रूस कैसे पश्चिमी सोशल मीडिया कंपनियों पर कस रहा है शिकंजा

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

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    • Author, आंद्रे ज़ख़ारोव और सेनिया चुर्मानोवा
    • पदनाम, बीबीसी रूस

रूस में गूगल और मेटा को लाखों डॉलर का जुर्माना भरना पड़ सकता है. वजह ये है कि रूस की सरकार ने उनसे अपने प्लेटफ़ार्म से उन सामग्रियों को हटाने की मांग की है, जिनको वह अवैध मानता है. अगर गूगल और मेटा ने रूसी सरकार की इन मांगों को पूरा नहीं किया, तो जुर्माना देना पड़ सकता है.

लेकिन, अदालत के दस्तावेज़ों को देखने से पता चलता है कि जिस सामग्री को हटाने के लिए कहा गया है, वो रूस की जेल में बंद विपक्षी नेता एलेक्सी नवेलनी के समर्थन में हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर लिखी गईं सामान्य पोस्ट थीं.

2018 की गर्मियों में रूस के एक कवि ने साइबेरियन वाइकिंग उपनाम से अपने फ़ेसुबक अकाउंट पर एक चित्र पोस्ट किया था. इस चित्र में रूस के राष्ट्रचिन्ह में बाज के दो मुंह की जगह पर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और तत्कालीन प्रधानमंत्री दिमित्री मेदवेदेव की तस्वीर लगी थी.

इसके दूसरी तरफ़ एक छोटी-सी कविता लिखी थी कि जिसमें आरोप लगाया गया था कि बाज दूसरों की तुलना में दोगुना लालची है, दोगुना झूठा है और चार आँखों से निगरानी करता है. कविता के अंत में लिखा गया, "रूसी इस संक्रमण को दूर करने के लिए कब जागेंगे?"

वीडियो कैप्शन, अमेरिका ने चेतावनी दी है कि रूस ने यूक्रने पर हमला किया तो अमेरिका सख़्त क़दम उठाएगा.

रूस की सरकार ने फ़ेसबुक को इस पोस्ट को डिलीट करने के लिए कहा है क्योंकि "ये देश, संविधान और राष्ट्रपति का घोर अपमान करती है."

लेकिन, फ़ेसबुक ने रूस की सरकार की बात नहीं मानी. पश्चिम मीडिया के ख़िलाफ़ किए गए 60 से ज़्यादा मुक़दमों में इस पोस्ट का ज़िक्र किया गया. इसके चलते उस पर 20 लाख डॉलर का जुर्माना लगाया गया है.

ये साफ़ नहीं है कि वास्तव में कितना जुर्माना भरा गया है. लेकिन, इन मामलों से उन देशों में काम करने की मुश्किलों का पता चलता है, जहाँ अभिव्यक्ति की आज़ादी और राजनीतिक गतिविधि पर पाबंदियां लगी हुई हैं.

इस साल जून में एलेक्स नवेलनी की एंटी-करप्शन फाउंडेशन को 'चरमपंथी' संगठन घोषित कर दिया गया था, जो उसे तालिबान और इस्लामिक स्टेट समूह के बराबर ला खड़ा करती है.

रूसी मीडिया नियामक रोसकोमेदज़ोर के प्रमुख आंद्रेई लिपोव के मुताबिक़ सोशल मीडिया कंपनियाँ 'सबसे ख़तरनाक चीज़ों' को ढूंढने और हटाने के लिए बाध्य हैं, जो उन्होंने कॉमरसेंट अख़बार से बातचीत में बताई थीं जैसे "चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी, आत्महत्या, ड्रग्स, चरमपंथ और फर्ज़ी ख़बरें".

मेटा

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किस तरह की पोस्ट पर आपत्ति

लेकिन गूगल, फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर के ख़िलाफ़ अदालती कार्यवाही में जिन 600 पोस्ट का ज़िक्र किया गया है, उनकी बारीक जाँच से पता चलता है कि उनमें से सिर्फ़ नौ चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी या ड्रग्स और केवल 12 आत्महत्या से संबंधित हैं. इनमें सबसे ज़्यादा संख्या उन पोस्ट की है, जिनमें नवेलनी के समर्थन वाले प्रदर्शनों में शामिल होने की अपील की गई है.

