एलेक्सी नवेलनी: रूस में हो रहे प्रदर्शन जो पुतिन के लिए बन सकते हैं सिरदर्द

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- Author, केटरयना खिनकुलोवा
- पदनाम, बीबीसी रूसी सेवा
रूस में अलेक्सी नवेलनी को हिरासत में लिए जाने के बाद देश भर में लाखों लोग प्रदर्शन कर रहे हैं. दर्जनों प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार किया गया है. कुछ को पुलिस ने पीटा भी है. रविवार को हो रहे प्रदर्शनों में 4000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है. ये प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं और क्या ये रूस के लिए चिंता की बात है?
क्यों हो रहे हैं प्रदर्शन?
इन प्रदर्शनों की मुख्य मांग विपक्षी नेता एलेक्सी नवेलनी को रिहा करवाना है. दो सप्ताह पहले जर्मनी से लौटने के बाद एलेक्सी नवेलनी को जेल भेज दिया गया था.

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उन पर पिछले आपराधिक मामले में गिरफ्तारी के बाद मिली पैरोल की शर्तों के उल्लंघन का आरोप है.
नवेलनी और उनके समर्थक उन पर लगे आरोपों को राजनीति से प्रेरित कहकर ख़ारिज करते रहे हैं. उनका दावा है कि रूस की सरकार उन्हें जेल में डाले रखना चाहती हैं क्योंकि वो घोटालों और भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करते हैं.
पहले रूस की सरकार नवेलनी को ऐसा ब्लॉगर कहकर ख़ारिज करती रही है जिसे कोई नहीं जानता है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तो सार्वजनिक तौर पर उनका नाम तक नहीं लेते हैं. लेकिन अब सरकार को उनके आरोपों पर जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़ा है.
ये प्रदर्शन अलग कैसे हैं?

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रूस में 23 जनवरी को शुरू हुए सरकार विरोधी प्रदर्शन हाल के सालों के सबसे बड़े प्रदर्शन हैं.
ना सिर्फ संख्या के मामले में बल्कि ये रूस के कोने-कोने में हो रहे हैं. प्रदर्शन सिर्फ़ मॉस्को और सैंट पीटर्सबर्ग जैसे बड़े शहरों में ही नहीं बल्कि छोटे-छोटे इलाक़ों में भी हो रहे हैं.
रूस के सभी 11 समय क्षेत्रों में लोग एलेक्सी नवेलनी के समर्थन में बाहर निकले हैं. याकुत्स्क दुनिया का सबसे ठंडा इलाक़ा है. यहां शून्य से 50 डिग्री सेल्सियस नीचे तापमान में भी सैकड़ों लोग प्रदर्शन करने घरों से बाहर निकले.

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बीबीसी रूसी सेवा की गणना के मुताबिक कम से कम 120 शहरों और क़स्बों में ये प्रदर्शन हुए हैं. इस सप्ताहांत में भी इसी पैमाने पर लोग बाहर निकल सकते हैं.
इन प्रदर्शनों का तरीक़ा भी ध्यान देने लायक है. इनका मक़सद स्पष्ट है-एलेक्सी नवेलनी की रिहाई. नवेलनी सीधे तौर पर राष्ट्रपति पुतिन को चुनौती दे रहे हैं और वो निडर होकर उन पर उनके करीबी दोस्तों पर सत्ता के दुरुपयोग का इल्ज़ाम लगा रहे हैं.
बीते कुछ सालों में नवेलनी ने रूस में ऐसे लोगों का नेटवर्क खड़ा कर लिया है जो स्थानीय मुद्दों को उठाते हैं और उन पर चुनाव लड़ते हैं और प्रदर्शन भी आयोजित करते हैं. इसी वजह से रूस में सत्ताधारी लोग उन्हें अपने लिए ख़तरा मानने लगे हैं.
नवेलनी कौन हैं और वो क्या चाहते हैं?

