नवेलनी मामला: पुतिन विरोधी नेता ने बताया, नोविचोक ज़हर से लड़ना कैसा था - बीबीसी स्पेशल

Alexei Navalny
    • Author, आंद्रे कोज़ेंको
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, रूसी सेवा

एलेक्सी नवेलनी को अब अस्पताल से छुट्टी मिल गई है. वे जर्मनी की राजधानी बर्लिन में अपने परिवार के साथ हैं. इस तस्वीर में आप उनकी पत्नी यूलिया और बेटे ज़ाखर को देख सकते हैं.

रूस के विपक्षी नेता और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के मुख्य आलोचक, 44 वर्षीय नवेलनी को 20 अगस्त की सुबह एक हवाई यात्रा के दौरान नोविचोक ज़हर दिया गया था.

नवेलनी के अनुसार, इस नर्व एजेंट - नोविचोक के असर से बाहर आना वाक़ई कष्टदायक था.

बीबीसी रूसी सेवा से बातचीत में उन्होंने कहा, "बहुत सी रातें बड़ी तकलीफ़ में, बिनी नींद के गुज़रीं, पर अब मैं बिल्कुल ठीक महसूस कर रहा हूँ." उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि 'वे आख़िरकार रूप वापस लौटेंगे.'

बीबीसी ने उनसे बर्लिन के एक होटल में मुलाक़ात की, जहाँ कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किये गए हैं.

ILYA AGEEV

इमेज स्रोत, ILYA AGEEV

इमेज कैप्शन, ज़हर दिये जाने से कुछ देर पहली की तस्वीर, जो नवेलनी के एक सहयोगी ने टोम्स्क हवाई अड्डे पर खींची थी

इससे पहले नवेलनी को बर्लिन के एक चैरिटी अस्पताल में रखा गया था. वे 32 दिन अस्पताल में भर्ती रहे, जिनमें से अधिकांश दिन उन्हें इंटेंसिव केयर यानी गहन देखभाल में रखा गया.

नवेलनी बताते हैं कि 'उन्हें ठिठुरना महसूस होती थी और शरीर में कोई दर्द नहीं था, पर लगता था कि अंत नज़दीक है.'

वे कहते हैं, "इसमें बिल्कुल दर्द नहीं होता. पर आपको महसूस होता है कि कुछ तो गड़बड़ है. और धीरे-धीरे ये बात मन में आने लगती है कि तुम मरने वाले हो."

नवेलनी ने 20 अगस्त को साइबेरिया के टॉम्स्क शहर से रूस की राजधानी मॉस्को के लिए फ़्लाइट ली थी. इसी फ़्लाइट में वे बेहोश होकर गिर पड़े थे और माना जाता है कि अगर विमान चालक ने ओम्स्क शहर में इमरजेंसी लैंडिंग ना की होती, तो नवेलनी का बचना मुश्किल होता.

एक अंदाज़े के अनुसार, ज़हर दिये जाने के क़रीब डेढ़ घंटे के भीतर ही नवेलनी को चिकित्सकीय-सहायता मिल गई थी जिसकी वजह से उनकी जान बच पायी.

इसके बाद, रूसी अधिकारियों से शीर्ष-स्तरीय वार्ता करके नवेलनी का परिवार उन्हें एयर-एंबुलेंस से बर्लिन ले जाने में सफल हो पाया था.

वीडियो कैप्शन, एलेक्सी नवेलनी के बारे में पूरी जानकारी

नोविचोक की पुष्टि

रासायनिक हथियारों के निषेध के लिए बने अंतर-सरकारी संगठन - ओपीसीडब्ल्यू यानी ऑर्गनाइज़ेशन फ़ॉर द प्रोहिबिशन ऑफ़ कैमिकल वैपन ने पुष्टि की है कि 'नवेलनी को नोविचोक नर्व एजेंट (ज़हर) ही दिया गया था.'

इस संगठन ने एक बयान में कहा है कि 'नवेलनी के पेशाब और ख़ून के नमूनों में इस प्रतिबंधित नर्व एजेंट के ट्रेस (सुराग़) मिले हैं.'

जर्मनी का कहना है कि फ़्रांस और स्वीडन की प्रयोगशालाओं ने भी माना है कि नवेलनी को नोविचोक नर्व एजेंट दिया गया.

सोवियत संघ के वैज्ञानिकों ने शीत युद्ध के दौरान इस 'बेहद ज़हरीले' नोविचोक नर्व एजेंट को विकसित किया था. यह इतना ज़हरीला होता है कि इसकी बहुत थोड़ी मात्रा भी जानलेवा साबित हो सकती है.

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद, अपने पहले वीडियो इंटरव्यू में नवेलनी ने कहा कि उन्हें लगता है कि रूसी प्रशासन को उनसे ख़तरा है कि अगले राष्ट्रपति चुनाव में वे कहीं पुतिन सरकार के लिए ख़तरा ना बन जायें, इसलिए रास्ते से हटाने के लिए उन्हें रूसी प्रशासन ने ही ज़हर दिया.

