बलूचिस्तान के गृह मंत्री का दावा, चीनी दूतावास पर हमले का मास्टरमाइंड भारत में: उर्दू प्रेस रिव्यू

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- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते पाकिस्तान के कराची स्थित चीनी वाणिज्य दूतावास पर हुआ चरमपंथी हमला, करतारपुर कॉरिडोर खोलने का फ़ैसला, चरमपंथी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक या रसूलअल्लाह के प्रमुख ख़ालिद रिज़वी को हिरासत में लिया जाना सबसे ज़्यादा सुर्ख़ियों में रहा.
सबसे पहले बात 23 नवंबर को कराची स्थित चीनी वाणिज्य दूतावास पर हुए चरमपंथी हमले की. इस हमले में तीन हमलावर समेत कुल सात लोग मारे गए थे. मरने वालों में दो आम नागरिक थे जबकि ड्यूटी पर तैनात दो सुरक्षाकर्मी भी मारे गए थे.
अलगाववादी संगठन बलूचिस्तान लिब्रेशन आर्मी ने हमले की ज़िम्मेदारी क़ुबूल कर ली है.

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'हमले के लिए भारत ज़िम्मेदार'
बलूचिस्तान के गृहमंत्री सलीम खोसा ने इसके लिए भारत को ज़िम्मेदार ठहराया है.
पत्रकारों से बातचीत के दौरान गृहमंत्री सलीम खोसा ने आरोप लगाया कि कि चीनी वाणिज्य दूतावास पर हुए हमले का मास्टरमाइंड असलम अच्छु भारत में है.
अख़बार जंग के अनुसार मंत्री सलीम खोसा का कहना था कि इससे पहले असलम अच्छु की मौत की ख़बर आई थी लेकिन वो ग़लत थी. उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी पूरी जानकारी है कि असलम अच्छु भारत के एक अस्पताल में अपना इलाज करवा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि इससे साफ़ ज़ाहिर है कि भारत बलूचिस्तान में हालात ख़राब करने में पूरी तरह शामिल है.
आतंकवाद निरोधी संगठन (सीटीडी) के प्रमुख राजा उमर ख़त्ताब के अनुसार दूतावास पर हमले के लिए सी-4 प्लास्टिक विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था जो कि पाकिस्तान में नहीं मिलता.
अख़बार जंग के अनुसार उमर ख़त्ताब का कहना है कि चरमपंथियों को ये विस्फोटक सामग्री उन्हीं शक्तियों से मिली हैं जिन्होंने ये हमला करवाया है.
उनके अनुसार ये पाकिस्तान के दुश्मन देश की ख़ुफ़िया एजेंसी का काम है.

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'पाकिस्तान और चीन एक साथ'
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने हमले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस मामले में सरकार, विपक्ष, सेना और चीनी सरकार सब एक साथ हैं.
अख़बार जंग के अनुसार इमरान का कहना था कि उन्होंने हाल ही में चीन के साथ जिन समझौतों पर दस्तख़त किए थे उनके विरोधियों ने चीनी वाणिज्य दूतावास पर हमले किए हैं.
अख़बार के अनुसार चीन की सरकार ने चीनी वाणिज्य दूतावास पर हुए चरमपंथी हमले को नाकाम करने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों की तारीफ़ की है.

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इमरान के अनुसार चीन ने आश्वासन दिया है कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपेक) पर दोनों देशों का सहयोग जारी रहेगा.
इस हमले को नाकाम करने में सुरक्षाकर्मियों का नेतृत्व कर रही महिला पुलिस उपाधीक्षक सुहाई अज़ीज़ तलपुर की हर जगह चर्चा हो रही है.
अख़बार दुनिया ने सुर्ख़ी लगाई है, ''क़ौम की बहादुर बेटी, दहशतगर्दों से लड़ने में आगे-आगे''.
अख़बार के अनुसार पुलिस विभाग ने क़ायद-ए-आज़म पुलिस मेडल के लिए उनके नाम की सिफ़ारिश की है.
अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार पाकिस्तान के सर्वोच्च पुलिस मेडल के लिए सिफ़ारिश की जाने वाली वो पाकिस्तान की पहली महिला पुलिस अफ़सर है.

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सुषमा ने ठुकराया पाकिस्तान का न्यौता
अब बात करतारपुर कॉरिडोर की. पाकिस्तानी सरकार ने भारत और पाकिस्तान के बीच करतारपुर कॉरिडोर को खोलने का फ़ैसला किया है.
अख़बार जंग के अनुसार 28 नवंबर को पाकिस्तान ने एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया है जिसमें इसकी बुनियाद रखी जाएगी.
अख़बार के अनुसार पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़रैशी ने इसके लिए भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को करतारपुर आने की दावत भी दी है, लेकिन उसी अख़बार के अनुसार सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान की इस दावत को ठुकरा दिया है.
अख़बार के अनुसार पाकिस्तान ने भारतीय पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिदंर सिंह और उनके कैबिनेट सहयोगी नवजोत सिंह सिद्धू को भी करतारपुर आने की दावत दी है.
अख़बार के अनुसार सिद्धू का कहना था कि ये एक ऐतिहासिक मौक़ा है, इसका हिस्सा बनना गर्व की बात है और अगर भारत सरकार ने उन्हें जाने की इजाज़त दी तो वो पाकिस्तान ज़रूर जाएंगे.
जंग के अनुसार सुषमा स्वराज ने कहा है कि भारतीय मंत्री हरसिमरत कौर और हरदीप पूरी इस अवसर पर पाकिस्तान जाएंगे.
तहरीक-ए-लब्बैक के प्रमुख नज़रबंद
एक अन्य महत्वपूर्ण ख़बर जो पाकिस्तान के अख़बारों में छायी रही वो है तहरीक-ए-लब्बैक के प्रमुख ख़ालिद हुसैन रिज़वी को नज़रबंद करना.
लब्बैक के कई नेता गिरफ़्तार कर लिए गए हैं.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार तहरीक-ए-लब्बैक ने 25 नवंबर को सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्नश करने का फ़ैसला किया है. तहरीक ने 25 नवंबर को यौम-ए-शोहदा मनाने का फ़ैसला किया है.
लेकिन पाकिस्तान सरकार और स्थानीय प्रशासन ने उन्हें इस बात की इजाज़त नहीं दी थी और उन्हें अपना ये कार्यक्रम वापस लेने की अपील की थी लेकिन जब उन्होंने सरकार की बात नहीं मानी तो सरकार को सख़्त क़दम उठाना पड़ा.
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