अज़रबैजान आर्मीनिया की लड़ाई के पीछे फ्रांस, तुर्की ने लगाया आरोप

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तुर्की और फ्रांस के बीच ताज़ा तनातनी नागोर्नो काराबाख़ को लेकर है. जो आर्मीनिया और अज़रबैजान के बीच एक विवादित इलाक़ा है.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस महीने तुर्की से ये समझाने के लिए कहा कि अज़रबैजान में जिहादी लड़ाके आ गए हैं से उसका क्या मतलब है और कहा, "हद पार हो गई है."
फ्रांस इस संघर्ष को सुलझाने के लिए बनी समिति का हिस्सा है, लेकिन तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने आरोप लगाया कि "मुसीबतों और अज़रबैजान में कब्ज़े के पीछे फ्रांस है."
उन्होंने फ्रांस से कहा, "आप मिन्स्क तिकड़ी में है. आपने अब तक क्या किया है? क्या आपने अज़रबैजान की ज़मीन को कब्ज़े से बचाया? नहीं. आपने सिर्फ आर्मीनिया में हथियार भेजे. आपको लगता है कि आर्मीनिया में आपके भेजे हथियारों से शांति आ जाएगी. आपको ऐसा नहीं लगता क्योंकि आप ईमानदार नहीं है."
नार्गोनो काराबाख़ की इस लड़ाई में तुर्की अज़रबैजान का समर्थन कर रहा है, जहां सितंबर के आख़िर में शुरू हुई लड़ाई के बाद सैंकड़ों लोग मारे गए हैं.
अर्दोआन ने कहा, "मैंने आज सुबह अज़रबैजान के राष्ट्रपति से बात की. हमारे अज़रबैजान के भाई अब कब्ज़े वाले क्षेत्र की तरफ बढ़ रहे हैं. वो उसे वापस हासिल करने की ओर बढ़ रहे हैं."

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इतना ही नहीं राष्ट्रपति अर्दोआन ने शनिवार को अपने फ्रांसीसी समकक्ष इमैनुएल मैक्रों की मुस्लिमों के प्रति नीतियों की आलोचना की और कहा कि उन्हें "अपने दिमागी की जांच कराने" की ज़रूरत है.
मैक्रों और अर्दोआन कई मसलों को लेकर आमने-सामने हैं जिनमें पूर्वी भूमध्य सागर में समुद्री अधिकारों को लेकर संघर्ष के अलावा लीबिया, सीरिया और सबसे हालिया अज़रबैजान और आर्मीनिया का मसला शामिल है.
अर्दोआन ने टीवी संबोधन में कहा, "एक देश के उस प्रमुख के बारे में कोई क्या कह सकता है जो दूसरे आस्था वाले समूह के लाखों सदस्यों के साथ ऐसा व्यवहार कर सकता है. सबसे पहले तो उन्हें अपने दिमाग की जांच करानी चाहिए."
कट्टरपंथी इस्लाम से अपने देश के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का बचाव करने के मैक्रों के प्रस्ताव ने तुर्की सरकार को नाराज़ कर दिया है. मैक्रों ने इस महीने इस्लाम को एक ऐसा धर्म बताया जो दुनियाभर में "संकट में" है और कहा कि सरकार 1905 के एक क़ानून को मज़बूत करने के लिए दिसंबर में एक बिल लाएगी. इस क़ानून ने आधिकारिक तौर पर फ्रांस में चर्च और स्टेट को अलग किया था.
साथ ही मैक्रों ने स्कूली शिक्षा पर सख़्ती से निगरानी करने और मस्जिदों की विदेशी फंडिंग पर बेहतर नियंत्रण करने की बात कही थी. तुर्की मुस्लिम बहुल आबादी वाला लेकिन धर्मनिरपेक्ष देश है. तुर्की नाटो का हिस्सा है, लेकिन यूरोपीय संघ का नहीं, जहां कई विवादों के चलते दशकों से उसकी सदस्यता पर बात नहीं बन पाई है.
अर्दोआन ने सवाल किया, "मैक्रों नाम के व्यक्ति को इस्लाम और मुस्लिमों से क्या समस्या है? मैक्रों को दिमागी इलाज की ज़रूरत है."
अर्दोआन ने ये अनुमान भी लगाया कि मैक्रों 2022 के फ्रांस राष्ट्रपति पद के चुनाव में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे.
तुर्की के नेता ने कहा, "आप लगातार अर्दोआन का नाम लेते रहते हैं. इससे आपको कुछ हासिल नहीं होगा."
अर्दोआन ने कहा, "(फ्रांस में) चुनाव होंगे. हम देखेंगे कि आपका क्या होता है. मुझे नहीं लगता कि वो ज़्यादा आगे जाएंगे. क्यों? उन्होंने फ्रांस के लिए कुछ हासिल नहीं किया है और उन्हें ख़ुद के लिए करना चाहिए."

