अमेरिका चुनाव 2020: जो बाइडन का भारत से क्या कनेक्शन है?

जो बाइडन

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    • Author, मुरलीधरन विश्वनाथन
    • पदनाम, बीबीसी तमिल संवाददाता

अमेरिका की उपराष्ट्रपति चुनी गईं कमला हैरिस की जड़ें भारत के तमिलनाडु से जुड़ती हैं लेकिन क्या नव निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन का भी तमिलनाडु से कोई कनेक्शन है?

डेमोक्रेटिक पार्टी ने जब जो बाइडन को राष्ट्रपति पद और कमला हैरिस को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया था तब लंदन के किंग्स कॉलेज में विज़िटिंग प्रोफ़ेसर टिम वालासी-विलसे ने 'गेटवेहाउस डॉट इन' नाम की एक वेबसाइट पर प्रकाशित अपने एक लेख में संकेत दिया था कि बाइडन के परिजन भी चेन्नै में रहे हो सकते हैं.

अब जब बाइडन अमेरिका के राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं, टिम का लेख ध्यान खींच रहा है.

जो बाइडन जब अमरीका के उप-राष्ट्रपति के तौर पर जुलाई 2013 में मुंबई आए थे तब उन्होंने कहा था कि उनके पूर्वज इस शहर में रहे हैं. 2015 में वाशिंगटन डीसी में दिए एक भाषण में बाइडन ने बताया था कि उनके परदादा के पिता ईस्ड इंडिया कंपनी में कप्तान थे.

1972 में जब वो सीनेटर चुने गए थे तब मुंबई से लिखे गए एक पत्र में उन्हें ये जानकारी मिली थी.

पुराना दस्तावेज

जॉर्ज बाइडन के ही वंशज

जो बाइडन ने बताया था कि जिस व्यक्ति ने उन्हें ये पत्र भेजा था उसका नाम भी बाइडन ही है. उस समय उन्होंने इस पत्र पर बहुत ज़्यादा ध्यान नहीं दिया था. जो बाइडेन ने वाशिंगटन में की गई इस बातचीत में ये भी बताया था कि मुंबई शहर में बाइडन उपनाम के पांच लोग रहते हैं.

उन्होंने कहा था कि वो ईस्ट इंडिया कंपनी में कप्तान रहे जॉर्ज बाइडन के ही वंशज हैं.

टिम विलासे ने अपने लेख में इन्हीं सब बातों का विवरण दिया है. टिम विलासे का कहना है कि भारत में किसी बाइडन नाम के व्यक्ति का कोई रिकॉर्ड नहीं है. हालांकि वो ये ज़रूर कहते हैं कि विलियम हेनरी बाइडन और क्रिस्टोफ़र बाइडन नाम के दो लोगों ने ईस्ट इंडिया कंपनी में काम किया है.

टिम विलासे के मुताबिक विलियम हेनरी बाइडन और क्रिस्टोफ़र बाइडन भाई थे. उन्होंने इंग्लैंड से चीन जाने वाले एक जहाज़ पर चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी के तौर पर काम किया था.

चेन्नै के कैथेडरल में लगा पत्थर

भारत की यात्रा

उन दिनों में केप ऑफ़ गुड होप होते हुए भारत की यात्रा को बेहद ख़तरनाक माना जाता था. लेकिन इस यात्रा में जोख़िम के साथ ही मुनाफे की संभावना भी बहुत थी ऐसे में बहुत से लोगों की इसमें दिलचस्पी होती थी.

विलियम हेनरी बाइडन आगे बढ़ते-बढ़ते पहले जहाज़ एना रॉबर्टसन के कप्तान बने फिर गंगा और थालिया नाम के जहाजों पर कप्तान रहे. 51 साल की उम्र में उनका रंगून में निधन हो गया था.

क्रिस्टोफ़र बाइडन उनके बड़े भाई थे. वो चेन्नै में रहे और बहुत चर्चित व्यक्ति थे. 1807 में उन्होंने रॉयल जॉर्ज नाम के जहाज़ पर निचले स्तर से शुरुआत की और 1818 में वो एक अहम पद पर पहुंच गए.

साल 1821 में प्रिंसेस शेरले ऑफ़ वेल्स नाम के जहाज़ के कप्तान बन गए. बाद में वो रॉयल जार्ज के कप्तान भी रहे. उन्होंने 1819 में हैरिट फ्रीथ से शादी की थी. उनके दो बेटियां और एक बेटा था.