अभिव्यक्ति की आज़ादी के लिए काम करने वाले समूह रोसकोमस्वबोदा में क़ानून विशेषज्ञ सरकिस डर्बिनियन कहते हैं, "ना तो रोसकोमेदज़ोर और ना ही सरकार ये कहना चाहती है कि रूस में राजनीतिक सेंसरशिप है."

आधिकारिक बयानों में बच्चों की सुरक्षा पर ज़ोर देने को लेकर वो कहते हैं, "ये करना क्यों ज़रूरी है. लोगों को ये साबित करने के लिए वो बच्चों के आँसुओं का इस्तेमाल करते हैं."

मीडिया नियामक रोसकोमेदज़ोर ने इस मामले पर बयान देने के बीबीसी के अनुरोध पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. लेकिन, राष्ट्रपति पुतिन के प्रवक्ता ने पहले कहा था कि सोशल मीडिया कंपनियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करना सेंसरशिप नहीं है. ये रूस के क़ानून को लागू करने की बस एक कोशिश है.

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सोशल मीडिया कंपनियों पर साल 2015 से दबाव बना हुआ है. तब सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वाले रूस के लोगों का निजी डेटा रूस में ही स्टोर करने के लिए बाध्य करने वाला क़ानून लाया गया था. ऐसा करने पर सरकार को कंपनियों पर जुर्माना लगाने या उन्हें बंद करने का अधिकार था.

लेकिन, किसी भी पश्चिमी सोशल मीडिया ने इसका पालन नहीं किया, जिसके कारण 2016 में लिंकडेन को अपनी सेवाएँ बंद करनी पड़ीं. गूगल, मेटा और ट्विटर पर 2020 की शुरुआत से कुल छह लाख डॉलर से ज़्यादा का जुर्माना लगाया गया है.

साल 2016 के बाद से रूस की सरकार की ओर से गूगल से उसके यूट्यूब प्लेटफॉर्म से वीडिया हटाने और सर्च के कुछ नतीजों को ब्लॉक करने के अनुरोध में तेज़ी आने लगी.

कंपनी की पारदर्शिता रिपोर्ट दिखाती है कि पिछले 10 सालों में उसे दुनिया के बाक़ी देशों के मुक़ाबले रूस से ज़्यादा ऐसे अनुरोध मिले हैं. गूगल का कहना है कि इनमें से एक तिहाई अनुरोध राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर थे.

दूसरी पश्चिमी कंपनियों की तरह गूगल ने भी कुछ अनुरोधों का पालन किया, लेकिन सभी का नहीं.

एलेक्सी नवेलनी

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एलेक्सी नवेलनी केंद्र में

साल 2021 की शुरुआत में एलेक्सी नवेलनी के जर्मनी के अस्पताल से रूस लौटने के बाद सोशल मीडिया पर अवांछनीय सूचानओं को नियंत्रित करने की कोशिशें बढ़ गई थीं. नवेलनी को ज़हर दिया गया था और जर्मनी में उनका इलाज हुआ था.

नवेलनी को वहाँ से आते ही तुरंत गिरफ़्तार कर लिया गया. इससे राजधानी मॉस्को, सेंट पीटर्सबर्ग और अन्य शहरों में बिना अनुमति के विरोध प्रदर्शन हुए. इसे लेकर सोशल मीडिया में समर्थकों ने कई पोस्ट किए.

इसे लेकर मीडिया नियामक रोसकोमेदज़ोर ने शिकायतें की. रूस के तीसरे सबसे ज़्यादा लोकप्रिय सोशल नेटवर्क वीकॉनटेक्टि (या VK.com) से ये पोस्ट तुरंत हटा लिए गए.

लेकिन, पश्चिमी सोशल मीडिया ने इन शिकायतों पर इस तरह कार्रवाई नहीं की. ऐसे में उन्हें अदालत ले जाया गया.

