अज़रबैजान आर्मीनिया की जंग: हाथ बंधे लोगों को गोली मारने का आरोप, क्या हो रहे हैं युद्ध अपराध?

आर्मीनिया-अज़रबैजान

अज़रबैजान और आर्मीनियाई मूल के लोगों के बीच नागोर्नो-काराबाख के विवादित इलाके में चल रही जंग में संभावित युद्ध अपराध के वीडियोज सामने आए हैं.

एक मैसेजिंग ऐप पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में ऐसा लग रहा है कि सैन्य वर्दी पहने इसमें दो आर्मीनियाई हैं. इस वीडियो को अज़रबैजान के सैनिकों ने बनाया है.

दूसरे वीडियो में दिख रहा है कि इन्हीं दोनों आर्मीनियाई लोगों के हाथ पीछे बंधे हुए हैं और इन्हें गोली मार दी गई.

आर्मीनियाई अधिकारियों ने इन लोगों को 73 साल के बेनिक हाकोब्यान और 25 साल के यूरी आदमयान के तौर पर पहचाना है. अजरबैजान ने इन वीडियोज को फर्जी बताया है.

मानव अधिकारों पर नजर रखने वाली यूरोप की बड़ी संस्था काउंसिल ऑफ यूरोप ने कहा है कि उन्हें ये वीडियो मिले हैं और वे इन सभी कथित मानव अधिकारों के उल्लंघन के मामलों की जांच कर रहे हैं.

वीडियो कैप्शन, आर्मीनिया और अज़रबैजान के बीच लड़ाई की वजह क्या है?

कॉकेशस एनक्लेव के पास 27 सितंबर को लड़ाई छिड़ गई थी. इस इलाके को अंतरराष्ट्रीय तौर पर अजरबैजान के हिस्से के तौर पर मान्यता मिली हुई है, लेकिन यह इलाका आर्मीनियाई नियंत्रण में है.

ये टकराव तुरंत ही एक बड़े पैमाने पर शुरू हुई जंग में तब्दील हो गए. इसमें कस्बों और शहरों पर भारी बमबारी हुई और यहां तक कि इसमें प्रतिबंधित क्लस्टर बमों के इस्तेमाल के भी आरोप लग रहे हैं.

10 अक्तूबर को और उसके बाद 18 तारीख को युद्ध विराम का ऐलान हुआ, लेकिन जंग रुकी नहीं. इस जंग में अब तक कई हजार लोगों की मौत होने की बात सामने आ रही है. आर्मीनिया और अजरबैजान दोनों ही देशों में आम नागरिक गोलाबारी से मारे गए हैं. दसियों हजार लोगों को अपने घर छोड़कर भागना पड़ा है.

चेतावनीः इस स्टोरी में मौजूद कुछ तस्वीरें आपको विचलित कर सकती हैं.

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क्या असली है और क्या फर्जी है?

दोनों ही पक्षों के लड़ाकों ने युद्धबंदियों (पीओडब्ल्यू) और विपक्षी सैनिकों के शवों की तस्वीरें जारी की हैं.

बीबीसी ने दोनों पक्षों के सोशल मीडिया पर फैलाए गए कई वीडियोज़ की पड़ताल की है जिनमें युद्धबंदियों को नुकसान पहुंचाने या उनकी हत्या को दिखाया गया है.

इनमें से केवल ये दोनों वीडियोज ही ऐसे हैं जिनकी पुष्टि की जा सकती है.

एक क्लिप बड़े पैमाने पर टेलीग्राम चैनलों पर सर्कुलेट हो रही है इसमें एक अजरबैजानी युद्धबंदी को आर्मीनियाई सैनिकों द्वारा गोली मारते दिखाने का दावा किया गया है, लेकिन वास्तविकता में यह रूस का वीडियो है जिसे सबसे पहले सोशल मीडिया पर साल 2013 में देखा गया था. बाकी वीडियोज में पुष्टि करने लायक पर्याप्त ब्योरा नहीं है.

जिन दो वीडियोज की बीबीसी ने पुष्टि की है जिन्हें अज्ञात रूसी-भाषी अजरबैजान समर्थक चैनल ने टेलीग्राम मैसेंजर पर पिछले हफ्ते डाला था.

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इन वीडियो में क्या है?

