फ़र्ज़ी ख़बर के तूफ़ान में फंसने वाली पत्रकार की कहानी
इमेज स्रोत, AFP
....में
Author, मिशेल मैडसन
पदनाम, खोजी पत्रकार
बीती जनवरी मैं एक दिन उत्तरी लंदन की एक डांस क्लास से बाहर निकली और मुझे अपने फ़ोन पर अफ़्रीकी नंबरों से आईं कई मिस्ड कॉल्स मिलीं.
मुझे बिलकुल भी नहीं पता था कि ये सब क्यों हो रहा था. मैंने अपना इनबॉक्स चेक किया. फ़ेसबुक और ट्विटर चेक किया. वहां भी कई लोगों ने मुझे मैसेज किए हुए थे जिसमें मुझसे ये पूछा गया था कि क्या मैं मिशेल डेमसेन हूँ जिन्होंने एक रहस्यमयी ख़बर लिखी है जो कि सेनेगल में तूफ़ान खड़ा किए हुए है.
"एक करप्शन स्कैंडल मेरे देश को हिला रहा है और आपका नाम उसमें शामिल है."
"हम काफ़ी चिंतित थे क्योंकि हमने एक आर्टिकल देखा जो कि ऐसा लगता है कि आपने लिखा है."
"मैं सेनेगल जर्नलिस्ट हूँ और मैं आपसे बात करना चाहती हूँ."
ये सभी लोग ये जानना चाहते थे कि क्या मैंने इस शीर्षक "द चैलेंज ऑफ़ एक्सप्लॉइटिंग नेचुरल रिसोर्सेज़ इन अफ़्रीका" से एक आर्टिकल लिखा है जो कि मॉडर्न घाना नाम की एक अपरिचित सी वेबसाइट पर 9 जनवरी 2019 को छपा है.
इमेज स्रोत, George Wafula/BBC
इस लेख में सेनेगल के विपक्ष के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार उसमाने सोन्को पर यूरोपीय तेल कंपनी से रिश्वत लेने की बात थी. इस लेख को मिशेल डेमसेन ने लिखा था. मेरे नाम से बस अक्षर अलग क्योंकि मेरा नाम मिशेल मैडसेन है.
ये आर्टिकल सेनेगल के राष्ट्रपति चुनाव से कुछ हफ़्ते पहले ही सामने आया था और मिस्टर सोन्को वहां के राष्ट्रपति मेकी साल के मुख्य प्रतिद्वंदी थे.
पश्चिमी अफ़्रीका में एक फ़्रीलांस इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट होने के नाते भ्रष्टाचार उजागर करने वाले शख़्स के रूप में मैंने सेनेगल और तेल कंपनियों पर कई कहानियां लिखी हैं.
सोन्को ने अपनी किताब में राष्ट्रपति के भाई अलिउ साल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे जिनका उन्होंने खंडन कर दिया था. मैंने इस किताब के प्रकाशन के बाद सोन्को पर भी लिखा है.
लेकिन मैं ये जानती हूँ कि मैंने मॉडर्न घाना के लिए कोई रिपोर्ट नहीं लिखी और मेरे संपर्क में आने वाले सभी पत्रकारों को ये बताया. लेकिन मैं सेनेगल में प्रकाशित कई ख़बरों में दी गई जानकारी से हिल गई और कितनी जल्दी उस स्टोरी को मुझसे जोड़ दिया गया.
इमेज स्रोत, George Wafula/BBC
प्रेस अफ्रिक में छपी एक कहानी में मेरा नाम भी दिया गया कि ये कहानी मैंने ख़ुद लिखी है.
एक अन्य न्यूज़ साइट सेनेवेब ने सेनेगल में व्यापारिक गतिविधियों वाले एक ब्रितानी बिज़नेसमैन फ्रैंक टिमिस का नाम दिया है. टिमिस के राष्ट्रपति साल के भाई से क़रीबी रिश्ते हैं.
मुझे और मेरे साथी पत्रकारों को हाल ही में साल के भाई से जुड़े मामलों की जाँच करने के लिए आर्थिक मदद मिली है. ये फंडिंग नीदरलैंड के एक जर्नलिज़्म प्रोजेक्ट से आई थी जिसके लिए ऑक्सफेम ने भी मदद की थी.
इसी वजह से जब न्यूज़ साइटों पर छपे आधिकारिक दस्तावेज़ों में ऑक्सफेम का नाम दिखा तो मुझे धक्का लगा. क्योंकि इन दस्तावेज़ों के मध्य में तेल कंपनी टुलोव ऑयल का लोगो लगा हुआ था और उसमाने सोन्को नाम लिखा हुआ था.
इन दोनों ही पक्षों ने आरोपों का खंडन कर दिया है. और तथ्यों की जाँच करने वालों ने जल्द ही इन दस्तावेज़ों को फ़र्ज़ी क़रार दिया.
ऑक्सफेम ने मुझे बताया कि उन्होंने तेल कंपनियों से किसी तरह की फंडिंग नहीं ली है लेकिन उन्होंने सोन्को को ट्रेनिंग के लिए पैसे दिए हैं. इस हल्के से सच ने ही कुछ लोगों के लिए रिपोर्ट को ज़्यादा पुख्ता बनाया.
इसके बाद मैंने अफ़्रीका चैक और एएफ़पी न्यूज़ की फ़ैक्टचेकिंग टीम को बताया कि मैंने मॉडर्न घाना के लिए कोई लेख नहीं लिखा है. इसके साथ ही सेनेगल के अख़बारों ने ख़बरें छापीं कि ये सभी दावे फ़र्ज़ी थे.