क़ब्र पर लगा पत्थर

बंबई और कोलंबो

वो 1930 में प्रिसेंस शेरले जहाज़ के कप्तान पद से रिटायर हो गए थे. वो लंदन के पास ब्लैकहीथ में जाकर बस गए थे और उन्होंने एक किताब भी लिखी थी. 41 साल की उम्र में ही रिटायर हो जाने वाले बाइडन ने विक्टरी नाम का एक जहाज़ ख़रीदा था और बंबई और कोलंबो की यात्रा की थी.

विक्ट्री बाइडन के लिए फ़ायदेमंद था या नहीं इसका विवरण उपलब्ध नहीं है. वो मार्कस केमडन नाम के जहाज़ में अपनी पत्नी और बेटियों के साथ चेन्नई पहुंचे थे. यात्रा के दौरान उनकी एक बेटी बीमार पड़ गई थी और उसकी मौत हो गई थी.

क्रिस्टोफ़र बाइडन चेन्नै पहुंचने के बाद शिपिंग इंडस्ट्री में मैनेजर बन गए थे. वो चेन्नई में 19 साल तक रहे और जहाजों की सुरक्षा से जुड़े सलाहकार रहे.

उन्होंने यात्राओं के दौरान मारे गए नाविकों की विधवाओं और पीछे छूट गए परिजनों के लिए परोपकारी काम भी करे.

वीडियो कैप्शन, जो बाइडन का भारत को लेकर रुख कैसा होगा?

1846 में उनके बेटे होराटियो भी चेन्नै आए गए और चेन्नै आर्टीलरी में कर्नल के पद पर रहे. क्रिस्टोफ़र बाइडन का चेन्नै में ही 25 फ़रवरी 1858 को निधन हो गया था और वो यहीं सेंट जॉर्ज कैथेडरल में दफ़न हैं. उनकी याद में कैथेडरल के भीतर एक पत्थर भी लगाया गया है.

उनकी पत्नी बाद में लंदन लौट गईं थीं और 1880 तक वहीं रहीं. उनसे जुड़े कुछ दस्तावेज़ कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में मौजूद हैं. क्रिस्टोफ़र बाइडन की किसी और पत्नी का कोई ज़िक्र नहीं है.

जैसा कि जो बाइडन ने कहा था, भारत में कोई जॉर्ज बाइडन नहीं है. टिम विलासे अपने लेख में कहते हैं कि अगर जो बाइडन का भारत में कभी कोई पूर्वज होगा तो वो क्रिस्टोफ़र बाइडन से ही जुड़ा होगा.

वीडियो कैप्शन, जो बाइडन को तुर्की और चीन ने अभी तक बधाई क्यों नहीं दी?

बीबीसी से बात करते हुए टिम विलासे ने बताया, "कुछ साल पहले मैंने चेन्नै कैथेडरल में लगे उस यादगार पत्थर की तस्वीर ली थी. मैं सोच रहा था कि क्या उनके और जो बाइडन के बीच कोई रिश्ता हो सकता है. फिर मुझे पता चला कि जो बाइडन ने ही एक बार कहा था कि उनके पूर्वज कभी ईस्ट इंडिया कपंनी में कप्तान थे. फिर मैंने इस बारे में और जानकारियां इकट्ठा करनी शुरू की. मैंने बहुत सी किताबों और दस्तावेज़ों को पढ़ा और पाया कि ऐसे दो लोग हैं जो इस विवरण में फिट बैठते हैं. ये थे विलियम बाइडन और क्रिस्टोफ़र बाइडन. जब मैंने क्रिस्टोफ़र बाइडन के बारे में पढ़ा तो पता चला कि उनके दिल में भारत और भारतीयों के लिए बहुत प्यार था और उन्हें यहां बहुत सम्मान भी मिला."

वीडियो कैप्शन, जो बाइडन के सामने क्या हैं चुनौतियां?

टिम कहते हैं, "जो बाइडन क्रिस्टोफ़र बाइडन पर गर्व कर सकते हैं. जब हम उनकी किताब पढ़ते हैं तो उनकी मानवता की झलक मिलती है. इससे पता चलता है कि एक ख़राब राजनीतिक व्यवस्था में भी अच्छे लोग हो सकते हैं. जो और क्रिस्टोफ़र के बीच जो भी रिश्ता हो, वो उन पर गर्व तो कर ही सकते हैं."

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