अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव कब और कहाँ जाकर ख़त्म होगा

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- Author, एंथनी ज़र्चर
- पदनाम, बीबीसी के उत्तर-अमेरिकी संवाददाता
बीबीसी के अनुमान के मुताबिक़, डेमोक्रैटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडन इस वर्ष का अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव जीत गये हैं, पर डोनाल्ड ट्रंप चुनाव के नतीजे स्वीकार नहीं कर रहे हैं.
उनकी बातों से ऐसा नहीं लग रहा कि 'उन्होंने नतीजों के मुताबिक़ चुनाव में हार मानी है.'
हालांकि, आंकड़े कुछ और ही कह रहे हैं. डोनाल्ड ट्रंप कई राज्यों में लाखों वोटों से पीछे हैं.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जनता के नतीजों को ना स्वीकारने से देश में एक असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
राष्ट्रपति ट्रंप का कार्यकाल 20 जनवरी को ख़त्म हो रहा है. ये उलझन अभी बनी हुई है कि चुनावी नतीजों के बाद भी पूरी तरह स्थिति कब तक साफ़ हो पायेगी.
ऐसे में जानते हैं कि अमेरिका के कुछ प्रमुख वर्ग इस अनिश्चितता की स्थिति को लेकर क्या कहते हैं.

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रिपब्लिकन नेता
क्या डोनाल्ड ट्रंप को नतीजे स्वीकार कर लेने चाहिए?
- अभी नहीं.
सीनेट मेजॉरिटी लीडर मिच मैक्कॉनल ने कहा, ''राष्ट्रपति के पास क़ानून के तहत आरोपों की जाँच की माँग करने और फिर से मतगणना का अनुरोध करने का पूरा अधिकार है.''
वास्तविकता
पिछले चार सालों में रिपब्लिकन नेताओं ने डोनाल्ड ट्रंप के विवादों पर उन्हें प्रतिक्रिया देने के लिए रणनीति तैयार कर ली है.
वो कम बोलते हैं और तूफ़ान के शांत होने का इंतज़ार करते हैं.
उनका सीधा-सा हिसाब है. कुछ रिपब्लिकन उस शख़्स की नाराज़गी को बाहर लाना चाहते हैं जो उंगलियाँ फिराकर अपना सारा ग़ुस्सा निकाल सकता है.
इसलिए राष्ट्रपति चुनाव में हार के बावजूद रिपब्लिकन एक तरफ़ खड़े होकर संतुष्ट हैं और राष्ट्रपति को ये ज़ोर लगाने दे रहे हैं कि वो 'वैध मतों' से जीते हैं.
ऐसा वो तब तक करेंगे जब तक कि छुट-पुट क़ानूनी चुनौतियाँ ख़त्म नहीं हो जातीं और चुनावी नतीजे प्रमाणित नहीं हो जाते.
रिपब्लिकन नेताओं को अपने भविष्य के बारे में भी सोचना है जिसमें आने-वाले डेमोक्रैटिक प्रशासन के साथ काम करना और आगे चुनावों के लिए मॉडरेट्स को जीतना शामिल है.
वो राष्ट्रपति की तरह अपना ही नुक़सान करने के पक्ष में नहीं हैं. उनकी राजनीति दिनों या हफ़्तों के आधार पर नहीं, बल्कि सालों-साल के आधार पर तय होती है.
इसलिए वो धैर्य रखना चाहते हैं. उन्होंने स्वीकार कर लिया है कि राष्ट्रपति के पास अपने दावे पेश करने का अधिकार है. उन्हें अपना ग़ुस्सा और निराशा बाहर निकालने का समय देना चाहिए.
इसलिए अपने शब्दों से ना सही, लेकिन अपने व्यवहार से उन्होंने ये स्वीकार कर लिया है कि जनवरी में नए राष्ट्रपति आयेंगे और डोनाल्ड ट्रंप को जाना होगा.