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ईरान ने सीमा पर सुरक्षा बढ़ाई
नागोर्नो-काराबाख को लेकर आर्मीनिया और अजरबैजान के बीच छिड़ी लड़ाई के बीच ईरान ने अपनी उत्तरी सीमाओं पर सुरक्षा इंतज़ाम बढ़ा दिए हैं.
फार्स न्यूज एजेंसी ने ईरान के बोर्डर गार्ड्स कमांडर ब्रिगेडियर जनरल अहमद अली गौदार्ज़ी के हवाले से रिपोर्ट किया है कि "कमांडो यूनिट्स, जरूरी उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक, ऑप्टिक, ड्रोन्स और निगरानी सिस्टम्स को इन इलाकों में बढ़ा दिया गया है और इन्हें हाई अलर्ट पर रखा गया है. साथ ही फ्रंट बेस से इन इलाकों की रिपोर्टिंग तत्काल आधार पर की जा रही है."
कमांडर ने कहा कि ईरान के सीमाई इलाकों में हालात सामान्य हैं और वहां कोई 'खास दिक्कत नहीं है.'
नागोर्नो-काराबाख विवाद इलाके में अज़रबैजान और आर्मीनिया के बीच सैन्य टकराव के चलते ईरान के सीमाई गांवों में 100 से ज्यादा मोर्टार गिरे हैं.
इनके चलते इन जगहों पर घरों को मामूली नुकसान हुआ है. ईरान इन घटनाओं के लिए दोनों मुल्कों को चेतावनी दे चुका है.
सबसे हालिया कदम के तौर पर ईरान के आर्म्ड फोर्सेज के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अबुल फ़ज़ल शेकर्ची ने 23 अक्तूबर को कहा कि उनका देश अज़रबैजान और आर्मीनिया के साथ अपनी सीमाओं पर 'किसी गलती या खतरे को बर्दाश्त नहीं करेगा.'

