मेक्सिको: भूकंप की कहानी, चश्मदीद की ज़ुबानी

इमेज स्रोत, CLAYTON CONN
मंगलवार को मेक्सिको की राजधानी मेक्सिको सिटी में आए शक्तिशाली भूकंप में 225 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. रिक्टर पैमाने पर 7.1 की तीव्रता वाले भूकंप में दर्जनों इमारतें जमींदोज़ हो गईं.
भूकंप के समय एक फ़ोटोग्राफ़र अपने कैमरे के साथ शहर की एक सड़क पर मौजूद थे. उनके पास कैमरा था जिससे उन्होंने तबाही के मंजर की कई तस्वीरें लीं.
फ़ोटोग्राफ़र क्लेटन कॉन 2009 से मेक्सिको में रहते हैं. भूकंप ने उनके पास के शहर बेनितो हुआरेज़ के पोर्टेल्स क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया.
स्थानीय समय के मुताबिक 1.14 बजे जब भूकंप आया तो कॉन अपनी महिला मित्र के साथ बाहर थे.
आगे पढ़ें फ़ोटोग्राफ़र क्लेटन कॉन के शब्दों में भूकंप से मेक्सिको सिटी की तबाही का मंजर.

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मैं जिस इलाके में रहता हूं वहां बहुत तबाही मची, वहां रहने वाले कई लोग, मेरे कई पड़ोसी तबाह हो गए.
यह तस्वीर उस पांच मंजिला इमारत की है जो मेरे अपार्टमेंट से थोड़ी ही दूर है.
इसके नीचे की पांच मंजिलें पूरी तरह ढह गईं. पड़ोसियों ने बताया कि लोग अब भी अंदर हैं. लेकिन यह इमारत अभी खड़ी है... मैं समझता हूं कि लोग अब भी वहां मौजूद हैं. और उनके पड़ोसी उस बिल्डिंग को नहीं छू सकते क्योंकि वो डरते हैं कि कहीं यह और न ढह जाए.
मेरा कैमरा साथ था, इसलिए हम दिन भर सड़कों पर तस्वीरें लेते रहे और घर आने की कोशिश भी करते रहे.
कुछ ही दूरी पर मैंने एक इमारत के मलबे के चारों ओर इकट्ठे लोगों को देखा, यह इमारत आठ या दस मंजिला थी.

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पड़ोसी अपनी सुरक्षा के लिए साइकिल के हेलमेट पहन कर बचाव कार्य में राहतकर्मियों का हाथ बंटा रहे थे.

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जब उन्हें मलबे के भीतर किसी के होने का संकेत मिलता या उन्हें कोई हरकत महसूस होती तो वो अपनी बंद मुट्ठी से इसका संकेत देते. इसके साथ ही हज़ारों लोगों की जमा भीड़ अपनी बंद मुट्ठी उठा देती और फ़िर वहां एकदम से चुप्पी छा जाती.
आप तक सिर्फ़ गाड़ी पर लगे जेनरेटर की आवाज़ आती है, जिसे वहां रौशनी के लिए लगाया गया था. इसके बाद राहतकर्मी वहां नीचे दबे व्यक्ति से बात करने की कोशिश करते.

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लोगों को इस भूकंप से हुए नुकसान का शुरू में एहसास नहीं हुआ, इसलिए वो पार्क और अन्य जगहों पर लोगों के साथ मज़ाक करते रहे, जैसा कि भूकंप की स्थिति में सुरक्षित लोग अमूमन करते हैं.

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चूंकि मेक्सिको सिटी में अक्सर भूकंप आता है तो जब लोगों को अहसास हुआ कि यह छोटा भूकंप नहीं है तो कई लोग सदमे की स्थिति में आ गए और कई लोग शांत होकर प्रतिक्रियाएं दे रहे थे.

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लोग घरों, दफ़्तरों से अपना सामान उठाकर बस चल दिए.
भूकंप के 20 मिनट बाद मैंने ऑफ़िस के कर्मचारी जैसे दिखने वाले लोगों को फ़ावड़ा और कुदाल जैसी चीज़ें ले जाते देखा. मुझे नहीं पता उन्हें ये चीज़ें कहां से मिलीं. कई लोग शर्ट और पैंट पहने थे और कई युवा, छात्र के जैसे लगने वाले लोग हाथ में फ़ावड़े लिए दौड़ रहे थे.

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अधिकारी फ़ौरन सभी प्रभावित जगहों, इमारतों तक नहीं पहुंच सके थे. राहतकर्मी पर्याप्त नहीं थे. इसलिए लोगों में एक हद तक सदमे और घबराहट की स्थिति थी, लेकिन साथ ही उनमें सहानुभूति की भावना वाकई मज़बूत थी.
लोग खाने का सामान बांट रहे थे. यह वाकई एक गर्म दिन था.

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मैंने एक महिला को देखा, जो रो रही थी. मैंने कई उदास चेहरों को देखा, लेकिन ये चेहरे अभी पूरी तरह हारे नहीं थे.
यह भूकंप 1985 में आए उस भूकंप की 32वीं सालगिरह पर आया था जिसमें 10 हज़ार के करीब लोग मारे गए थे और करीब 30 हज़ार लोग घायल हुए थे.
उस भूकंप ने मेक्सिको सिटी और उसके आस पास खासी तबाही मचाई थी. तब 400 से अधिक इमारतें ढह गई थीं और हज़ारों क्षतिग्रस्त हो गई थीं.

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उस भूकंप की सालगिरह पर हर साल यहां भूकंप ड्रिल का आयोजन किया जाता है. मंगलवार को आए भूकंप से करीब 40 मिनट पहले ही यह ड्रिल की गई थी.
ड्रिल के दौरान भूकंप के अलार्म की आवाज़ आती है. यह खासा असरदार है. इसके बजने के बाद आपको 40 सेकेंड से एक मिनट में इमारतों से बाहर निकलना होता है.
लेकिन मंगलवार को जब असल में भूकंप आया तो अलार्म फ़ौरन नहीं बजा.

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इस तस्वीर में मेक्सिको के सैनिक दिख रहे हैं, जो तूफ़ान और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं में राहत के काम के लिए पहुंचते हैं.
इनकी बांह पर लगी पीली पट्टी बताती है कि वो आपदा प्रबंधन में लगे हैं और पीड़ितों को सहायता पहुंचा रहे हैं.
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