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अटॉर्नी जनरल बिल बार
क्या डोनाल्ड ट्रंप को नतीजे स्वीकार कर लेने चाहिए?
- जवाब स्पष्ट नहीं.
न्याय विभाग के ज्ञापन का हिस्सा: ''गंभीर आरोपों से बहुत सावधानी से निपटना चाहिए. अंदाज़े पर आधारित और अस्पष्ट दावे संघीय जाँच का आधार नहीं होने चाहिए.''
वास्तविकता
सोमवार को पारंपरिक प्रक्रिया से अलग हटते हुए अटॉर्नी जनरल बिल बार ने न्याय विभाग द्वार चुनावी धोखाधड़ी के आरोपों की तुरंत जाँच के लिए ज्ञापन (मेमोरेंडम) जारी किया है, जबकि इस तरह की जाँच राज्यों द्वारा चुनावी नतीजों को प्रमाणित करने के बाद की जाती है.
अटॉर्नी जनरल द्वारा इस संबंध में जारी किये गए ज्ञापन में डोनाल्ड ट्रंप की पुष्टि है कि सरकार कई राज्यों में व्यापक चुनावी गड़बड़ियों के अप्रमाणित दावों को देख रही है.
ऐसे कई राज्यों में डोनाल्ड ट्रंप 10 हज़ार से भी कम वोटों से हारे हैं. हालांकि, अटॉर्नी जनरल ने इस ज्ञापन में कई शर्तों और सावधानियों का ज़िक्र भी किया है.
इन शर्तों और सावधानियों के बावजूद भी अटॉर्नी जनरल का ज्ञापन डोनाल्ड ट्रंप और उनके समर्थकों की हिम्मत बढ़ाएगा.
आपराधिक जाँच में राजनीतिक दख़लअंदाज़ी को रोकने के लिए कुछ सुरक्षा उपाय बताये गए हैं, ख़ासतौर पर चुनावों के दौरान. लेकिन, बिल बार ने उनमें से कुछ सुरक्षा उपायों को हटा दिया है.
तो क्या ऐसा करना 'धोखाधड़ी के अपने दावों के समर्थन में ठोस प्रमाण ढूंढ रहे' राष्ट्रपति ट्रंप को शांत करने के लिए काफ़ी होगा?

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डोनाल्ड ट्रंप के नज़दीकी लोग
क्या डोनाल्ड ट्रंप को नतीजे स्वीकार कर लेने चाहिए?
- नहीं (शायद?)
ट्रंप की क़ानूनी सलाहकार जेना एलिस ने ट्वीट किया, ''मैंने अभी राष्ट्रपति ट्रंप से बात की और उनसे कहा कि वो मुझे बहुत पसंद हैं क्योंकि वे क़ानून, हमारे संविधान व अमेरिकी प्रणाली के साथ मज़बूती से खड़े हैं. मुझे उन पर गर्व है.''
वास्तविकता
सार्वजनिक तौर पर राष्ट्रपति ट्रंप के क़रीबी और सहयोगी - चुनावी नतीजों को चुनौती देने को लेकर उनके साथ खड़े हैं.
ख़ासतौर पर वो लोग जो लंबे समय से उनके साथ हैं, जैसे न्यूयॉर्क के पूर्व मेयर रूडी जूलियाने.
इसमें एक वास्तविकता ये भी है कि अगर डोनाल्ड ट्रंप अपने पद से हटते हैं तो ये लोग भी अपनी नौकरी खो बैठेंगे या पद पर रहते हुए भी शक्तिहीन हो जाएंगे.
डोनाल्ड ट्रंप के बेटे डोनाल्ड जूनियर और एरिक चिल्ला-चिल्लाकर बार-बार अपने पिता का बचाव कर रहे हैं और उनके 'चुनावी गड़बड़ी के आरोपों' का समर्थन कर रहे हैं क्योंकि इसमें उनके परिवार का नाम और ब्रांड दांव पर लगा है.
वहीं, राष्ट्रपति ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप इस मामले में ख़ामोश हैं.
ऐसी भी ख़बरें हैं कि इवांका और उनके पति मानते हैं कि ट्रंप को अपनी हार स्वीकार कर लेनी चाहिए.
इसी दौरान ट्रंप प्रशासन का जूनियर स्टाफ़ भी है जो कुछ महीनों में अपनी नौकरी खोने वाला है.
ये लोग एक तरह से बंध गए हैं क्योंकि डायरेक्टर ऑफ़ पर्सनेल जॉन मैकंटी ने उनसे कहा है कि 'अगर वो दूसरी नौकरी खोजते पाये गए तो उन्हें तुरंत नौकरी से निकाल दिया जाएगा.'
ट्रंप के समर्थक
क्या डोनाल्ड ट्रंप को नतीजे स्वीकार कर लेने चाहिए?
- बिल्कुल नहीं!
टेक्सास के ह्यूस्टन शहर में डोनाल्ड ट्रंप के एक समर्थक ने बीबीसी से बातचीत में कहा, ''मैं यहाँ हमारे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को प्यार देने और उनका समर्थन करने के लिए आया हूँ. चुनाव में पूरी तरह गड़बड़ी हुई है. ऐसे कई वोट हैं जो अभी तक गिने ही नहीं गये. ये सभी फ़र्ज़ी वोट हैं.''
वास्तविकता
चुनावों के नतीजे उम्मीद से अलग आने के बावजूद ट्रंप के समर्थक यह मानते हैं कि 'उनके नेता ने ही चुनाव जीता है.'
रॉयटर्स/इपसोस के इस सप्ताहांत में किये गए पोल के मुताबिक़, लगभग 40 प्रतिशत रिपब्लिकन ये नहीं मानते की जो बाइडन ने राष्ट्रपति चुनाव जीता है. (आम जनता के बीच ये आँकड़ा 21 प्रतिशत है.)
डोनाल्ड ट्रंप 'चोरी रोको' नाम से देशभर में एक कैंपेन करने की योजना बना रहे हैं.
ऐसी भी ख़बरें हैं कि वो आने वाले दिनों में चुनाव प्रचार के तरीक़े से रैली करने के बारे में सोच रहे हैं.
हालांकि, इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है. लेकिन, यह बात साफ़ है कि अगर ट्रंप लड़ने की इच्छा रखते हैं, तो उनके समर्थक उनका साथ देंगे.

