कोरोना से जंग की बजाए क्यों उलझे हुए हैं अमरीका, चीन और ईरान

डोनाल्ड ट्रंप और शी जिंनपिंग

इमेज स्रोत, Getty Images

कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ जारी लड़ाई अब अदालतों तक पहुंच गई है. इस मुद्दे पर अमरीका के एक प्रांत में चीन के ख़िलाफ़ मुक़दमा दायर किया गया है.

मुक़दमा करने वाले मिसूरी प्रांत ने चीन पर वायरस से जुड़ी सूचनाएं दबाने, व्हिसलब्लोअर को गिरफ़्तार करने, कोविड-19 की संक्रामक प्रवृति को ख़ारिज करने का आरोप लगाया है.

ऐसा नहीं है कि इस मुक़दमे से पहले कोरोना वायरस को लेकर दुनिया के देशों के बीच एक दूसरे से कोई विवाद नहीं था.

महीने भर पहले की ही तो बात है जब राष्ट्रपति ट्रंप ने कोरोना वायरस को 'चाइनीज़ वायरस' क़रार दिया था.

हालांकि तब चीन ने इतना ही कहा था कि उस पर कलंक लगाने के अमरीका को अपने काम पर ध्यान देना चाहिए.

ऐसे में ये सवाल उठता है कि एक तरफ़ जब इस महामारी के ख़िलाफ़ दुनिया त्राहि-त्राहि कर रही है और देशों का हेल्थ सिस्टम घुटने पर है तो एक साझा कोशिश करने के बजाय ये देश एक दूसरे से क्यों उलझे पड़े हैं.

छोड़िए X पोस्ट
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त

निशाने पर चीन

इसमें ताज्जुब नहीं कि कोविड-19 की महामारी को लेकर चीन कई देशों के निशाने पर है.

अमरीका के अलावा ब्राज़ील ने भी कोरोना वायरस से निपटने के चीन के तौर तरीक़े पर सवाल उठाए हैं.

चीन को लेकर नाराज़गी की आवाज़ें ईरान में भी तब सुनाई दीं जब ईरानी स्वास्थ्य मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कोरोना वायरस से मरने वालों और संक्रमितों की संख्या के बारे में चीन की तरफ़ से दिए जा रहे आंकड़ों को 'भद्दा मज़ाक़' क़रार दिया. हालांकि बाद में ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता कियानुश जहानपोर अपने बयान से मुकर गए.

इसी रविवार को चीन के लिए कूटनीतिक समस्या तब खड़ी हो गई जब ऑस्ट्रेलिया ने कोविड-19 की महामारी कैसे फैली, कोरोना वायरस की उत्पत्ति कहां से हुई, इन सवालों को लेकर अंतरराष्ट्रीय जांच कराने की मांग की. ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री मैरिस पेन ने चीन की पारदर्शिता पर चिंता ज़ाहिर की.

इससे पहले ताइवान की निर्वाचित सरकार ने चीन पर ये आरोप लगाया था कि वो जानबूझकर विश्व स्वास्थ्य संगठन से सीधे जानकारी लेने की उसकी कोशिशों में अड़चन पहुंचा रहा है.

ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी के साथ चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी के साथ चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग

अमरीका-चीन संबंध

मिसूरी के मुक़दमे और अमरीका में चीन की हो रही आलोचनाओं के मद्देनज़र देखें तो दोनों देशों के संबंधों में इतनी खटास अतीत में कम ही मौक़ों पर देखी गई है. जब राष्ट्रपति ट्रंप कोरोना वायरस को 'चाइनीज़ वायरस' बता रहे थे तो उनके विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो इसे 'वुहान वायरस' कह रहे थे.

चीन ने इन टिप्पणियों को 'नस्लीय' और 'विदेशी लोगों के प्रति डर की भावना' क़रार दिया है.

ज़ाहिर है कि चीन ने इन टिप्पणियों को अपमान के तौर पर लिया होगा. इन सब के बीच चीन की सोशल मीडिया पर ऐसी कहानियां फैल गईं कि ये महामारी अमरीकी मिलिट्री के जैव-युद्ध (बायो वीपन्स) कार्यक्रम की वजह से फैला. जबकि वैज्ञानिकों ने ये स्पष्ट किया है कि कोरोना वायरस कोई लैब में तैयार की गई चीज़ नहीं है.

ये महज़ जुबानी लड़ाई नहीं थी. जब अमरीका ने यूरोपीय देशों से आने वाले लोगों के लिए अपने दरवाज़े बंद किए तो चीन इटली, ईरान से लेकर सर्बिया तक, कोरोना संकट से निपटने के लिए दूसरे देशों को मदद भेज रहा था.

ये महामारी ऐसे समय में आई है जब पहले से ही अमरीका-चीन संबंध अपनी खोई ज़मीन हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे थे. पिछले दिनों दोनों देशों के बीच एक ट्रेड-डील हुई भी थी लेकिन इससे दोनों देशों के बीच जारी व्यापारिक तनाव पर मामूली फ़र्क़ ही पड़ा.