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एलेक्सी नवेलनी एक विपक्षी कार्यकर्ता है जिन्होंने भ्रष्टाचार के कई बड़े मामलों की जांच की है और रूस के लोगों का ध्यान आकर्षित किया है. उनके यूट्यूब चैनल पर पोस्ट वीडियो को अब तक सौ करोड़ से अधिक बार देखा जा चुका है.
वो रूस की सबसे बड़े राजनीतिक दल पुतिन की पार्टी यूनाइटेड रशिया को ठगों और चोरों की पार्टी बताते हैं और उन्होंने हाल के सालों में कई फ़िल्में जारी कर उच्च स्तर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं.
कई सालों से नवेलनी रूस की राजनीति में अधिक पारदर्शिता की मांग और विपक्षी उम्मीदवारों को चुनाव में मदद करते रहे हैं. वो साल 2013 में मॉस्को के मेयर पद के लिए खड़े हुए थे और दूसरे नंबर पर आए थे. बाद में उन्होंने राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने की कोशिश की लेकिन आपराधिक मुक़दमों की वजह से उन पर रोक लगा दी गई. वो इन मुक़दमों को राजनीति से प्रेरित बताते हैं.
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अगस्त 2020 में नवेलनी साइबेरिया का दौरा कर रहे थे और एक और खोजी रिपोर्ट तैयार कर रहे थे. वो यहां स्थानीय चुनावों में विपक्षी उम्मीदवारों का प्रचार भी कर रहे थे. इस दौरान ही उन्हें ज़हर दिया गया. वो बाल-बाल बच गए.
बाद में उन्हें इलाज के लिए जर्मनी ले जाया गया जहां पता चला कि उन पर रूस में बने नर्व एजेंट नोविचोक से हमला किया गया था.
नवेलनी ने रूस की ख़ुफ़िया एजेंसियों पर ज़हर देने के आरोप लगाए. रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने रूस की ख़ुफ़िया आजेंसी एफ़एसबी के एक एजेंट को झांसे में लेकर हमले के बारे में जानकारियं भी जुटा लीं.
एक फ़ोन कॉल में जिसे नवेलनी ने रिकॉर्ड किया था और बाद में यूट्यूब पर पोस्ट भी किया था, एजेंट कोंस्टेंटिन कुदर्यावत्सेव ने उन्हें बताया था कि उनके अंडरपैंट में नोविचोक एजेंट रखा गया था.
रूस वापसी

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उन्हें चेताया गया था कि रूस लौटना उनके लिए सुरक्षित नहीं होगा, लेकिन नवेलनी ने किसी की नहीं सुनी और कहा कि वो राजनीतिक प्रवासी बनना पसंद नहीं करेंगे. वो बर्लिन से मॉस्को लौट आए.
उन्हें एयरपोर्ट पर ही हिरासत में ले लिया गया. पुलिस स्टेशन में बनी एक अस्थायी अदालत ने उन्हें दो फ़रवरी तक रिमांड पर रखा. नवेलनी और उनके समर्थक कहते हैं कि रूस में उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का मौका कभी नहीं मिलेगा. उन्होंने लोगों से सड़कों पर निकलकर प्रदर्शन करने और सरकार पर उनकी रिहाई के लिए दबाव बनाने की अपील की.
हिरासत में बंद नवेलनी का मुद्दा अब और बड़ा हो गया है. उनके जेल में रहते हुए उनकी टीम ने एक नई खोजी रिपोर्ट प्रकशित की है जो उनका अब तक का सबसे ज़्यादा देखा गया वीडियो भी हो गया है.
इसमें उन्होंने पुतिन का महल बताए जा रहे एक लग्ज़री घर के बारे में जानकारियां दी हैं और आरोप लगाया है कि पुतिन के दोस्तों ने ये आलीशान घर उनके लिए बनवा कर दिया है.

