वो 6 केस जो ट्रंप के ख़िलाफ़ आम नागरिक बनते ही हो सकते हैं शुरू

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- Author, जोशुआ नेवेट
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
अमेरिकी राष्ट्रपति पद पर रहते हुए डोनाल्ड ट्रंप को क़ानूनी मामलों से सुरक्षा मिली हुई थी लेकिन 2020 का राष्ट्रपति चुनाव हारने के बाद वो एक आम नागरिक दोबारा बन जाएंगे.
इसका मतलब यह हुआ कि राष्ट्रपति को मिलने वाले विशेषाधिकार का वो इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे.
पूर्व अमेरिकी फ़ेडरल और न्यूयॉर्क राज्य अभियोजक डेनियल आर. अलोन्सो कहते हैं, "जब वो दफ़्तर से बाहर होंगे तो माहौल बदल जाएगा. जांच में अड़ंगा डालने में राष्ट्रपति की ताक़तों का ख़तरा अब नहीं होगा."
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के ख़िलाफ़ धोखाधड़ी से लेकर यौन उत्पीड़न के मामलों की एक फ़ेहरिस्त है.
आइये यहां जानते हैं कि ऐसे वो कौन छह मामले हैं जो आगे बड़ी क़ानूनी लड़ाई का रूप ले सकते हैं.
1) मुंह बंद रखने के लिए पैसे देने का मामला

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प्लेबॉय मॉडल केरन मैकडूगल और एडल्ट फ़िल्म अभिनेत्री स्टॉर्मी डेनियल्स दोनों का मामला काफ़ी चर्चित रहा है. दोनों ही महिलाओं ने आरोप लगाए थे कि उनके ट्रंप के साथ शारीरिक संबंध थे और 2016 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले उन्हें मुंह बंद रखने के पैसे दिए गए थे.
2018 में जब उन्होंने यह दावा किया उसके बाद ट्रंप के ख़िलाफ़ राजनीतिक विरोधियों का हमला तेज़ हो गया और दो आपराधिक जांच शुरू हुईं.
पहला मामला ट्रंप के पूर्व व्यक्तिगत वकील माइकल कोहेन पर केंद्रित था. उन पर आरोप था कि उन्होंने फ़ेडरल या राष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन किया है.
जांच के दौरान कोहेन ने स्वीकार किया कि दो महिलाओं के लिए उन्होंने पैसों का भुगतान किया था. इन भुगतानों को चुनावी अभियान के वित्तीय नियमों का उल्लंघन पाया गया और 2018 में कोहेन को तीन साल की जेल हुई.
कोहेन ने आरोप लगाया कि उन्हें ट्रंप ने यह भुगतान करने के 'निर्देश' दिए थे.
ट्रंप के ख़िलाफ़ आरोपों को साबित करने के लिए अभियोजकों के पास सुबूत की ज़रूरत थी और दूसरी बात अगर अभियोजकों के पास सुबूत होता भी तो क़ानूनी विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला शुरू नहीं हो सकता था.

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इसका अर्थ यह समझा जाए कि मामला बंद हो चुका है? लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं है क्योंकि यह अब थोड़ा पेचीदा हो गया है क्योंकि भुगतान से संबंधित दूसरी आपराधिक जांच अभी जारी है.
मैनहेटन डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी साइरस वेंस इस बात की जांच कर रहे हैं कि कहीं ट्रंप ऑर्गनाइज़ेशन ने भुगतान के लिए रिकॉर्ड में हेरफेर तो नहीं किया था.
हालांकि, अभी तक यह मालूम नहीं है कि वेंस के पास आपराधिक मामला शुरू करने के लिए सुबूत हैं या नहीं.
अगर इन भुगतान में टैक्स फ़्रॉड जैसा अपराध बाहर आता है तो न्यूयॉर्क के क़ानून के हिसाब से इसमें कभी भी क़ानूनी कार्रवाई शुरू हो सकती है.