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जो बाइडन
क्या डोनाल्ड ट्रंप को नतीजे स्वीकार कर लेने चाहिए?
- हाँ.
जो बाइडन कह चुके हैं, ''साफ़तौर पर कहूँ तो मुझे लगता है कि डोनाल्ड ट्रंप का हार स्वीकार ना करना, शर्मिंदगी की बात है. मैं इस मामले में नाप-तोल के कैसे बोल सकता हूँ?''
वास्तविकता
जब से जो बाइडन 2020 के चुनावों के विजेता बने हैं, उन्होंने और उनकी टीम ने सत्ता के शांति-पूर्वक हस्तांतरण का संदेश देने के लिए जो किया जाना चाहिए, वो किया है.
जो बाइडन ने सोमवार को कोरोना वायरस टास्क फ़ोर्स के साथ बैठक की और मंगलवार को पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया.
यहाँ उन्होंने आने वाले हफ़्तों में उच्च स्तरीय प्रशासनिक नियुक्तियाँ करने की घोषणा भी की.
जो बाइडन ने इन चिंताओं को ख़ारिज कर दिया कि चुनाव के नतीजे स्वीकार ना किये जाने से उनके काम पर कोई असर पड़ेगा.
नव-निर्वाचित राष्ट्रपति को सामान्य तौर पर दिये जाने वाले फ़ंड और सरकारी सूचनाओं को मिलने में देरी होना, कोई बड़ी समस्या नहीं है.
उन्होंने कहा कि 'रिपब्लिकंस भी उनकी जीत को स्वीकार कर लेंगे, भले ही उन्हें मौजूदा राष्ट्रपति डर दिखा रहे हैं.'
जो बाइडन और डोनाल्ड ट्रंप दोनों ही अपनी-अपनी बातों पर डटे हुए हैं और उनके वकील भी कोर्ट में चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तैयारी कर रहे हैं.

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डोनाल्ड ट्रंप
क्या डोनाल्ड ट्रंप को नतीजे स्वीकार कर लेने चाहिए?
जवाब के लिए उनका ट्वीट पढ़ें:
उन्होंने लिखा, ''लोग धोखाधड़ी वाले चुनाव को स्वीकार नहीं करेंगे!''
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वास्तविकता
सिर्फ़ डोनाल्ड ट्रंप ही जानते हैं कि कई राज्यों में लाखों वोटों से पीछे होने के बावजूद, वो जो बाइडन की जीत को स्वीकार क्यों नहीं कर रहे हैं.
आलोचकों का कहना है कि 'इस तरह विरोध करके डोनाल्ड ट्रंप अपने ऊपर हार का दाग़ नहीं लगने देना चाहते.' साथ ही वे अपने समर्थकों से मिलने वाले फ़ंड को भी जारी रखना चाहते हैं.

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हालांकि, आने वाले हफ़्तों में राज्यों द्वारा नतीजों को प्रमाणित करने के बाद जो बाइडन को इलेक्टोरल कॉलेज वोट्स में बहुमत मिल जायेगा.
14 दिसंबर को ये इलेक्टर्स अपने राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति को चुनने के लिए इकट्ठा होंगे. कांग्रेस की स्वीकृति के बाद जो बाइडन 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे और ट्रंप चाहें या ना चाहें, उन्हें राष्ट्रपति पद छोड़ना होगा.
हालांकि, वो 2024 का राष्ट्रपति चुनाव लड़ सकते हैं क्योंकि अमेरिका का संविधान उन्हें ऐसा करने से नहीं रोकेगा.
वो पार्टी में किंगमेकर की भूमिका भी निभा सकते हैं और अपने बच्चों के लिए रास्ता तैयार कर सकते हैं.
यही 2020 के चुनावों का अंत होगा, लेकिन राजनीतिक दांव हमेशा चले जाते रहेंगे.
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