हालांकि, रूस की सरकार अब तक इस तरह के सभी आरोपों का खंडन करती आई है और उसका कहना है कि नवेलनी को ज़हर दिये जाने में उसकी कोई भूमिका नहीं रही.

रूसी डॉक्टरों ने, जिन्होंने ओम्स्क में नवेलनी का इलाज किया था, उन्होंने कहा था कि 'उन्हें नवेलनी के शरीर से ज़हर दिये जाने के कोई संकेत नहीं मिले.'

German army emergency personnel

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इमेज कैप्शन, नवेलनी को जब रूस से एयरलिफ़्ट कर बर्लिन लाया गया था, तब वे कोमा में थे

राजनीतिक साज़िश?

एक जर्मन समाचार पत्रिका को दिये इंटरव्यू में पिछले सप्ताह नवेलनी ने कहा था, "मैं पूरे भरोसे से इस बात को कह सकता हूँ कि इस कृत्य के पीछे राष्ट्रपति पुतिन का हाथ है. वरना मुझे इसके पीछे कोई और कारण दिखाई ही नहीं देता."

साइबेरिया में चुनाव प्रचार करने के बाद ही नवेलनी बीमार पड़े थे. वो साइबेरिया में अपने उन सहयोगियों के लिए प्रचार करने गये थे जिन्होंने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई है.

वहाँ उन्होंने लोगों से अपील की थी कि भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले लोगों को स्थानीय परिषदों में चुनकर भेजना ज़रूरी है.

नवेलनी को पुतिन के मुखर विरोधियों में से एक माना जाता है. सोशल मीडिया पर उनके लाखों फॉलोअर हैं जिनके बीच वे भ्रष्टाचार के मुद्दे को लगातार उठाते रहते हैं. साथ ही वे पुतिन की पार्टी को 'लुटेरों की पार्टी' कहते हैं.

बीबीसी से बातचीत में नवेलनी ने कहा कि 'वे निर्वासन के जीवन को स्वीकार नहीं करेंगे.' उन्होंने कहा, "वो तो चाहते यही है कि मैं देश छोड़कर चला जाऊं. पर मैं ये होने नहीं दूंगा."

उन्होंने कहा, "मैं ख़तरे मोल लेना नहीं चाहता, पर मेरी लड़ाई की अपनी वजह है क्योंकि वो मेरा अपना देश है."

Alexei Navalny in Berlin with wife Yulia, 2 Oct 20
इमेज कैप्शन, हफ़्तों तक यूलिया यह सोचती रहीं कि उनके पति नवेलनी नोविचोक ज़हर को हरा पायेंगे या नहीं

ज़हर ने नवेलनी पर क्या असर डाला?

बीबीसी से बातचीत के दौरान, घटना वाले दिन को याद करते हुए नवेलनी ने बताया, ''जब ज़हर ने अपना असर करना शुरू किया तो मैं चीज़ों पर फ़ोकस नहीं कर पा रहा था. हालांकि, मेरे आसपास की चीज़ें मुझे धुंधली नहीं दिख रही थीं जिस तरह ज़्यादा शराब पीने पर दिखने लगती हैं. फिर भी उन पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो गया था.''

उन्होंने बताया कि यह स्थिति लंबे वक़्त तक रही.

नवेलनी के मुताबिक़, "लंबे वक़्त तक उन्हें मतिभ्रम होता रहा. वो यह सोचते रहे कि उनकी पत्नी यूलिया, उनके डॉक्टर और उनके सहयोगी लियोनिड वॉलकोव उनसे कह रहे हैं कि वे एक हादसे का शिकार हुए, जिसमें उन्होंने अपनी टांगें खो दीं और जल्द ही डॉक्टर उन्हें कृत्रिम टांगे लगायेंगे."

नवेलनी ने कहा कि 'इन विचारों ने उन्हें काफ़ी परेशान किया.'

उन्होंने कहा "नींद अब भी एक बड़ी परेशानी है. नींद बहुत कम आती है. नींद की गोलियाँ लिये बिना नींद नहीं आती. जबकि पहले मुझे ऐसी कोई परेशानी नहीं थी."

"मेरे हाथ अप्रत्याशित ढंग से कांपते हैं. चिकित्सक लगातार जाँच कर रहे हैं. कुछ जाँचें हुई हैं. पर शारीरिक तौर पर मैं तेज़ी से ठीक हो रहा हूँ. दिन में दो बार टहलने जाता हूँ. काफ़ी देर टहल पाता हूँ. फ़िलहाल, मेरे लिए सबसे मुश्किल काम कार में बैठना और कार से उतरना है."

उन्होंने इस बात पर थोड़ी राहत व्यक्त की कि उन्हें किसी तरह का दर्द नहीं है. लेकिन नोविचोक के कारण उन्हें मानसिक रूप से काफ़ी नुक़सान पहुँचा है और नसों पर ज़हर का प्रभाव पड़ने के कारण मासपेशियों की पकड़ भी कमज़ोर हुई है.

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