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2) टैक्स और बैंक धोखाधड़ी की जांच
अगस्त 2019 में वेंस ने ट्रंप ऑर्गनाइज़ेशन के ख़िलाफ़ जांच शुरू की थी जिसे ऑर्गनाइज़ेशन के वकील ने 'राजनीति से प्रेरित' बताया था.
वेंस ने उनसे दस्तावेज़ जारी करने को कहा था जो क़ानूनी रूप से मांगा जा सकता है. इसमें उन्होंने वितीय रिकॉर्ड के अलावा डोनाल्ड ट्रंप के आठ साल के टैक्स रिटर्न मांगे थे.
उसके बाद से ट्रंप ने इस क़ानूनी अधिकार को रोक रखा था और कोर्ट में इसे राजनीतिक उत्पीड़न बताया था.
अगस्त में टैक्स रिटर्न की मांग करते हुए वेंस ने इशारा किया था कि 'सार्वजनिक तौर पर ट्रंप ऑर्गनाइज़ेशन में लंबे आपराधिक आचरण की रिपोर्ट हैं', जिनमें इंश्योरेंस और बैंक फ़्रॉड शामिल हैं.
ऐसा अनुमान है कि ट्रंप सुप्रीम कोर्ट में टैक्स रिटर्न की मांग के ख़िलाफ़ अपील दायर कर सकते हैं. वहां पर यह मामला निपट सकता है लेकिन ट्रंप के ख़िलाफ़ मामला चलाने के लिए वेंस को टैक्स रिटर्न चाहिए होंगे.
3) रियल एस्टेट धोखाधड़ी की जांच

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न्यूयॉर्क अटॉर्नी जनरल लेटीशा जेम्स राष्ट्रपति ट्रंप की राह का एक दूसरा कांटा हैं.
मार्च 2019 से जेम्स की जांच ट्रंप ऑर्गनाइज़ेशन द्वारा की गई कथित रियल-एस्टेट धोखाधड़ी पर केंद्रित है.
यह जांच भी कोहेन के मामले से जाकर जुड़ती है. फ़रवरी 2019 में कोहेन ने अमेरिकी कांग्रेस से कहा था कि ट्रंप ने क़र्ज़ के लिए अपनी संपत्ति की क़ीमत को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया और अपना टैक्स कम करने के लिए क़ीमत को कम करके भी दिखाया.
कोहेन के बयान ने जेम्स को ट्रंप की संपत्ति के साम्राज्य की जानकारी देने की एक वजह दी लेकिन वेंस की ही तरह जेम्स इसके लिए क़ानूनी लड़ाई लड़ रही हैं.
लेटीशा जेम्स को अगर किसी अनियमितता के सुबूत मिलते हैं तो एक और आपराधिक जांच से इनकार नहीं किया जा सकता है.
4) परिलाभ मामले

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परिलाभ (Emolument) की परिभाषा के अनुसार, इसे सार्वजनिक कार्यालय या नौकरी से मिले लाभों के तौर पर देखा जाता है. लेकिन इसका ट्रंप से क्या लेना-देना है?
उन पर आरोप हैं कि उन्होंने अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान परिलाभ से जुड़े नियमों को तोड़ा है. अमेरिकी संविधान में इन नियमों को परिलाभ अनुच्छेद के तहत लिपिबद्ध किया गया है.
इस क़ानून के तहत राष्ट्रपति समेत सभी सरकारी कर्मचारियों को कोई भी विदेशी लाभ लेने से पहले कांग्रेस से सहमति लेनी होगी.
ट्रंप के ख़िलाफ़ सहमति न लेने के तीन क़ानूनी मामले हैं. इनमें से एक मामला विदेशी अधिकारियों को वॉशिंगटन डीसी में ट्रंप इंटरनेशनल होटल में ठहराने का मामला है.
ट्रंप ने इस अनुच्छेद की निंदा करते हुए कहा था कि बाक़ी राष्ट्रपतियों ने भी पैसा बनाया था.
संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के ख़िलाफ़ यह क़ानूनी मामला बनना बहुत मुश्किल है. हालांकि, ऐसा माना जा रहा है कि ट्रंप जब भी दफ़्तर छोड़ेंगे यह विवाद का विषय बनेगा.
5) यौन दुराचार के मुक़द्दमे

