भारत-पाकिस्तान में युद्ध की कोई गुंजाइश नहीं: पाक सेना

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पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग इंटर-सर्विस पब्लिक रिलेशन के डीजी (डायरेक्टर जनरल) मेजर जनरल आसिफ़ गफ़ूर ने सोमवार को कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की कोई गुंजाइश नहीं है.
उन्होंने कहा कि इस उपमहाद्वीप में दोनों देश परमाणु शक्ति संपन्न हैं. रावलपिंडी में एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही है.
मेजर जनरल गफ़ूर ने आरोप लगाया कि नियंत्रण रेखा पर भारत की तरफ़ से 2017-18 में युद्धविराम उल्लंघन सबसे ज़्यादा हुए हैं.
उन्होंने कहा कि केवल 2017 में सीमा रेखा पर युद्धविराम के उल्लंघन में 52 लोगों की मौत हुई और 254 लोग ज़ख़्मी हुए हैं.
गफ़ूर ने यह भी आरोप लगाया किया भारतीय सेना निर्दोष नागरिकों को निशाना बना रही है. वहीं भारत सीमा पर तनाव के लिए पाकिस्तान को ज़िम्मेदार बताता है.

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जनरल आसिफ़ गफ़ूर ने कहा कि पाकिस्तान भारत की तरफ़ से होनी वाली गोलीबारी का जवाब देता रहेगा. उन्होंने कहा कि भारत को 2003 में हुए युद्धविराम के समझौते का सम्मान करना चाहिए.
गफ़ूर ने कहा, ''भारत को फ़ैसला करना चाहिए कि कैसे आगे बढ़ना है. हम दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं और युद्ध की कोई गुंजाइश नहीं है. अगर हमारे नागरिकों को निशाना बनाया जाएगा को हम जवाब देंगे.
पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग के प्रमुख जनरल गफ़ूर ने कहा, ''भारतीय इस बात को समझते हैं कि वो किस रास्ते पर जाना चाहते हैं. पाकिस्तान शांति चाहता है इसका मतलब ये ये हमारी कमज़ोरी नहीं है.''
जनरल गफ़ूर ने अफ़ग़ानिस्तान की सीमा पर गोलीबारी को लेकर कहा कि पश्चिमी सीमा पर तनाव के 71 वाक़ये हुए हैं और इसमें पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी मारे हैं.
उन्होंने कहा कि अमरीका के साथ पाकिस्तान के रिश्ते ख़राब हुए हैं, लेकिन पाकिस्तान आतंकवाद के ख़िलाफ़ जंग जारी रखेगा. गफ़ूर ने कहा कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ पाकिस्तान ने जो किया है उसे दुनिया का कोई दूसरा सशस्त्र बल नहीं कर सकता.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने हितों से समझौता नहीं करेगा.
जनरल गफ़ूर ने कहा कि हक़्क़ानी नेटवर्क की कोई स्थायी मौजूदगी नहीं है, लेकिन वो पूरी तरह से ख़त्म नहीं हुआ है.
तनाव के बीच सकारात्मक क़दम भी
सीमा पर तनाव के बीच कुछ सकारात्मक पहल भी सामने आई हैं. इस सिलसिले की शुरुआत इसी साल मार्च में उस वक़्त हुई जब इतिहास में पहली बार इस्लामाबाद में भारतीय दूतावास के डिफेंस अटैशे को पाकिस्तान डे परेड में आमंत्रित किया गया.
इस साल ही दोनों देशों की सेना शंघाई सहयोग संगठन के तहत सितंबर में रूस में आयोजित होने वाली संयुक्त सैन्य अभ्यास में भी भाग लेने के लिए तैयार हो गई हैं.
लेकिन कश्मीर में भारतीय सेना को चरमपंथ का सामना करना पड़ता है जिसके लिए वह अक्सर पाकिस्तान को ज़िम्मेदार क़रार देता है. पिछले कुछ महीने से नियंत्रण रेखा पर दोनों सेनाओं के बीच संघर्ष जारी है और पाकिस्तान भारत पर पहल करने का आरोप लगाता है.
साथ ही कुछ ही दिन पहले ही पाकिस्तान की ओर से सद्भावना के तौर पर में एक बीमार भारतीय क़ैदी को रिहा किया गया और इससे पहले एक भारतीय नागरिक को वापस भेज दिया गया जो ग़लती से सीमा पार कर आया था.

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पाकिस्तानी सेना क्या संदेश देना चाहती है?
क्या पाकिस्तानी सेना की तरफ़ से उठाए गए दोस्ताना कदम को भारत के साथ संबंध बहाल करने की इच्छा के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है?
पिछले महीने बीबीसी उर्दू के संवाददाता उमर दराज़ नंगियाना से पाकिस्तान के रक्षा विश्लेषक ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) साद मोहम्मद ने कहा था, "पाकिस्तानी सेना का नेतृत्व यह सोचता है कि 70 सालों के संघर्ष के बावजूद कश्मीर के संघर्ष का कोई हल नहीं निकला है. यदि अगले 300 सालों तक ये संघर्ष जारी रहा तो समस्याएं हल नहीं होंगी. ऐसी सूरत बनी रही तो दोनों देश तरक्की नहीं कर पाएंगे."
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