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इस खोजी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ये इमारत भ्रष्टाचार के धन से बनाई गई है जो पुतिन के करीबी लोगों ने इकट्ठा किया है. इनमें तेल से जुड़े उद्योगपति और रूसी अरबपति शामिल हैं. इस खोजी रिपोर्ट में महल के अंदर और बाहर की तस्वीरें दिखाई गई हैं. ये महल विशाल और शानदार है.
इस वीडियो को अब तक यूट्यूब पर दस करोड़ से अधिक बार देखा जा चुका है और ये रूस में टिकटॉक पर भी वायरल हो गया है.
क्या ये रूस में युवाओं का आंदोलन है?
ये स्पष्ट है कि इस आंदोलन में पैंतीस साल से कम उम्र के लोग अधिक शामिल हैं. ये वो पीढ़ी है जो पुतिन के 2000 में सत्ता में आने के बाद जवान हुई है.
एलेक्सी नवेलनी स्वयं 44 साल के हैं और उनकी टीम में युवा वॉलंटियर शामिल हैं. उनके समर्थकों की उम्र अलग-अलग है. इनमें से अधिकतर रूस के अलग-अलग इलाक़ों में काम करने वाले पेशेवर लोग हैं..

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टिकटॉक पर किशोरों ने बड़े पैमाने पर पुतिन के कथित महल की जांच के बारे में शेयर किया है ये अपने आप में महत्वपूर्ण है. इसका मतलब है कि देश की युवा आबादी नवेलनी के भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ संदेश 'डरों मत' से जुड़ रही है.
टिकटॉक पर वायरल हुए एक और वीडियो में एक स्कूल में एक छात्रा पुतिन के पोस्टर को फाड़ रही है.
आगे क्या?
राष्ट्रपति पुतिन ने कहा है कि नवेलनी की ताज़ा जांच फर्ज़ी है और उनके प्रेस सचिव ने भी प्रदर्शनों को कमतर करके आंका है.
लेकिन ऐसे संकेत हैं कि रूस में सत्ता चिंतित है.
शुरुआत में सरकार ने नवेलनी को खारिज किया और कहा कि अगर सरकार उन्हें मारना चाहती तो ये काम अब तक पूरा हो गया होता. रूस की सरकार ने नवेलनी को वापस मॉस्को लौटने से रोकने की हरसंभव कोशिश की और जैसे ही वो विमान से उतरे उन्हें पकड़कर जेल भेज दिया गया.
उन्हें जहां उतरना था उस एयरपोर्ट को अंतिम समय में बदल दिया गया और तुरंत दंगारोधी पुलिस तैनात कर दी गई. उन्हें गिरफ़्तार किए जाने के बाद जिस तरह प्रदर्शनों को कुचलने की कोशिश की गई उससे पता चलता है कि सरकार इस विपक्षी नेता को गंभीरता से ले रही है.

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नवेलनी का क्या किया जाए, अभी रूस में प्रशासन का यही बड़ा सिरदर्द है. यदि हिरासत में उन्हें कुछ हो जाता है तो और बड़े प्रदर्शनों और अंतरराष्ट्रीय आलोचना और प्रतिबंधों का ख़तरा है.
यदि उन्हें जेल में भी डाले रखा जाता है तो विपक्ष में लियूबोफ़ सोबोल जैसे नेता हैं जो निष्पक्ष स्थानीय और राष्ट्रीय चुनावों का मुद्दा उठा रहे हैं.
बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि विपक्ष को कितने लोग समर्थन देते हैं. यदि देशभर में लाखों लोग प्रदर्शन में शामिल होते हैं तो सरकार ये तर्क नहीं दे पाएगी कि पश्चिम प्रायोजित चुनिंदा गिने-चुने लोग ही प्रदर्शन कर रहे हैं.
जो भी है, नवेलनी और उनकी टीम ने वो कर दिखाया है जो कुछ दिनों पहले तक असंभव माना जाता रहा था. वो अब रूस के सरकारी मीडिया में दिखने लगे हैं. यूट्यूब और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफार्म के ज़रिए वो सीधे रूस में पुतिन की स्थिति को चुनौती दे रहे हैं.
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