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डोनाल्ड ट्रंप पर कई महिलाओं ने यौन दुराचार के आरोप लगाए थे और ये मामले कई दशकों के बीच हुए हैं. ट्रंप ने सभी आरोपों को ख़ारिज करते हुए इन्हें 'फ़ेक न्यूज़' और साज़िश बताया था.
2016 में ट्रंप की जीत के बाद अधिकतर आरोप लगाए गए थे और ट्रंप ने उन पर केस करने की बात की थी लेकिन उन्होंने वो अभी तक नहीं किया है.
इनमें से कई आरोप लगाने वाली महिलाओं ने ट्रंप पर मुक़द्दमा कर दिया. इनमें दो महिलाओं ने मानहानि का मुक़द्दमा किया क्योंकि ट्रंप ने उन्हें झूठा कहा था.
एल पत्रिका में लंबे समय तक स्तंभकार रहीं ई. जीन कैरल भी उनमें से एक हैं. उन्होंने ट्रंप पर आरोप लगाया था कि 1990 में मैनहेटन के एक लग्ज़री डिपार्टमेंट स्टोर के ड्रेसिंग रूम में उन्होंने उनका रेप किया था. ट्रंप ने इसको ख़ारिज किया था.
कैरल ने ट्रंप पर मानहानि का मुक़द्दमा किया हुआ है जो सितंबर से ट्रंप और उनके बीच चल रहा था लेकिन उसके बाद अमेरिका के न्याय विभाग ने इसमें दख़ल दिया और ट्रंप की जगह अमेरिका को प्रतिवादी बना दिया.
इसके बाद फ़ेडरल जज ने विभाग के ख़िलाफ़ फ़ैसला देते हुए कहा कि इसमें आरोपों का अमेरिका से कोई संबंध नहीं है.
यह केस आगे बढ़ सकता है क्योंकि इसमें कैरल के वकील को सुबूत इकट्ठा करने को कहा गया है.

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वहीं, एक दूसरा मुक़द्दमा समर ज़ेरवॉस का है. समर ट्रंप के टीवी शो 'द अप्रेंटिस' की एक पूर्व प्रतियोगी हैं.
उनका आरोप है कि ट्रंप ने 2007 में बेवर्ली हिल्स होटल में नौकरी की बातचीत के दौरान उनका यौन उत्पीड़न किया.
ट्रंप ने इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा कि वो यह सब शोहरत के लिए कह रही हैं. समर ने 2017 में उनके ख़िलाफ़ मानहानि का मामला दायर करते हुए कम से कम 3,000 डॉलर मुआवज़े की मांग की.
6) मैरी ट्रंप मुक़द्दमा
मैरी ट्रंप द्वारा अपने चाचा डोनाल्ड ट्रंप के ख़िलाफ़ दायर किए गए मुक़द्दमे की पहली लाइन है, "धोखेबाज़ी इस परिवार का व्यापार ही नहीं बल्कि जीने का एक तरीक़ा है."
मैरी ट्रंप ने अपनी किताब में अपने चाचा को 'आत्ममुग्ध' बताया था जिसने हर अमेरिकी की जान को ख़तरे में डाल दिया है.
मैरी ने राष्ट्रपति ट्रंप और उनके दो भाई-बहनों के ख़िलाफ़ उनकी पारिवारिक संपत्ति को लेकर उन्हें धोखा देने का आरोप लगाया था.

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उनका कहना है कि 1981 में जब उनके पिता और डोनाल्ड ट्रंप के छोटे भाई फ़्रेड ट्रंप जूनियर की 42 वर्ष की आयु में मौत हुई तब उनका परिवार के व्यापार में ख़ासा हिस्सा था. उस समय मैरी 16 वर्ष की थीं.
मुक़द्दमे में कहा गया है कि ट्रंप और उनके भाई-बहन मैरी के हित का ध्यान रखने के लिए प्रतिबद्ध थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और उनके फ़ंड्स की असली क़ीमत उन्हें नहीं दी.
इस क़ानूनी मुक़द्दमे में 5 लाख डॉलर के हर्जाने की मांग की गई है.
इन आरोपों पर व्हाइट हाउस ने कहा था कि मैरी के दावे 'झूठे' हैं लेकिन ट्रंप को अभी भी मुक़द्दमे का जवाब देना है.
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