अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान: किस बात पर एकमत हैं भारत, पाकिस्तान, चीन और अमेरिका

अमेरिका और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों के साथ भारत और चीन समेत 12 देशों ने फ़ैसला किया है कि वे अफ़ग़ानिस्तान में बंदूक के सहारे आने वाली किसी भी सरकार को मान्यता नहीं देंगे.
अफ़ग़ानिस्तान में चल रहे गृह युद्ध में तालिबान को तेज़ी से मिल रही सफलता के बीच ये बयान आया है.
अफ़ग़ानिस्तान में बिगड़ते सुरक्षा हालात पर क़तर की राजधानी दोहा में एक क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें अमेरिका, क़तर, संयुक्त राष्ट्र, चीन, उज़्बेकिस्तान, पाकिस्तान, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, जर्मनी, भारत, नॉर्वे, ताजिकिस्तान, तुर्की और तुर्कमेनिस्तान के प्रतिनिधि शामिल हुए.

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अमेरिका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने संवाददाताओं को बताया, "हिस्सा लेने वाले इस बात पर सहमत थे कि सबसे पहले शांति प्रक्रिया को तेज़ करने की ज़रूरत है. इस बात पर भी सहमति बनी कि हिस्सा लेने वाले सभी देश, सैन्य बल के ज़रिए बनने वाली किसी भी सरकार को मान्यता नहीं देंगे."
तालिबान की जीत का सिलसिला जारी
अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान एक के बाद एक अहम शहरों पर क़ब्ज़ा करते जा रहे हैं. अब हेरात और कंधार जैसे बड़े शहर भी तालिबान के नियंत्रण में हैं.
कंधार अफ़ग़ानिस्तान का दूसरा बड़ा शहर है और नब्बे के दशक में तालिबान का गढ़ रह चुका है. एक बार फिर सामरिक नज़रिए से अहम शहर विद्रोहियों के पास है.
इसके अलावा सोशल मीडिया पर अफ़वाहों का बाज़ार गर्म हैं. कुछ वरिष्ठ अफ़ग़ान पत्रकार, काबुल की हुकूमत के साथ रहे कमांडरो के पाला बदलने की भी बात कर रहे हैं.
काबुल से कुछ बड़े मंत्रियों के देश छोड़ने के बारे में भी ख़बरें आ रही हैं. हालाँकि बीबीसी इनमें से किसी की भी पुष्टि नहीं करता.
अमेरिका के अफ़ग़ानिस्तान छोड़ने के कुछ हफ़्तों के भीतर ही, अफ़ग़ानिस्तान की मौजूदा सरकार कमज़ोर पड़ती दिख रही है.

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'तुरंत छोड़ें अफ़ग़ानिस्तान'
अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी दूतावास ने गुरुवार को एक सुरक्षा अलर्ट जारी किया, जिसमें अमेरिकियों से "तुरंत अफ़ग़ानिस्तान छोड़ने" का आग्रह किया गया.
इससे साफ़ है कि अमेरिकी आकलन में भी तालिबान सरकारी सेना पर भारी पड़ता दिख रहा है.
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटगान के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा है कि दूतावास के स्टाफ़ को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए अमेरिका सैनिक भेजेगा.
किर्बी ने पत्रकारों को बताया कि आर्मी और मरीन फ़ोर्स के सैनिक अगले दो दिन में अफ़ग़ानिस्तान में प्रवेश करेंगे.
हालाँकि सारा स्टाफ़ दूतावास नहीं छोड़ रहा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि दूतावास में कामकाज जारी रहेगा.

दोहा में आम सहमति
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने पत्रकारों को बताया, "तो यह केवल अमेरिका ही नहीं कह रहा. यही विचार अंतरराष्ट्रीय समुदाय का भी है. आज उभरी आम सहमति में प्रतिनिधित्व करने वाले सभी देश यही मानते हैं. बंदूक की नोक पर हासिल की गई सत्ता को मान्यता नहीं दी जाएगी. ऐसी किसी भी सरकार को अंतरराष्ट्रीय मदद नहीं मिलेगी."
अमेरिकी प्रवक्ता ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच इस विषय पर कई हफ़्तों और महीनों बातचीत हुई और अब एक आवाज़ में इसकी राय का इज़हार किया गया है.
अमेरिका का कहना है कि पिछले हफ़्ते संयुक्त राष्ट्र ने भी एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें साफ़ कहा गया है कि अफ़ग़ान समस्या का कोई सैनिक हल नहीं है और यूएन इस्लामी अमीरात की स्थापना की वापसी का समर्थन नहीं करता.
भारत की चिंताएँ
क़तर की दोहा में हुई इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्रालय में पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान-ईरान डिवीजन के संयुक्त सचिव जेपी सिंह ने किया.
भारत ने गुरुवार को कहा कि अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति चिंता का विषय है और वो हिंसा को रोकने के लिए व्यापक युद्धविराम की उम्मीद कर रहा है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने यह भी कहा कि भारत अफ़ग़ानिस्तान में सभी पक्षों के संपर्क में है और संघर्षग्रस्त देश में ज़मीनी स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहा है.
प्रवक्ता ने ये भी कहा कि फ़िलहाल काबुल में भारतीय दूतावास को बंद करने की कोई योजना नहीं है.

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ग़ौरतलब है कि भारत के अफ़ग़ानिस्तान में कई वाणिज्यिक दूतावास हैं जिनमें कंधार समेत कुछ को बंद कर दिया गया है.
अरिंदम बागची ने कहा, "ऐसी ख़बरें आई थीं कि हम दूतावास बंद कर रहे हैं. ये सही नहीं है. ये महज़ क़यास हैं. हम हालात का नदज़ीकी से जायज़ा ले रहे हैं लेकिन ऐसी कोई योजना नहीं."
अमेरिकी मीडिया में छपी ख़बरों के मुताबिक अफ़ग़ानिस्तान के बारे में अमेरिकी तेज़ी से आकलन बदल रहा है.
अमेरिकी सैन्य खुफिया आकलन से पता चलता है कि काबुल 30 दिनों के भीतर विद्रोहियों के नियंत्रण में आ सकता है और अगर मौजूदा रुझान जारी रहता है, तो तालिबान कुछ महीनों के भीतर देश पर पूरा कब्ज़ा हासिल कर सकता है.
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