अज़रबैजान आर्मीनिया की जंगः स्तेपनाकियर्त शहर का हाल

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बीबीसी संवाददाता मरीना काताइवा अज़रबैजान की अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे स्टपनेकर्ट शहर में पहुंची तो उन्होंने देखा कि शहर के लोग अभी भी तहखानों में रह रहे हैं.
स्तेपनाकियर्त शहर में हम हफ़्ते भर पहले जहां खड़े थे, वहां आज भी कुछ नहीं बदला है. सड़कें खाली हैं. कुछ ही गाड़ियां हैं. दुकानें बंद हैं. सांझ ढलने को है लेकिन शहर पूरी तरह से अंधेरे में डूबा हुआ लग रहा है. स्टपनेकर्ट में बिजली है लेकिन शहर के लोग अपने घरों की बत्तियां नहीं जलाते हैं. उन्हें डर है कि इससे ड्रोन हमले का ख़तरा हो सकता है.
हम शहर के जिस होटल में ठहरे थे, उसके मैनेजर ने हमें आगाह किया कि कमरे की बत्तियां नहीं जलाई जा सकती हैं.
स्थानीय नागरिक तिगरान ने हमें बताया कि शहर पर कई दिनों से बम नहीं गिराये गए हैं लेकिन फिर भी लोग अपने अपार्टमेंट्स में रहने के बजाय बेसमेंट्स में रह रहे हैं.
मैंने जब उनसे युद्ध विराम के बारे में पूछा तो उनका जवाब था, "हां, यहां पर कोई युद्ध विराम नहीं है. और यहां पर कोई युद्ध विराम कभी था भी नहीं."

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अज़रबैजान का दावा, आर्मीनिया में रूस से हो रही है हथियारों की तस्करी
अज़रबैजान के राष्ट्रपति इलहाम अलियेव ने कहा है कि रूस से आर्मीनिया में हो रही 'हथियारों की तस्करी' के मसले पर अज़रबैजान ने रूस को गौर करने के लिए कहा है.
अज़रबैजान और आर्मीनिया के बीच नागोर्नो-काराबाख़ इलाक़े में 27 सिंतबर से युद्ध चल रहा है.
रूस की सरकारी न्यूज़ एजेंसी टीएएसएस को 19 अक्टूबर को दिए एक इंटरव्यू में अलियेव ने ये भी बताया कि अज़रबैजान अपनी उस पिछली मांग से पीछे हट गया था जिसमें आर्मीनिया से कब्ज़े वाले इलाक़ों से पीछे हटने का तय समय बताने के लिए कहा गया था.
उन्होंने नागोर्नो-काराबाख़ की लड़ाई में समझौते के लिए बनाए गए ओएससीई मिंस्क समूह के 'बुनियादी नियमों' पर भी बात की.
इन नियमों में आर्मीनिया को अज़रबैजान के रास्ते रूस जाने के लिए मार्ग देना भी शामिल है.

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'रूस से मिल रहे हथियार'
अलियेव ने कहा कि रूस से बड़ी संख्या में हथियार आर्मीनिया में कथित तौर पर पहुंचाए जा रहे हैं.
अलियेव ने बताया, "हमने रूस को बता दिया है कि हमें लगता है कि ये तस्करी हो रही है. हमारे लिए ये मानना मुश्किल है कि तटस्थ रहने वाले ओएससीई मिंस्क समूह में शामिल रूस युद्ध की स्थिति में आर्मीनिया को हथियार पहुंचा रहा है."
"हमें मिली जानकारी के मुताबिक आर्मीनियाई मूल के बड़े रूसी कारोबारी और हथियारों के व्यापारी इस तस्करी में शामिल हैं जबकि उन पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध भी लगे हुए हैं. रूस को इसकी जानकारी देने का हमारा मकसद है कि वो इस मामले से निपटे."
अज़रबैजान ने पहले भी आर्मीनिया पर आरोप लगाया था कि वो मानवीय मदद की आड़ में रूस और यूरोप से अवैध रूप से हथियार मंगा रहा है.
अज़रबैजान में सरकार समर्थित वेबसाइट्स में आरोप लगाया गया है कि इसके लिए आर्मीनिया सरकारी और यात्री विमानों का इस्तेमाल कर रहा है.

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काराबाख़ के उत्तरी और दक्षिणी इलाक़े में तेज हुई लड़ाई
अज़रबैजान और आर्मीनिया के बीच मंगलवार सुबह से काराबाख़ के उत्तरी और दक्षिणी इलाक़े में लड़ाई चल रही है.
आर्मीनिया के रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता शुशन स्टेपनयान के मुताबिक दक्षिणी इलाक़े में लड़ाई तेज हो गई है और उत्तरी इलाक़े में अज़रबैजान की सेना ने एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल किया.
हालांकि इसका कोई प्रमाण नहीं दिया गया है और अज़रबेजान कहता रहा है कि उसने मानव संचालित एयरक्राफ्ट का अभी तक इस्तेमाल नहीं किया है.
अज़रबैजान के रक्षा मंत्रालय ने भी उत्तरी और दक्षिणी इलाक़े में हो रही लड़ाई के बारे में लिखा है.
उन्होंने ये भी बताया कि दक्षिणी इलाक़े में अज़रबैजान की सेना ने बढ़त हासिल कर ली है.

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27 सितंबर को युद्ध की शुरुआत
मंत्रालय ने अपनी रिपोर्टों में एक तीसरी, "कुबेदली-ज़ेंगेला" दिशाओं का ज़िक्र किया है.
कुबेदली और ज़ेंगेला नागोर्नो-काराबाख़ के दक्षिण-पश्चिम में स्थित क्षेत्रों के प्रशासनिक केंद्र हैं.
काराबाख़ में 27 सितंबर को युद्ध की शुरुआत हुई थी. आर्मीनिया और अज़रबैजान की सेना अब कई मोर्चों पर आमने-सामने हैं.
इस लड़ाई में ड्रोन, घातक हथियार और मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है.
इन हमलों में दोनों तरफ के आम लोगों को भी नुक़सान पहुंचा है. बड़ी संख्या में लोग मारे गए हैं.

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दोनों पक्षों ने 18 अक्टूबर मध्यरात्रि से युद्धविराम की घोषणा कर दी थी.
लेकिन, इसके तुरंत बाद ही दोनों एक-दूसरे पर युद्धविराम के उल्लंघन का आरोप लगाने लगे.
लगभग तीन हफ़्तों से चल रही इस लड़ाई में अज़रबैजान ने युद्ध क्षेत्र के दक्षिणी इलाक़े में बढ़त बनाई है.
अज़रबैजान ने तीन क्षेत्रीय केंद्रों जबरेल, हाद्रुत और फिज़ुली को अपने कब्ज़े में लिया है.
ये केंद्र 26 सालों से आर्मीनिया के नियंत्रण में थे.
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