एलेक्सी नवेलनी: वो दो घंटे जिन्होंने पुतिन के इस धुर विरोधी की जान बचाई

Alexei Navalny

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    • Author, बीबीसी रूसी सेवा
    • पदनाम, मॉस्को

रूस के विपक्षी नेता एलेक्सी नवेलनी जर्मनी की राजधानी बर्लिन के एक अस्पताल में भर्ती हैं, वे अब भी कोमा में हैं और उनके डॉक्टरों ने बताया है कि उन्हें 'नोविचोक नर्व एजेंट' ज़हर दिया गया था.

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के मुख्य आलोचक, 44 वर्षीय नवेलनी की पिछले महीने साइबेरिया से मॉस्को की उड़ान के दौरान तबीयत ख़राब हो गई थी, जिसकी वजह से विमान को रास्ता बदलकर, रूस के ओम्स्क शहर में आपातकालीन उतरना पड़ा था.

इसके बाद नवेलनी को एयरलिफ़्ट कर जर्मनी ले जाया गया, जहाँ उनका इलाज हो रहा है.

बीबीसी ने साइबेरिया से मॉस्को की उस फ़्लाइट में मौजूद चालक दल के सदस्यों और मेडिकल टीम के लोगों से बात करके यह समझने की कोशिश की है कि 'आख़िर उस दिन हुआ क्या था?' और महज़ दो घंटे में किस नाटकीय ढंग से चीज़ें बदलती चली गईं.

उस सुबह क्या-क्या हुआ

यह 20 अगस्त की घटना है. एलेक्सी नवेलनी ने रूस के टॉम्स्क शहर से मॉस्को की फ़्लाइट पकड़ी थी. वह एस-7 एयरलाइंस थी.

उस सुबह उन्होंने कुछ नहीं खाया था. लेकिन नवेलनी की प्रेस सचिव कीरा यार्मिश के अनुसार उन्होंने फ़्लाइट से पहले सिर्फ़ एक चाय ली थी जो उन्होंने टॉम्स्क हवाई अड्डे से ख़रीदी थी.

Ilya Ageev with Alexei Navalny before the flight

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फ़्लाइट में सफ़र कर रहे एक अन्य यात्री, इल्या अगीव ने नवेलनी को फ़्लाइट से क़रीब एक घंटा पहले वो चाय पीते देखा था.

अगीव के अनुसार, नवेलनी बिल्कुल सामान्य दिख रहे थे, वे मज़ाक कर रहे थे और हवाई अड्डे पर उन्हें पहचान रहे लोगों को देखकर वे स्माइल कर रहे थे.

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उड़ान के पहले आधे घंटे में ही नवेलनी अस्वस्थ महसूस करने लगे थे.

विमान में चालक दल के सदस्य यात्रियों को पानी दे रहे थे, लेकिन नवेलनी ने उसके लिए मना किया. कुछ वक़्त में ही वे अपनी सीट से उठे और शौचालय की ओर बढ़े.

08:30

फ़्लाइट में एक और यात्री शौचालय का प्रयोग करना चाहता था, लेकिन नवेलनी क़रीब 20 मिनट से शौचालय में थे.

कुछ देर में ही शौचालय के बाहर इंतज़ार करते लोगों की भीड़ दिखाई देने लगी और तब तक चालक दल को यह समझ आ गया कि उनके एक यात्री की तबीयत ठीक नहीं है.

09:00

कुछ ही मिनटों बाद, फ़्लाइट में घोषणा की गई कि क्या विमान में कोई डॉक्टर सवार है? तब तक अन्य यात्रियों को भी समझ आने लगा कि स्थिति वाक़ई गंभीर है.

चालक दल ने इस स्थिति के बारे में विमान के पायलट को पहले ही सूचित कर दिया था, लेकिन घोषणा के बाद उन्होंने नवेलनी को मेडिकल सहायता देनी की कोशिश शुरू की.

नवेलनी के सहायक, इल्या पाखोमोव फ़्लाइट में लोगों से अपील कर रहे थे कि अगर कोई मेडिकल का जानकार है, तो कृपया आगे आए. इस बीच एक महिला, जिनकी पहचान नहीं की जा सकी, आगे आईं और उन्होंने दावा किया कि वो एक नर्स हैं.

अगले क़रीब एक घंटे तक वो महिला नर्स और विमान का चालक दल, नवेलनी को होश में रखने की तमाम कोशिशें करता रहा. एस-7 एयरलाइंस के अनुसार, चालक दल नवेलनी को होश में रखने की कोशिशें तब तक करता रहा, जब तक पायलट ने विमान की 'इमरजेंसी लैंडिंग' नहीं की.