ये पूरा तूफ़ान बस 48 घंटे तक चलता रहा. इस दौरान मेरा नाम डाकर में भी छप गया. एक न्यूज़ साइट ने तो ये भी कर दिया कि मेरे फेसबुक पेज़ से मेरी एक तस्वीर लेकर उसे अपने लेख में इस्तेमाल कर लिया.
अब मैं ये जानना चाहती थी कि आख़िर मिशेल डेमसेन कौन हैं और एक फ़ेक न्यूज़ सेनेगल में कैसे फैल गई.
इमेज स्रोत, George Wafula/BBC
मैंने इसके लिए मॉडर्न घाना के प्रमुख ब्राइट ओवुसु से संपर्क किया. उन्होंने कहा कि ये लेख वेबसाइट के ओपिनियन पेज़ पर प्रकाशित हुआ है जो कि घाना और शेष अफ़्रीका से जुड़े विचारों को जगह देता है.
ओवुसु ने कहा कि मॉडर्न घाना में प्रकाशित हुए लेख को लिखने वाला शख़्स ये लेख छपवाने के लिए बेहद उतावला था और इसके बदले में पैसे देने की पेशकश भी कर रहा था.
ओवुसु कहते हैं कि मॉडर्न घाना कभी भी नज़रिया लेखों के लिए पैसे नहीं लेता है. लेकिन अपनी वेबसाइट पर एक प्रेस रिलीज़ प्रकाशित करने के लिए 100 डॉलर लेता है. ओवुसु ने बताया कि लेख लिखवाने के लिए अनुरोध करने वाले शख़्स की आवाज़ अफ़्रीकियों जैसी थी.
ओवुसु को भेजे गये ईमेल और फ़ोन नंबर से मैंने ये जानकारी हासिल की कि वो फोन नंबर अंमरीका में किसी बाबा एइडारा नाम के व्यक्ति के नाम पंजीकृत है.
मैं ये जानकर हिल गई क्योंकि बाबा एइडारा एक सेनेगल के पत्रकार हैं जो कि अमरीका में रहते हैं और सेनेगल सरकार के मुखर विरोधी हैं. वह मेरे अच्छे मिलने वाले भी हैं.
मैंने एइडारा से बात की तो उन्होंने कहा कि ये स्टोरी उनकी ओर से नहीं आई है. उन्होंने बताया कि उन्हें लगा था कि उन्हें साथ हैकिंग की गई है और वे इसके लिए सेनेगल सरकार को ज़िम्मेदार मान रहे थे.
जब मैंने सेनेगल के पत्रकारों से बात की तो उन्होंने बताया कि चुनाव की वजह से सेनेगल में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ओर से एक फेक न्यूज़ वॉर चल रहा है.
लेकिन कई लोगों ने कहा कि उन्हें लगता है कि ये स्टोरी प्रेसीडेंट साल की कैंपेन टीम की ओर से आई थी. इस टीम में डिज़िटल कम्युनिकेशन विशेषज्ञ हैं जिन्होंने इससे पहले भी राष्ट्रपति पद के चुनाव अभियानों में काम किया है.
मैंने साल की कैंपेन टीम से बात करने की कोशिश की. मैंने पार्टी के प्रवक्ताओं से बात करने की कोशिश की लेकिन किसी ने मेरे सवालों के जवाब नहीं दिए और कोई इंटरव्यू नहीं दिया.
हालांकि, मुझे सोन्को ने इंटरव्यू दिया और बताया कि उन्हें टुलोव ऑयल की ओर से किसी तरह का पैसा नहीं लिया और सरकार ने पूरी तरह उनकी छवि ख़राब करने की कोशिश की है.
जब मैंने फॉरेंसिक इंवेस्टिगेटर ऑरेंज से बात की जिन्होंने मुझे ओवुसु को आने वाले फोन की लोकेशन बताई थी तो ऑरेंज ने कहा कि एइडारा का फोन हैक किया जा सकता है और उन्हें फंसाया भी जा सकता है.
एइडारा कहते हैं कि इस फर्जी ख़बर छपे से सिर्फ दो पक्षों को फायदा होगा जिनमें से एक सेनेगल सरकार और दूसरी तेल कंपनियां हैं. और वह इन दोनों पक्षों के ख़िलाफ़ ही लिखते आ रहे हैं.
इमेज स्रोत, George Wafula/BBC
एक साल बीत चुका है लेकिन मुझे अब तक पता हीं है कि मिशेल डेमसेन आख़िर कौन हैं. शायद मुझे कभी पता नहीं चलेगा. जिसने भी अपने निशान छिपाने के लिए इतने प्रयास किए हैं, जिसने भी फ़र्ज़ी दस्तावेज़ जारी किए थे. वो कहीं पर छिपा बैठा है और इसकी जाँच मेरे सिवा कोई नहीं कर रहा है.
ऐसा लगता है कि इस तरह का तूफ़ान खड़ा करने के लिए काफ़ी मेहनत लगती है.
अब वो सारी कहानियां हटा ली गई हैं. लेकिन एक दाग़ बना हुआ है. और फ़ेक न्यूज़ के बारे में यही सबसे प्रभावशाली और ख़तरनाक बात है. और ये बात चुनावी मौसम में और ज़्यादा ख़तरनाक हो जाती है.
और ये बात दिमाग़ में रखने लायक़ है कि जब अगली बार इस तरह की फ़ेक न्यूज़ फैलेगी तो उस ख़बर और उसका असर ज़्यादा प्रभावी हो सकता है.
ये लेख 'द डॉक्यूमेन्टरी: माय फ़ेक न्यूज़ हूजनइट'का हिस्सा है जिसका प्रसारण बीबीसी वर्ल्ड सर्विस पर 14 जून को किया गया था. ये डॉक्यूमेन्टरी पॉ़कास्ट पर भी उपलब्ध है.
कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले
बीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल
बाीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.