ट्विटर

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ट्विटर का ट्रैफ़िक धीमा किया

मार्च में अगला क़दम ये था कि ट्विटर पर ट्रैफ़िक धीमा कर दिया गया क्योंकि उसने भी कुछ पोस्ट डिलीट करने इनकार कर दिया था. ऐसे में तस्वीरें और वीडियो अपलोड होना धीमा हो गया.

बाद में गूगल और ऐपल को एक वोटिंग ऐप हटाना पड़ा, जिसमें नवेलनी के समर्थक स्थानीय चुनाव में एक उम्मीदवार के पक्ष में लोगों को एकजुट करने की कोशिश कर रहे थे. इससे सत्ताधारी पार्टी यूनाइटेड रशिया पार्टी के उम्मीदवार की हार की आशंका बढ़ सकती थी.

नवेलनी की टीम के प्रमुख इवान इज़दानव ने इस राजनीतिक सेंसरशिप के लिए कंपनियों की निंदा की.

बाद में इवान इज़दानव ने ऐपल के एक पत्र का हिस्सा ट्वीट किया, जिसमें बताया गया था कि अभियोजन पक्ष ने कहा था कि ऐप चुनाव में अवैध तरीक़े से दख़ल दे रहा है और मीडिया नियामक रोसकोमेदज़ोर ने चेतावनी दी थी कि कंपनी एक 'चरमपंथी संगठन' को बढ़ावा दे रही है.

बीबीसी ने ऐपल, गूगल, मेटा और ट्विटर से साक्षात्कार के लिए बात की तो गूगल और ट्वीटर ने बयान देने से इनकार कर दिया और ऐपल व मेटा ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

रोसकोमेदज़ोर ने पोस्ट डिलीट कराने के साथ-साथ वोटिंग ऐप को हटाने में कुछ सफलता का दावा किया है.

मई में उसने ट्विटर को धीमा करने के क़दम को कुछ हद तक वापस लिया. उसने दावा किया कि कंपनी ने 5,900 ट्वीट्स की सूची में से 91% को डिलीट कर दिया है. अब केवल मोबाइल इंटरनेट उपकरणों पर तस्वीरें और वीडियो ट्विटर पर धीरे अपलोड होंगे.

जुर्माना लगने के बाद ट्विटर ने जो ट्वीट्स डिलीट किए वो केवल रूस के यूजर्स के लिए थे. लेकिन, रूस के बाहर को हमेशा दिखते रहेंगे.

ट्विटर

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कुछ ट्वीट्स ऐसे भी

अदालत के दस्तावेज़ों में मौजूद एक ट्वीट ऐसा था, जिसमें युवा कार्यकर्ता एलेक्सी ने नवेलनी के समर्थन में हो रहे विरोध प्रदर्शन के बारे में सूचना दी थी. ये विरोध प्रदर्शन जिस जगह पर होने थे उसके लिए आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई थी.

ऐसे में एक्टिविस्ट ने जगह के बारे में अप्रत्यक्ष तौर पर जानकारी देते हुए लिखा कि 'ऐसी जगह जहां तुम्हें नहीं जाना चाहिए', 'पुतिन आपको वहाँ नहीं जाने देना चाहते, तो ना जाएँ!'

लेकिन, रूस का मीडिया नियामक इस ट्वीट के लिए भी ट्विटर को अदालत ले गया और आख़िरकार ये ट्वीट हटाना पड़ा.

अब रूस के यूजर्स को ट्वीट की जगह एक संदेश दिखाई देता है कि क़ानूनी मांग के अनुरूप इसे रोक दिया गया है. हालाँकि, दुनिया में दूसरी जगहों पर ये ट्वीट दिखाई देगा.

एलेक्सी का कहना है कि उन्हें नहीं बताया गया कि ये ट्वीट हटा लिया गया है और उन्हें तब पता चला जब बीबीसी ने उनसे संपर्क किया. उन्होंने हैरानी जताई कि विरोध प्रदर्शनों को लेकर जो मूल ट्वीट था, उन्होंने उसे रिट्वीट भी किया था, वो अब भी दिख रहा है.

