अमेरिका चुनावः आख़िर वो घड़ी आ गई जिसका अमेरिकियों को डर था

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डोनाल्ड ट्रंप हफ़्तों से ये संकेत दे रहे थे कि अगर राष्ट्रपति चुनाव में क़रीबी मुक़ाबला रहा तो वे डेमोक्रैटिक पार्टी के अपने विरोधी पर वोटों की धोखाधड़ी और उनसे चुनावी जीत छीनने का इलज़ाम लगाएंगे.
बुधवार तड़के उन्होंने ठीक यही किया. जब लाखों वैध वोटों की गिनती बाक़ी थी, उन्होंने नतीजों की औपचारिक घोषणा से पहले ही अपनी जीत का ऐलान कर दिया.
ट्रंप ने दावा किया, "हम इस चुनाव को जीतने की तैयारी कर रहे थे. साफ़-साफ़ कहें तो हमने ये चुनाव जीत लिया था."
बिना कोई सबूत देते हुए उन्होंने ये संकेत दिया कि इन चुनावों में धोखाखड़ी हुई है.
उन्होंने कहा, "ये हमारे देश के साथ एक बड़ा धोखा है. हम चाहते हैं कि क़ानून को वाजिब तरीक़े से लागू किया जाए. हम अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में जाएंगे. वोटिंग ख़त्म होने के बाद वोट डालने नहीं दिया जा सकता."
'अपमानजनक, अभूतपूर्व, ग़लत'

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ट्रंप के बयान पर डेमोक्रैट्स के अलावा राष्ट्रपति के कुछ समर्थकों ने फ़ौरन प्रतिक्रिया दी.
ट्रंप के डेमोक्रैटिक प्रतिद्वंद्वी जो बाइडन ने कहा कि "जब तक सभी वोट गिन न लिए जाएं, चुनाव ख़त्म नहीं हुए हैं."
जो बाइडन ने ज़ोर देकर कहा, "हम जीत की राह पर आगे बढ़ रहे हैं."
'बाइडन फ़ॉर प्रेसीडेंट' कैम्पेन की मैनेजर जेन ओमैवी डिल्लन कहती हैं कि ट्रंप की टिप्पणी 'अपमानजनक, अभूतपूर्व और ग़लत' थी.
"ये अपमानजनक इसलिए था क्योंकि ये अमेरिका के नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों को छीनने की ये एक खुली कोशिश है."
"ये अभूतपूर्व इसलिए है क्योंकि इतिहास में पहले कभी अमेरिका के किसी राष्ट्रपति ने एक राष्ट्रीय चुनाव में अमेरिकी लोगों की आवाज़ छीनने की कोशिश नहीं की है."
कांग्रेस के लिए अपनी सीट से पुनर्निवाचित होने वाली डेमोक्रैटिक पार्टी की एलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कॉर्टेज़ ने ट्रंप के दावे की निंदा करते हुए इसे "अवैध, ख़तरनाक और दंबगई" क़रार दिया है.
उन्होंने ट्वीट किया, "मतों की गिनती कीजिए. नतीजों का आदर करें."
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यहां तक कि ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के अपने लोगों ने उनके दावे पर चिंता ज़ाहिर की है. इनमें पेन्सिलवेनिया के पूर्व सीनेटर रिक सैंटोरम भी हैं.
रिक सैंटोरम ने ट्रंप की टिप्पणी पर कहा है कि "वे बहुत चिंतित" थे. उन्होंने टेलीविज़न चैनल सीएनएन पर कहा, "धोखाधड़ी शब्द का इस्तेमाल.... मेरे ख्याल से ग़लत है."
कंज़र्वेटिव कमेंटेटर और राष्ट्रपति के आलोचक माने जाने वाले बेन शैपिरो ने ट्वीट किया कि ट्रंप की टिप्पणी "बेहद ग़ैर-ज़िम्मेदाराना" थी.
ट्रंप के बोलने के बाद उप राष्ट्रपति माइक पेंस ने उनकी टिप्पणी को थोड़ा हल्का बनाने की कोशिश की. उन्होंने जीत की घोषणा से इनकार किया और कहा कि सभी वैध मतों की गिनती की जाएगी.
'नुक़सान हो चुका है'