पहले वीडियोज में आर्मीनियाई बेनिक हाकोब्यान और यूरी आदमयान को कैदी बनाते हुए दिखाया गया है.

वीडियो में अजरबैजानी लहजे में रूसी बोलने वाला एक शख्स लोगों को आगे बढ़ने, आत्मसमर्पण करने और हाथ ऊपर करने के लिए कहता है. वह अन्य सैनिकों से अजरबैजानी में बात करता है और उनसे बंदियों को नुकसान न पहुंचाने के लिए कहता है.

कम उम्र वाले कैदी यूरी आदमयान अपना हेलमेट और जैकेट उतारता दिखाई देता है और वह अपने हाथ ऊपर करता है और कैमरे से बाहर चला जाता है.

हालांकि, बूढ़े शख्स बेनिक हाकोब्यान एक मिलिटरी स्टाइल की जैकेट पहने हैं, लेकिन यह साफ नहीं हैं कि वे सैनिक हैं या नहीं. उन्हें जमीन पर गिरा दिया गया और वे दर्द से कराहते दिखाई दे रहे हैं.

दूसरे वीडियो में इन दोनों लोगों की हत्या दिखाई गई है. इन कैदियों के हाथ पीछे बंधे हुए दिखते हैं और इसमें इन्हें आर्मीनिया और गैर-मान्यता प्राप्त रिपब्लिक ऑफ नागोर्नो-काराबाख के झंडों में लपेटा हुआ दिखाया गया है.

ये एक छोटी दीवार पर बैठे हुए हैं. इसके बाद कोई अज़रबैजानी भाषा में आदेश देता हैः "इनके सिर पर निशाना लगाओ." कई गोलियां चलने की आवाज आती है और ये कैदी जमीन पर गिर जाते हैं.

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अज़रबैजान ने वीडियो को फर्जी बताया गया

बीबीसी ने पुष्टि की है कि दोनों वीडियोज में आदेश देने वाला शख्स एक अज़रबैजानी भाषाई मूल का है और उसका बोलने का लहजा स्थानीय है.

पहले वीडियो में दिख रहे कैदी ही दूसरे वीडियो में मारे गए कैदी लग रहे हैं क्योंकि वे वही कपड़े पहने हुए हैं.

अज़रबैजान के रक्षा मंत्रालय ने तत्काल ही इन वीडियो को ख़ारिज कर दिया और कहा कि ये उनके सैनिक नहीं है. साथ ही इन वीडियोज को उकसावे वाली कार्रवाई करार दिया. इसके तुरंत बाद ही इन वीडियो को डिलीट कर दिया गया.

इसके अगले दिन अज़रबैजान के प्रोसीक्यूटर जनरल ने ऐलान किया कि एक जांच की गई है और उसमें इन वीडियो को फर्जी पाया गया है.

लेकिन, क्या ये असली वीडियो हैं?

बीबीसी ने इन क्लिप्स का अध्ययन किया है और इस बात की पुष्टि की है कि इन्हें हाद्रुत में फिल्माया गया था. इसी कस्बे में भयंकर लड़ाई हुई है. यह फुजुली के करीब दक्षिणी नागोर्नो-काराबाख का इलाका है.

यह मुमकिन है कि ये वीडियोज 9-15 अक्टूबर के बीच रिकॉर्ड किए गए हों. अजरबैजान ने ऐलान किया था कि हाद्रुत पर नौ अक्टूबर को क़ब्जा कर लिया गया है.

हालाँकि बाद में यह साफ़ हुआ कि उन्होंने कुछ रणनीतिक ऊंचाइयों पर कब्जा कर लिया था, लेकिन इस कस्बे पर कब्जे को लेकर भयंकर लड़ाई 12 अक्तूबर को भी जारी थी.

पहले वीडियो की लोकेशन हाद्रुत के उत्तरी हिस्से में सड़क किनारे की है. ऊपर दी गई तस्वीर में चार बिल्डिंग हैं. इस इलाके के सैटेलाइट व्यू से इन स्ट्रक्चर्स की पुष्टि हो रही है.

वीडियो कैप्शन, आर्मीनिया और अज़रबैजान के बीच युद्ध में झोंके जा रहे युवाओं की कहानी

एग्जिक्यूशन क्लिप कस्बे के दक्षिणी हिस्से में करीब एक किमी दूर एक पार्क की लग रही है.बेलिंगकैट ने इन्हीं लोकेशनों और टाइम पीरियड की पहचान की है और अजरबैजानी सैनिकों के हेलमेट्स और राइफलों की भी पुष्टि की है.