'वो बात नहीं कर रहे थे, बस चिल्ला रहे थे'

सर्गेई नेगेनेट्स पेशे से एक वकील हैं, वो विमान में पीछे की उस सीट पर बैठे थे, जहाँ नवेलनी के उपचार की कोशिश की जा रही थी.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "जब फ़्लाइट अटेंडेंट ने पूछा कि क्या विमान में कोई डॉक्टर है, तो मेरा ध्यान उस अफ़रा-तफ़री की ओर गया. कुछ ही मिनट बाद, पायलट ने घोषणा की कि हम ओम्स्क शहर में उतरने वाले हैं, जबकि हमारी फ़्लाइट मॉस्को की थी. बताया गया कि एक यात्री की तबीयत बिगड़ने के कारण ऐसा किया जा रहा है. फ़्लाइट के उतरने के बाद जब मैंने ट्विटर पर चेक किया और उनकी प्रवक्ता की पोस्ट देखी, तो समझ आया कि बीमार शख़्स नवेलनी हैं."

सर्गेई ने बताया, "फ़्लाइट के दौरान नवेलनी दर्द से चिल्ला रहे थे. उन्हें देखकर लग रहा था कि वे बहुत दर्द में हैं. वे नीचे लेटे हुए थे. विमान में जहाँ चालक दल बैठता है, वे वहाँ पर थे. वे इतने दर्द में थे कि उनके मुँह से कोई शब्द नहीं निकल रहा था - वे बस चिल्ला रहे थे."

Ambulance on the runway at Omsk airport

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विमान में उस नर्स के मदद के लिए आगे आने पर क्या हुआ, इस बारे में सर्गेई ने बताया, "मुझे नहीं पता कि वे क्या कर रहे थे. मैं उन्हें देख नहीं पाया. लेकिन मैं उन्हें सुन पा रहा था. वो लगातार कह रहे थे- एलेक्सी इसे पियो, इसे पीने की कोशिश करो, प्लीज़ थोड़ी कोशिश करो. साँस लेते रहो."

"नवेलनी का चिल्लाना विमान में ज़्यादातर लोगों को बेहतर लग रहा होगा, क्योंकि हमें यह संतोष था कि वे कम से कम ज़िंदा तो हैं. जबकि उस वक़्त तक मुझे नहीं पता था कि वे नवेलनी हैं."

उन्होंने बताया कि नवेलनी के दो सहायक उनके पास ही खड़े थे, जिनमें से एक थीं उनकी प्रेस सचिव कीरा यार्मिश.

उन्होंने बताया, "उनकी सहायक बहुत घबराई हुई थीं. उनसे पूछा गया कि इन्हें क्या हुआ तो उन्होंने जवाब दिया कि शायद किसी ने ज़हर दिया है."

08:20

एयरलाइन कंपनी के अनुसार, जैसे ही चालक दल ने ओम्स्क में इमरजेंसी लैंडिंग की अनुमति माँगी, उन्हें अनुमति दी गई.

क़रीब 30 मिनट में विमान रास्ता बदलकर ओम्स्क शहर में उतर गया.

हालाँकि चालक दल के सदस्य लगातार खिड़की से बाहर देखते रहे और ये कहते रहे कि 'बादलों की वजह से सामान्य से अधिक वक़्त लग रहा है.'

सर्गेई ने बताया कि नवेलनी को पानी पीने में ज़रूर दिक़्क़त हो रही थी, लेकिन उन्होंने विमान में उल्टी नहीं की.

ओम्स्क हवाई अड्डे के चीफ़ डॉक्टर वासिली सिदोरस ने भी इस बात की पुष्टि की थी कि 'जो कुछ नवेलनी को दिया गया, वो उनके पेट में ही है.'

Photo taken from the plane

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जानकारों की राय है कि अगर नवेलनी को 'नोविचोक नर्व एजेंट' ही दिया गया, जैसा कि जर्मन दावा कर रहे हैं, तो नवेलनी के विमान में उल्टी करने से कई लोगों पर इसका असर हो सकता था. या उन पर जो उस उल्टी को साफ़ करते.

बहरहाल, ओम्स्क के समयानुसार सुबह 9 बजकर एक मिनट पर विमान वहाँ लैंड कर गया था.

09:01

सर्गेई के अनुसार, सिर्फ़ दो मिनट के भीतर ही एयरपोर्ट की मेडिकल टीम विमान में पहुँच गई थी और जैसे ही उस टीम ने नवेलनी को देखा, उन्होंने कहा- "इसे केस को हम नहीं संभाल पाएँगे, इन्हें तुरंत इन्टेंसिव केयर की ज़रूरत है."

इसके बाद आईसीयू एंबुलेंस को फ़ोन किया गया और उनसे कहा गया कि "एंबुलेंस को सीधे हवाई पट्टी पर खड़े विमान तक आने दिया जाए, क्योंकि मरीज़ की हालत बहुत नाज़ुक है."