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लेकिन बीबीसी के उत्तरी अमेरिका में संवाददाता एंथनी जर्चर कहते हैं कि नुक़सान हो चुका है.
जर्चर के मुताबिक़, "आख़िरकार ट्रंप चाहे जीतें या हारें, उन्होंने इस चुनाव का मूड ख़राब कर दिया है क्योंकि उन्होंने अमेरिकी लोकतंत्र के तमाम हिस्सों पर सवाल खड़ा कर दिया है."
कोरोना महामारी के चलते बड़ी तादाद में अमेरिकी मतदाताओं ने पोस्टल बैलट या फिर शुरुआत में वोट करने का विकल्प चुना था. इससे मतों की गिनती में लगने वाला समय बढ़ गया.
कुछ राज्यों में तो अंतिम मतगणना के पूरे होने में कई दिन लग सकते हैं.
एंथनी जर्चर कहते हैं, "अमेरिकी चुनाव उस दौर में दाख़िल हो गया है जिसका बहुत से अमेरिकियों को डर था. जहां अमेरिका का राष्ट्रपति व्हाइट हाउस से ही बैलट वोट की गिनती की अहमियत को कम करके आंकेगे."
ट्रंप ये कह कर पहले ही विवादों में आ चुके हैं हैं कि वे चुनाव हारने की सूरत में नतीजे स्वीकार नहीं करेंगे.
उनके ऐसा कहने के कारण पिछले कुछ हफ़्तों से एक असामान्य क़िस्म की बहस को हवा मिली कि व्हाइट हाउस से अमेरिका के राष्ट्रपति को बाहर निकालने के लिए क्या सशस्त्र बल, सीक्रेट सर्विस या पुलिस बुलाई जा सकती है?
लंबी क़ानूनी लड़ाई के रास्ते पर...

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अमेरिका के राष्ट्रपति पद की रेस कौन जीतेगा? इसका फ़ैसला नॉर्थ कैरोलिना, नेवाडा, एरिज़ोना, विस्कॉन्सिन, मिशिगन, पेन्सिलवेनिया और जॉर्जिया के नतीजों पर निर्भर करता है.
किसी भी क़िस्म की क़ानूनी चुनौती पहले इन राज्यों की अदालत में दायर की जाएगी और उसके बाद ही मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा सकता है. अगर ऐसा हुआ तो साल 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव का नतीजा आधिकारिक रूप से सामने आने में कई दिन लग सकते हैं.
इस बीच डर इस बात को लेकर भी है कि ये अनिश्चितता कहीं विरोध प्रदर्शनों और झड़पों की शक्ल न अख़्तियार कर ले.
देश के कई हिस्सों में हिंसक झड़पें, तनावपूर्ण माहौल, विरोध प्रदर्शनों की ख़बरें आ भी रही हैं. यहां तक कि व्हाइट हाउस के सामने भी ऐसे प्रदर्शन हुए.
एंथनी जर्चर कहते हैं, "एक तरफ़ बाइडन ये दावा कर रहे हैं कि वे जीत की राह पर बढ़ रहे हैं तो दूसरी तरफ़ ट्रंप वोटिंग में धांधली के बेबुनियाद आरोपों का सहारा ले रहे हैं, जो कभी एक बुरे सपने की तरह लग रहा था, अब मानो हक़ीक़त में बदल रहा है."
"ये रास्ता एक कटुता भरी और लंबी क़ानूनी लड़ाई की तरफ़ जाता है. इसका नतीजा होगा कि हारने वाले पक्ष के समर्थकों को लगेगा कि वे ठगे गए हैं और उनमें नाराज़गी का एहसास होगा."
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