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अमरीका में बातचीत के बाद फिर छिड़ी लड़ाई
अज़रबैजान और आर्मीनिया के बीच चल रहे संघर्ष को रोकने के लिए अमरीका में हुई बातचीत के अगले दिन दोनों पक्षों में नई झड़पें हुई हैं.
अज़रबैजान के रक्षा मंत्रालय ने नागोर्नो-काराबाख़ के इलाक़े में लड़ाई की ख़बर दी है. यह इलाक़ा अज़रबैजान का है जिस पर आर्मीनियाई मूल के लोग रहते हैं और उनका ही वहां पर कब्ज़ा भी है.
स्थानीय अफ़सरों ने अज़रबैजान की सेना पर स्तेपनाकियर्त की इमारतों पर बमबारी का आरोप लगाया. यह इस इलाक़े का सबसे बड़ा शहर है. हालांकि, अज़रबैजान ने इन आरोपों से इनकार किया है.
अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने शुक्रवार को अज़रबैजान और आर्मीनिया के विदेश मंत्रियों के साथ अलग-अलग मुलाक़ात की थी ताकि गुज़रे तक़रीबन एक महीने से चल रहे इस संघर्ष को ख़त्म किया जा सके.
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रूस की मध्यस्थता वाले दो संघर्ष विराम चल नहीं पाए हैं. इससे इस जंग के हाल-फिलहाल थमने के आसार दिखाई नहीं दे रहे हैं. यह लड़ाई नागोर्नो-काराबाख़ को लेकर 27 सितंबर को शुरू हुई है.
अज़रबैजान के सैन्य बलों का कहना है कि उन्होंने कुछ इलाक़े जीत लिए हैं. इनमें ईरान से सटे इलाक़ों पर पूरा नियंत्रण भी शामिल है. इन दावों से आर्मीनिया ने इनकार किया है.
नागोर्नो-काराबाख़ के आर्मीनियाई मूल के प्रशासन का कहना है कि उसके बलों ने इन हमलों को नाकाम कर दिया है.
राष्ट्रपति इलहाम अलीयेव ने फ्रांसीसी न्यूज़पेपर ले फिगारो को बताया है कि अज़रबैजान पहले से ही बातचीत के लिए राज़ी था. उन्होंने लगातार जारी लड़ाई के लिए आर्मीनिया के कदमों को ज़िम्मेदार ठहराया है.

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अलीयेव ने कहा, "हम आज भी रुकने के लिए तैयार हैं. लेकिन, दुर्भाग्य से आर्मीनिया ने संघर्ष विराम का बुरी तरह से उल्लंघन किया है. अगर वे नहीं रुकते हैं तो हम कब्ज़े वाले पूरे इलाक़ों को आज़ाद कराने के मकसद से आगे बढ़ेंगे."
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि इस मसले पर "अच्छी प्रगति" हुई है, लेकिन उन्होंने इसका ब्योरा साझा नहीं किया. उन्होंने यह भी नहीं बताया कि क्या उनकी दोनों देशों के नेताओं से बातचीत हुई है या नहीं.
ये बातचीत कैसी रही, इस पर आर्मीनियाई विदेश मंत्री जोहराब मनात्सनयान ने कहा कि "यह काफ़ी अच्छी रही." उन्होंने यह भी कहा कि संघर्ष विराम के प्रयास जारी रहेंगे.
वैश्विक ताक़तें चाहती हैं कि ये युद्ध और बड़ा न हो जाए. इस जंग में तुर्की पहले ही अज़रबैजान के साथ खड़ा हो गया है और दूसरी ओर रूस का आर्मीनिया के साथ रक्षा समझौता है.
वॉशिंगटन में बातचीत के तुरंत बाद तुर्की के रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने इस्तांबुल में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि रूस और तुर्की इस विवाद को सुलझाने के लिए काम कर सकते हैं.
इस विवाद के चलते तुर्की और उसके नाटो सहयोगियों के बीच रिश्तों में गिरावट आई है. माइक पोम्पियो ने तुर्की पर अज़रबैजानी बलों को हथियार देने के ज़रिए इस संघर्ष को हवा देने का आरोप लगाया है. तुर्की ने इन आरोपों को ख़ारिज किया है.
शुक्रवार की बातचीत के पहले पोम्पियो ने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि इसका कोई रास्ता निकल आएगा.
लेकिन, आर्मीनियाई प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान ने कहा कि उन्हें इस वक़्त इस विवाद का कोई कूटनीतिक समाधान निकलता नहीं दिख रहा है.
अलीयेव ने किसी शांति समझौते के होने की उम्मीद को दूर की कौड़ी बताया है.
नागोर्नो-काराबाख़ को लेकर 1991-94 के बीच चली जंग में क़रीब 30,000 लोग मारे गए थे.
आर्मीनियाई लोग इसे अपना ऐतिहासिक घर मानते हैं. अज़रबैजान इसे अवैध रूप से कब्ज़ाया गया हिस्सा बताता है और इसे वापस किए जाने की मांग करता है.
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