ने सोमवार को अपने भविष्य के मिशनों के लिए 10 नए अंतरिक्ष यात्रियों की टीम का ऐलान किया है. भारतीय मूल के फिज़िशियन अनिल मेनन इस नई नासा की टीम का हिस्सा हैं.

अगले साल जनवरी से मेनन नासा में मिली इस नई भूमिका में काम शुरू करेंगे.

अमेरिका के मिनेसोटा में यूक्रेन, भारतीय अप्रवासी परिवार में जन्मे अनिल ने साल 2018 में स्पेस-एक्स ज्वाइन किया और वहां पांच लॉन्च के दौरान मुख्य फ्लाइट सर्जन के तौर पर काम किया. साल 2014 में उन्होंने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के साथ बतौर डिप्यूटी क्रू सर्जन काम किया.

इससे पहले भी वह नासा की ओर से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर भेजे गए चालक दल के लिए फ्लाइट सर्जन के तौर पर काम कर चुके हैं.

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स्पेस-एक्स से नासा तक

45 साल के अनिल मेनन का नासा की इस टीम के लिए चयन पांचवी बार आवेदन करने के बाद हुआ. इस साल नवंबर में एस्पेस-एक्स के कैप्सूल से अंतरिक्ष में छह महीने रहने वाले फ्रांसीसी अंतरिक्ष यात्री थॉमस पेसक्वेत को अनिल मेनन ने उनके ड्रैगन कैप्सूल से सुरक्षित बाहर निकाला था.

मेनन ने समाचार एजेंसी एफ़पी से बात करते हुए कहा, ''ये बेहतरीन होगा कि मैं अब खुद शारीरिक तौर पर इस अनुभव को महसूस कर पाऊंगा.''

अपने मेडिकल रिसर्च की बात करते हुए उन्होंने कहा, '' मुझे लगा लगता है मेडिकल को लेकर मेरी समझ लोगों के स्वस्थ और सुरक्षित रखने में मदद करेगी. ''

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हावर्ड से न्यूरोबायोलॉजी की पढ़ाई और भारत में पोलियो पर स्टडी

साल 1999 में अनिल मेनन ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से न्यूरोबायोलॉजी में स्नातक की डिग्री ली और साल 2004 में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री प्राप्त की.

2009 में, उन्होंने स्टैनफोर्ड मेडिकल स्कूल से डॉक्टर ऑफ़ मेडिसिन में स्नातक किया. अपने हार्वर्ड की दिनों के दौरान, मेनन ने हंटिंगटन्स बीमारी पर शोध किया और पोलियो टीकाकरण का अध्ययन करने के लिए रोटरी एंबेसडर स्कॉलर के रूप में भारत में एक साल बिताया.

मेनन ने कैलिफ़ोर्निया एयर नेशनल गार्ड भी ज्वाइन की और रेसिंग द प्लैनेट जैसी रिमोट एडवेंचर रेस के माध्यम से जंगलों की दवाइयों पर के बारे में तजुर्बा हासिल किया.

नेपाल से लेकर हैती के भूंकप में किया है काम

इमरजेंसी मेडिसिन फ़िज़िशियन अनिल मेनन ने एरोसप्स मेडिसिन में फैलोशिप ट्रेनिंग ली है. नासा की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक़ उन्होंने साल 2010 में हैती में आए भूकंप में काम किया और इसके बाद नेपाल में साल 2015 में आए भूकंप में भी उन्होंने लोगों की मदद की. मेनन को आपातकालीन परिस्थितियों में काम करने का ख़ासा अनुभव है.

मेनन अमेरिकी सेना के साथ "ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम" में अफ़ग़ानिस्तान में भी तैनात रह चुक हैं. इसके अलावा माउंट एवरेस्ट पर पर्वतारोहियों की देखभाल के लिए हिमालयन रेस्क्यू एसोसिएशन के लिए भी उन्होंने काम किया है, जिसके बाद मेनन का ट्रांसफ़र अमेरिकी एयर फ़ोर्स के 173 वें फाइटर विंग में हो गया, जहां उन्होंने एयरोस्पेस मेडिसिन की पढ़ाई की.

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दो साल की ट्रेनिंग, फिर मिलेगा स्पेस में जाने का मौका

2021 की टीम के लिए 12,000 आवेदकों में से छह पुरुषों और चार महिलाओं का चयन किया गया है. उम्मीदवारों को अब दो साल के प्रशिक्षण से गुजरना होगा.

इन्हें बुनियादी अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेगा होगा, जिसमें अंतरिक्ष में उड़ान भरने के लिए उम्मीदवारों में आवश्यक ज्ञान और कौशल विकसित किया जाएगा.

उम्मीदवारों को सेना की तर्ज पर पानी में भी जिंदा रह सकने का कौशल, नासा के टी -38 जेट को उड़ाने का प्रशिक्षण और स्कूबा ड्राइविंग की ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वह स्पेसवॉक में सक्षम हो सकें.

अंतरिक्ष यात्री के रूप में अंतिम चयन तभी होगा जब ये उम्मीदवार प्रशिक्षण को 'सटिफ़ेक्ट्री लेवल' के साथ पास करेंगे, यानी इस टीम में शामिल भर हो जाना, मिशन में शामिल होने की अंतिम गारंटी नहीं देता.

कॉपी-कीर्ति दुबे

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