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इसके उलट कस्त्रमा शहर के राजनीतिक एक्टिविस्ट को उनका एक ट्वीट डिलीट करने की जानकारी दी गई थी. उनका VK.com का ऐसा ही एक पोस्ट भी हटा दिया गया था. फेसबुक ने उन्हें बताया था कि प्रशासन ने उनका पोस्ट हटाने के लिए उनसे संपर्क किया है लेकिन उन्होंने इसे नहीं हटाया है.

हालाँकि, फेसबुक और इंस्टाग्राम की पेरेंट कंपनी मेटा ने भी कुछ सामग्री हटाई है.

साल 2021 की पहली छमाही में रूसी प्रशासन के अनुरोध पर फ़ेसबुक या इंस्टाग्राम ने सामग्री के 1800 हिस्से हटाए हैं. अपनी पारदर्शिता रिपोर्ट में कंपनी ने ऐसी आधी सामग्री को 'चरमपंथ से जुड़ा हुआ' बताया है. इसमें ये नहीं बताया गया है कि कंपनी ने कितनी बार सरकार के अनुरोधों को ख़ारिज किया है.

गूगल की पारदर्शिता रिपोर्ट में भी बताया गया है कि रूसी प्रशासन की आपत्तियों पर सामग्री हटाई गई है, चाहे वो सर्च के नतीजे हों या यूट्यूब वीडियो.

अब गूगल पहले के मुक़ाबले इन अनुरोधों का ज़्यादा पालन करता है. 2021 की पहली छमाही में केवल 8% को ख़ारिज किया गया जबकि 2019 की समान अवधि में 50% को ख़ारिज किया गया था.

रूसी मीडिया नियामक रोसकोमेदज़ोर के प्रमुख आंद्रेई लिपोव

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इमेज कैप्शन, रूसी मीडिया नियामक रोसकोमेदज़ोर के प्रमुख आंद्रेई लिपोव

तकनीकी साधन और क़ानून की ताकत

रूस के पास सोशल मीडिया कंपनियों के संचालन को रोकने के लिए तकनीकी साधन हैं, और ऐसे क़ानून हैं जो इसे सही ठहरा सकते हैं.

वो रूस के यूजर्स का निजी डेटा रूस में ना रखने या हानिकारक सामग्री डिलीट ना करने को लेकर सोशल मीडिया कंपनियों पर क़ानूनी तौर पर रोक लगा सकते हैं. अगले साल से उन पर रूस में दफ़्तर ना बनाने के लिए भी रोक लगाई जा सकेगी.

अभी तक केवल गूगल के पास यहाँ एक जगह है (हालांकि, कंपनी इसे कार्यालय के बजाय "क़ानूनी इकाई" कहती है).

अभी जर्मनी में रूस से वित्त पोषित आरटी समाचार आउटलेट के चैनलों को बंद करने के लिए यूट्यूब को ब्लॉक करने की धमकी दी जा रही है.

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

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साल के अंत तक रूस अवैध सामग्री हटाने में असफल होने पर और ज़्यादा जुर्माना लेकर आने वाला है. 24 दिसंबर को होने वाली अदालती सुनवाई में गूगल और मेटा दोनों पर उनके वार्षिक राजस्व के 10 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है.

आंद्रेई लिपोव ने कॉमरसेंट से कहा, "यह प्लेटफॉर्म्स को प्रेरित करता है. हमने अभी तक जुर्माने का सहारा नहीं लिया है लेकिन हम ऐसा करेंगे."

मेटा ने रूस से होने वाली कमाई के बारे में नहीं बताया है लेकिन गूगल का पिछले साल का राजस्व कम से कम एक अरब डॉलर था. इस तरह गूगल पर 10 करोड़ डॉलर तक जुर्माना लग सकता है.

रोसकोमेदज़ोर के एक पूर्व अधिकारी ने पहचाने छुपाने की शर्त पर बीबीसी को बताया कि ये नए जुर्माने रूसी अधिकारियों को पश्चिमी कंपनियों को वहां चोट पहुंचान में सक्षम बनाएँगे जहाँ उन्हें तकलीफ़ होती है. और वो ऐसा करेंगे.

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