सर्गेई के मुताबिक़, "एंबुलेंस को विमान तक पहुँचने में क़रीब 10 मिनट लगे और यह समय सभी को बहुत लंबा लग रहा था. इस बीच डॉक्टर ने नवेलनी का ब्लड प्रेशर चेक किया और उन्हें ड्रिप लगाई. लेकिन डॉक्टर जिस तरह काम कर रहे थे, उससे पता चल रहा था कि वे जानते हैं कि इनसे कुछ होने वाला नहीं है."

Ambulance on runway

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ओम्स्क हवाई अड्डे के चीफ़ डॉक्टर वासिली सिदोरस कहते हैं कि उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर नवेलनी का इलाज नहीं किया, दो घंटे में बहुत सी चीज़ें बदलीं, लेकिन उनकी टीम ने नवेलनी पर जितनी भी मेहनत की, उससे यक़ीनन उनकी जान बचने में थोड़ी मदद मिली होगी.

उन्होंने कहा, "सबसे बड़ी परेशानी थी कि नवेलनी कुछ भी बता नहीं पा रहे थे. वो बोल ही नहीं पा रहे थे. इसलिए किसी बड़े और बेहतर अस्पताल में उन्हें शिफ़्ट करना बहुत ज़रूरी था."

उस विमान के जिन यात्रियों से बीबीसी ने बात की, सभी ने बताया कि एयरपोर्ट की मेडिकल टीम ने विमान में क़रीब 15-20 मिनट तक नवेलनी का निरीक्षण किया.

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इसके बाद उन्हें स्ट्रेचर पर रखकर एंबुलेंस में शिफ़्ट किया गया और सीधे ओम्स्क इमरजेंसी अस्पताल ले जाया गया.

विमान के यात्रियों ने बीबीसी को बताया कि इस बीच ओम्स्क एयरपोर्ट पर विमान में ईंधन डाला गया और क़रीब 30 मिनट बाद विमान ने मॉस्को तक की अपनी बाक़ी यात्रा शुरू की.

Airport staff on the plane

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सर्गेई नेगेनेट्स ने बीबीसी को बताया कि "जब हमारा विमान मॉस्को हवाई अड्डे पर उतरा, तो कुछ पुलिसवाले और सादे कपड़े पहने लोग विमान में चढ़े."

"उन्होंने यात्रियों से पूछा कि नवेलनी के पास वाली सीटों पर कौन-कौन बैठे थे और उनसे विमान में ही रुकने को कहा गया. जबकि बाक़ी यात्रियों को विमान से उतरने दिया गया. एलेक्सी विमान के लगभग बीच में, 10वीं या 11वीं पंक्ति में बैठे थे. कुछ यात्रियों को विमान में पुलिस का चढ़ आना बहुत अजीब लगा था, क्योंकि तब तक किसी ने सोचा नहीं था कि ये मामला आपराधिक भी हो सकता है. पर सुरक्षा सेवाएँ सक्रिय थीं."

'नवेलनी को नोविचोक दिया गया'

क़रीब दो दिन तक, ओम्स्क के अस्पताल में नवेलनी को पॉयज़निंग डिपार्टमेंट में रखा गया था. शुरू में अस्पताल ने नवेलनी को यह कहते हुए जर्मनी ले जाने की इजाज़त नहीं दी थी कि उनकी स्थिति बहुत ज़्यादा नाज़ुक है और यात्रा उनके लिए ख़तरनाक साबित हो सकती है.

वीडियो कैप्शन, एलेक्सी नवेल्नी कौन हैं, जिन्हें 'ज़हर' दिया गया?

लेकिन 22 अगस्त को उन्हें एक चार्टेड एयर एंबुलेंस की मदद से बर्लिन ले जाया गया और दो दिन बाद जर्मन डॉक्टरों ने कहा कि 'नवेलनी के ब्लड टेस्ट इस बात की पुष्टि करते हैं कि उन्हें ज़हर दिया गया.'

जबकि ओम्स्क इमरजेंसी अस्पताल के डॉक्टर और टॉक्सीकोलॉजी विभाग के प्रमुख भी इस बात पर अड़े थे कि 'नवेलनी के शरीर में ज़हर के कोई सबूत नहीं मिले.'

उनके अनुसार, मेटाबॉलिक डिसॉर्डर के कारण नवेलनी विमान में बीमार पड़े थे.

बीबीसी ने ओम्स्क अस्पताल के प्रबंधन से अब इस मामले पर टिप्पणी माँगी थी और उनसे पूछा था कि क्या वो नवेलनी के दो दिन के इलाज के बारे में कुछ जानकारी दे सकते हैं, तो अस्पताल ने इसका कोई जवाब नहीं दिया.

(रिपोर्टिंग में एना पुश्कारस्काया, एलीना बेर्दनीकोवा, तेमुर साज़ानोव, एंड्री सोश्नीकोव और सेनिया चुरमानोवा ने सहयोग किया.)

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