आर्मीनिया का आरोप, युद्धविराम के मिनटों बाद अज़रबैजान ने रॉकेट दाग़ कर तोड़ा समझौता

आर्मीनिया और अज़रबैजान के बीच जंग

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आर्मीनिया और अज़रबैजान के बीच दूसरा 'मानवीय युद्धविराम' लागू होने के चंद मिनटों बाद ही आर्मीनिया ने अज़रबैजान पर युद्धविराम के उल्लंघन का आरोप लगाया है.

आर्मीनिया के रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा कि युद्धविराम लागू होने के चार मिनट बाद अज़रबैजान ने गोलियां चलाई हैं और रॉकेट दाग़े हैं.

अज़रबैजान ने अब तक इन आरापों के बारे में कुछ नहीं कहा है.

21 दिनों तक चली लड़ाई के बाद आर्मीनिया और अज़रबैजान दूसरी बार विवादित नागोर्नो-काराबाख़ क्षेत्र में 'मानवीय युद्धविराम' के लिए तैयार हुए थे. दोनों देशों ने कहा था कि युद्धविराम स्थानीय समयानुसार शनिवार की आधी रात से शुरू होगा.

इससे पहले आर्मीनिया और अज़रबैजान ने पिछले हफ़्ते भी युद्धविराम का निर्णय लिया था जो अगले दिन ही टूट गया था.

हालाँकि युद्धविराम के नए ऐलान के बावजूद दोनों देशों की सेनाओं के बीच झड़पें जारी है.

इससे पहले शनिवार तक दोनों देश एक-दूसरे पर समझौते के उल्लंघन और हिंसा का आरोप लगाते रहे.

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सीज़फ़ायर के नए समझौते में क्या है?

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आर्मीनिया और अज़रबैजान ने मानवीय युद्धविराम की पुष्टि की है. हालाँकि इस बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी गई है.

अज़रबैजान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि नया सीज़फ़ायर एक अक्टूबर को दिए गए अमरीकी, फ़्रांसीसी और रूसी राष्ट्रपति के बयानों, पाँच अक्टूबर को जारी किए मिंस्क ग्रुप के बयान और 10 अक्टूबर को हुए मॉस्को समझौते पर अधारित है.

आर्मीनियाई विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने भी अपने ट्वीट में यही बात दोहराई है.

उन्होंने कहा कि आर्मीनिया युद्धग्रस्त क्षेत्र में 'युद्धविराम और तनाव कम करने' की दिशा में लिए गए फ़ैसले का स्वागत करता है.

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रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लैवरोव ने शनिवार को आर्मीनिया और अज़रबैजान के विदेश मंत्रियों से बात की और कहा कि उन्हें इस समझौते का 'कड़ाई से पालन' करना होगा.

लैवरोव ने ही पिछले हफ़्ते के युद्धविराम को लेकर भी मध्यस्थता की थी.

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ज़मीनी हालात और आरोप-प्रत्यारोप

आर्मीनियाई रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता शुशान स्तेपनियान ने सोशल मीडिया पर कहा है कि "स्थानीय समयानुसार 00.04 से लेकर 02.45 तक यानी युद्धविराम के चार मिनट बाद से दुश्मन ने उत्तरी दिशा में गोलियां चलाई हैं. साथ ही 02.20 से लेकर 02.45 बजे तक दक्षिणी दिशा में रॉकेड दाग़े गए हैं."

अज़रबैजान ने आर्मीनिया पर शनिवार तड़के मिसाइल हमला करने का आरोप लगाया है. अज़रबैजान का कहना है कि यह मिसाइल युद्धग्रस्त क्षेत्र से काफ़ी दूर बसे शहर गांजा में दागी गई है और हमले में 13 आम नागरिकों की मौत हुई है जबकि 45 लोग घायल हुए हैं.

अज़रबैजान के रक्षा मंत्रालय ने आर्मीनिया पर जानबूझ कर आम नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है.

आर्मीनिया के अधिकारियों ने मिसाइल हमले से इनकार किया है और अज़रबैजान पर रिहायशी इलाकों पर हमला करने का आरोप लगाया है.

आर्मीनियाआई रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता शुशान स्तेपनियान ने फ़ेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट किया और लिखा, "ये वीडियो नागोर्नो-काराबाख़ इलाके में तबाही को दिखाता है."

उन्होंने अज़रबैजान के सैनिकों पर आम लोगों को मिसाइल से निशाना बनाने का आरोप लगाया.

आर्मीनियाआई रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता शुशान स्तेपनियान की फ़ेसबुक पोस्ट

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गुरुवार को अज़रबैजान के राष्ट्रपति इलहाम अलीयेव ने ट्वीट करके आर्मीनिया को खुली चेतावनी दी थी.

उन्होंने लिखा था, "मैं आर्मीनिया की सरकार और लोगों को स्पष्ट संदेश देता हूँ कि वो आज़ाद इलाकों में लौटना तुरंत बंद करें. उनके इस कदम से सिर्फ़ ख़ूनखराबा और पीड़ित ही बढ़ेंगे."

इससे पहले बीबीसी संवाददाताओं ने पुष्टि की थी कि अज़रबैजान ने बुधवार को आर्मीनिया के इलाके में एक मिसाइल दागी थी.

युद्ध और हिंसा के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन इस बात को लेकर चिंतित है कि इस दौरान युद्धग्रस्त इलाकों में कोरोना संक्रमण फ़ैलने की आशंका कई गुना ज़्यादा बढ़ गई है.

चर्च में प्रार्थना करती एक आर्मीनियाई युवती

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नागोर्नो-काराबाख़ के बारे में कुछ बातें

  • ये 4,400 वर्ग किलोमीटर यानी 1,700 वर्ग मील का पहाड़ी इलाक़ा है.
  • पारंपरिक तौर पर यहां ईसाई आर्मीनियाई और तुर्क मुसलमान रहते हैं.
  • सोवियत संघ के विघटन से पहले ये एक सवायत्त क्षेत्र बन गया था जो अज़रबैजान का हिस्सा था.
  • अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस इलाक़े को अज़रबैजान के हिस्से के रूप में मान्यता दी जाती है, लेकिन यहां की अधिकांश आबादी आर्मीनियाई है.
  • आर्मीनिया समेत संयुक्त राष्ट्र का कोई सदस्य किसी स्व-घोषित अधिकारी को मान्यता नहीं देता.
  • 1980 के दशक से अंत से 1990 के दशक तक चले युद्ध में 30 हज़ार से अधिक लोगों की जानें गईं. उस दौरान अलगावादी ताक़तों ने कुछ इलाक़ों पर कब्ज़ा जमा लिया.
  • 1994 में यहां युद्धविराम हुआ जिसके बाद से यहां गतिरोध जारी है.
  • तुर्की खुल कर अज़रबैजान का समर्थन करता है.
  • यहां रूस का एक सैन्य ठिकाना है.

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