विशेषज्ञों का कहना है कि चीन और अमरीका एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भविष्य के संघर्ष की तैयारी कर रहे हैं. चीन पहले से ही एक क्षेत्रीय ताक़त बन चुका है और अब उसकी महत्वाकांक्षा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मज़बूत करने की है.

कोरोना वायरस

इमेज स्रोत, Getty Images

ईरान की परेशानी

कोरोना वायरस के फैलते संक्रमण को लेकर अलग-अलग देशों की भिन्न समस्याएं हैं. जैसे कोरोना वायरस से बुरी तरह से प्रभावित होने वाले देशों में ईरान का नाम भी आता है.

सोमवार को राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा कि कोरोना महामारी के बीच ईरान पर अमरीकी पाबंदियां अमानवीय हैं.

इससे पहले ईरान ने कहा था कि कोविड-19 के मरीज़ों के लिए इलाज के लिए ज़रूरी मेडिकल सप्लाई हासिल करने में परेशानी आ रही है जबकि अमरीका का कहना है कि संकट का सामना करने में उससे लापरवाही हुई है.

तब उसके विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने आरोप लगाया, "ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाने से इनकार करके अमरीका 'आर्थिक आतंकवाद' से 'मेडिकल टेरर' की तरफ़ बढ़ रहा है."

इन आरोपों पर अमरीकी विदेश विभाग की तरफ़ से कहा गया कि कोविड-19 के ख़िलाफ़ ईरान की सरकार की लड़ाई में अमरीकी प्रतिबंधों की वजह से कोई बाधा नहीं पहुंचती है. प्रतिबंधों के तहत ईरान को मानवीय आधार पर कृषि उपकरण, दवाएं, मेडिकल इक्विपमेंट्स और खाने-पीने की चीज़ें ख़रीदने की छूट दी गई है.

इसके अलावा कोरोना संकट के बीच भी ईरान को चीन और भारत जैसे देशों से मानवीय सहायता मिलना जारी है.

कोरोना वायरस

इमेज स्रोत, Reuters

विश्व स्वास्थ्य संगठन

ऐसा नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं का सामना केवल चीन को करना पड़ रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन भी कई देशों के निशाने पर है. डब्लूएचओ की आलोचना इसलिए हो रही है कि उसने कोरोना वायरस की महामारी के ख़तरे को लेकर दुनिया को समय पर आगाह नहीं किया.

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि वो विश्व स्वास्थ्य संगठन को अमरीकी अनुदान बंद कर देंगे. जापान के उपप्रधानमंत्री और वित्त मंत्री तारो आसो ने हाल ही में कहा, "कुछ लोगों ने तो चीन के साथ विशेष संबंधों के कारण अब 'वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन' को 'चाइनीज़ हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन' कहना शुरू कर दिया है."

ताइवान के अधिकारियों ने डब्लूएचओ पर कोरोना वायरस को लेकर उसकी शुरुआती चेतावनी नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगाया.

आलोचकों का कहना है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चीन पर कुछ ज़्यादा ही भरोसा किया जबकि चीन ने वुहान में महामारी की बात को दबाने की कोशिश की थी. कोविड-19 की बीमारी को वैश्विक महामारी घोषित करने में हुई देरी के लिए डब्लूएचओ के प्रमुख डॉक्टर टेड्रोस अडहानोम की भी आलोचना हो रही है.

हालांकि संयुक्त राष्ट्र की इस एजेंसी का कहना है कि उसने समय पर ख़तरे के बारे में लोगों को आगाह कर दिया था. डब्लूएचओ के बचाव में ये भी दलील दी जा रही है कि सदस्य देशों पर उसका सीमित अधिकार है, ऐसे में जो सबसे अच्छा किया जा सकता है, उसने वो किया.

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और डोनल्ड ट्रंप

इमेज स्रोत, Reuters

रूस में क्या हो रहा है?

हफ़्ते भर पहले चीन ने रूस पर ये आरोप लगाया कि उसके यहां कोरोना वायरस से संक्रमण के नए मामले अब सीमापार रूस से आ रहे हैं. हालांकि रूस ने इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज कर दिया.

चीन का कहना है कि उसके उत्तर पूर्वी प्रांत हेइलॉन्गजियांग में समस्या बढ़ गई है क्योंकि रूस से लौटने वाले उसके नागरिक कोरोना संक्रमण लेकर आ रहे हैं.

इससे पहले रूस और इटली के बीच उस समय आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए जब मॉस्को से डॉक्टरों की एक टीम मदद के लिए मिलान पहुंच गई. इटली ने कहा कि रूस ने अपने जासूस डॉक्टरों की इस टीम में शामिल कर दिए हैं. इस पर रूस ने कहा कि इटली के प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति पुतिन से मदद मांगी थी.