बेलिंगकैट ने अपने एनालिसिस में लिखा है कि इन वीडियोज में दिख रहे दो लोग आर्मीनियाई लड़ाके लग रहे हैं. इन्हें शायद कुछ वक्त बाद मार दिया गया.

अजरबैजान के एक ऑनलाइन टिप्पणीकार ने इन क्लिप्स की सत्यता पर सवाल उठाया है और कहा है कि शूटिंग के बाद खून नहीं दिख रहा है, लेकिन बीबीसी ने जिन मिलिटरी एक्सपर्ट्स से बात की है उन्होंने कहा है कि ये वीडियोज असली लग रहे हैं.

किंग्स कॉलेज लंदन के डिपार्टमेंट ऑफ वॉर स्टडीज के एक मिलिटरी एक्सपर्ट रॉब ली ने कहा है, "हॉलिवुड ने गोली लगने के जख्म को एक गलत तरीके से दिखाया है."

बीबीसी ने एक पूर्व ब्रिटिश मिलिटरी इंटेलिजेंस अफसर से भी बात की. उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "ये असली गोलियां हैं, ये हत्याएं वास्तव में हुई हैं. यह असली है."

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आर्मीनिया ने क्या कहा है?

आर्मीनिया के मानव अधिकार रक्षक आर्मन टैटोयान ने आधिकारिक तौर पर इऩ हत्याओं को "खारिज न किए जा सकने योग्य युद्ध अपराध" बताया है.

उन्होंने कहा है कि आर्मीनिया के यूरोपियन कोर्ट्स ऑफ ह्यूमन राइट्स ने इन वीडियोज की प्रतियां मंगाई हैं.

टैटोयान ने कहा है कि वे यूएन ह्यूमन राइट्स कमिश्नर, काउंसिल ऑफ यूरोप और दूसरी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ इन क्लिप्स को साझा करेंगे.

काउंसिल ऑफ यूरोप के मानव अधिकार कमिश्नर दुंजा मिजाटोविक की प्रवक्ता ने पुष्टि की है कि उन्हें यह सामग्री मिली है और कमिश्नर मौजूदा हालात पर गहरी नजर बनाए हुए हैं और वे मानव अधिकारों के कथित उल्लंघन के सभी आरोपों की जांच करेंगी.

इंटरनेशनल कमेटी ऑफ रेड क्रॉस के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि हालांकि, संस्थान इन सभी कथित उल्लंघनों पर नजर बनाए हुए है, लेकिन वह किसी एक खास घटना पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करेगा.

नागोर्नो-काराबाख के मानवाधिकार निगरानीकर्ता अर्ताक बेग्लार्यान ने बीबीसी को बताया कि वीडियो में दिख रहे दोनों लोग स्थानीय लोग हैं.

उन्होंने कहा कि बेनिक हाकोब्यान सैनिक नहीं थे बल्कि हाद्रुत के एक नागरिक हैं और यूरी आदमयान संभवतः पड़ोस के गांव के एक सैनिक हैं.

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युद्ध अपराध क्या होता है?

- युद्ध अपराध ऐसे कदम होते हैं जिन्हें मूल रूप से जेनेवा कनवेंशन के तय किए गए इंटरनेशनल रूल्स ऑफ वॉर के तहत उल्लंघन माना गया है.

- कनवेंशन पर दस्तखत करने वाले देशों, जो कि सभी यूएन सदस्य देश हैं, उनके लिए युद्ध बंदियों, बीमार और जख्मी लोगों की सुरक्षा करना अनिवार्य है.

- इस तरह के कैदियों को प्रताड़ित करना, जख्मी करना या उनकी हत्या करना युद्ध अपराध माना गया है.

- जेनेवा कनवेंशन में नागरिकों को भी सुरक्षा की बात कही गई है.

- चूंकि, 27 सितंबर से लड़ाई शुरू हुई है, ऐसे में अजरबैजानी और आर्मीनियाई सेनाएं शहरों और कस्बों पर बमबारी कर रही हैं. दर्जनों आम नागरिक मारे गए हैं और सैकड़ों जख्मी हुए हैं. इसे भी युद्ध अपराध माना जा सकता है.

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