अप्रैल के पहले हफ़्ते में न्यूयॉर्क पहुंची रूसी मदद को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया जब अमरीकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा कि अमरीका ने इसके लिए पैसे चुकाए हैं जबकि रूसी विदेश मंत्रालय का कहना था कि आधा सामान रूस की तरफ़ से मदद है.

ज़रूरी चीज़ों के लिए व्यापारिक प्रतिस्पर्धा

हाल ही में फ्रांस सिर्फ़ इसलिए मास्क नहीं ख़रीद पाया क्योंकि कुछ अमरीकी ख़रीदारों ने इसकी ज़्यादा ऊंची क़ीमत नक़द में अदा कर दी थी.

ऐसी ही शिकायत जर्मनी की तरफ़ से आई. इस बार निशाने पर साफ़ तौर पर अमरीका की सरकार थी. जर्मनी के अधिकारियों ने ये आरोप लगाया कि बर्लिन पुलिस के लिए दो लाख मास्क की खेप ले जा रही शिपमेंट को अमरीका ने थाईलैंड में 'ज़ब्त' कर लिया.

हालांकि ट्रंप प्रशासन ने इन आरोपों से इनकार किया है कि वो देश के बाहर किसी तरह की कोई चीज़ ज़ब्त कर रहे हैं या ऐसा कोई अभियान चला रहे हैं.

कोरोना वायरस की महामारी की मार झेल रहे स्पेन को हाल ही में तुर्की और यहां तक कि अपने फ्रांस जैसे यूरोपीय साझीदार देशों से बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है. फ्रांस ने तो अपने यहां से गुज़रने वाले पीपीई किट्स की खेप को रोक लिया था.

कुछ दिनों पहले चीन में मेडिकल प्रोडक्ट्स का एक ऑर्डर ब्राज़ील ने गंवा दिया था. ब्राज़ीली अख़बार 'ओ ग्लोबो' के अनुसार चीनी विक्रेता ने ब्राज़ील, फ्रांस और कनाडा की जगह पर अमरीका को तरजीह दी.

कोरोना वायरस

इमेज स्रोत, EPA

दुनिया के लिए इम्तेहान की घड़ी

बीबीसी के कूटनीतिक संवाददाता जोनाथन मार्कस कहते हैं, "दुनिया के सभी देशों की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के लिए ये इम्तेहान की घड़ी है. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. ये नेतृत्व की कसौटी का समय है. मौजूदा राजनेताओं का आख़िरकार इसी आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा कि उन्होंने संकट की घड़ी का कैसे सामना किया था."

कोरोना वायरस की महामारी की चपेट में लाखों लोग आ चुके हैं. दुनिया के देशों के बीच भरोसा कमज़ोर हुआ है.

दुनिया में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या इस समय 25 लाख 61 हज़ार के पार पहुंच गई है, अब तक एक लाख 77 हज़ार से ज़्यादा मौतें हुई है.

स्पेन के बिज़नेस स्कूल ईसेड के प्रोफ़ेसर मैनेल पीयरो के शब्दों में कहें तो कोरोना ने सरकारों और बाज़ार अर्थव्यवस्था का सबसे घिनौना चेहरा हमारे सामने लाकर रख दिया है.

भारत में कोरोनावायरस के मामले

यह जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाती है, हालांकि मुमकिन है इनमें किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के नवीनतम आंकड़े तुरंत न दिखें.

राज्य या केंद्र शासित प्रदेश कुल मामले जो स्वस्थ हुए मौतें
महाराष्ट्र 1351153 1049947 35751
आंध्र प्रदेश 681161 612300 5745
तमिलनाडु 586397 530708 9383
कर्नाटक 582458 469750 8641
उत्तराखंड 390875 331270 5652
गोवा 273098 240703 5272
पश्चिम बंगाल 250580 219844 4837
ओडिशा 212609 177585 866
तेलंगाना 189283 158690 1116
बिहार 180032 166188 892
केरल 179923 121264 698
असम 173629 142297 667
हरियाणा 134623 114576 3431
राजस्थान 130971 109472 1456
हिमाचल प्रदेश 125412 108411 1331
मध्य प्रदेश 124166 100012 2242
पंजाब 111375 90345 3284
छत्तीसगढ़ 108458 74537 877
झारखंड 81417 68603 688
उत्तर प्रदेश 47502 36646 580
गुजरात 32396 27072 407
पुडुचेरी 26685 21156 515
जम्मू और कश्मीर 14457 10607 175
चंडीगढ़ 11678 9325 153
मणिपुर 10477 7982 64
लद्दाख 4152 3064 58
अंडमान निकोबार द्वीप समूह 3803 3582 53
दिल्ली 3015 2836 2
मिज़ोरम 1958 1459 0

स्रोतः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

11: 30 IST को अपडेट किया गया

कोरोना वायरस के बारे में जानकारी
लाइन
कोरोना वायरस हेल्पलाइन

इमेज स्रोत, GoI

कोरोना वायरस के बारे में जानकारी

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)