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चीनी राष्ट्रपति के लिए थी मोदी-ट्रंप की ये केमिस्ट्री?
भारतीय प्रधानमंत्री मोदी और अमरीका राष्ट्रपति की मुलाकात हमेशा ही चर्चा का विषय बनी है- चाहे वो मोदी-ओबामा की एक साथ चाय हो या फिर मोदी का ट्रंप से गले मिलना.
इस बार भी मोदी और अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप की पहली मुलाकात सोशल मीडिया और ख़बरों में छाई रही.
अमरीकी अख़बारों की बात करे तो न्यूयॉर्क टाइम्स का कहना है कि दोनों 'राष्ट्रवादी नेता' सोशल मीडिया के इस्तेमाल में माहिर हैं और इसके ज़रिए सीधे लोगों से जुड़ते हैं.
अख़बार के अनुसार व्हाइट हाऊस के एक आला अधिकारी के अनुसार मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं की आत्मीयता काफ़ी हद कर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को दिखाने के लिए थी.
हाल में चीनी राष्ट्रपति उत्तर कोरिया से बात कर उसके बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर रोक लगाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में असमर्थ रहे थे.
अख़बार के अनुसार मुलाक़ात से पहले ट्रंप सरकार भारत को 22 ड्रोन बेचने के लिए राज़ी हो गई जिनका इस्तेमाल भारत हिंद महासागर में चीन के ख़िलाफ़ चीनी नौसेना की जासूसी करने के लिए कर सकता है.
वॉशिंगटन पोस्ट की बात करें तो वेबसाइअट में छपी एक ख़बर के अनुसार जैसा कि ट्रंप ने कहा वो और मोदी सोशल मीडिया पर बड़े नेता हो सकते हैं लेकिन उनके सामने बैठे दर्जनों पत्रकारों को इससे कोई फायदा होता नहीं दिखाई दिया.
पत्रकारों को मुलाक़ात से पहले ही बता दिया गया था कि कोई भी प्रश्न नहीं लिया जाएगा. हालांकि वेबसाइट के अनुसार साझा प्रेस कॉन्फ्रेस के दौरान पत्रकारों के सवालों के जवाब देना आम बात है.
ख़बर में कहा गया है कि इस दौरान मोदी और ट्रंप के बीच पेरिस जलवायु समझौते को ले कर कोई बातचीत नहीं हुई.
हाल में ट्रंप ने पेरिस जलवायु समझौते से बाहर निकलने का एलान किया था और कहा था कि इस समझौते के तहत अमरीका से उम्मीद की जा रही है कि वो अपने कोयले के खदानों को बंद करेगा लेकिन भारत और चीन पर कोई ऐसी पाबंदी नहीं है.
ट्रंप के साथ मुलाकात से पहले द वॉल स्ट्रीट जर्नल में मोदी का एक लेख छपा है. इसमें पीएम मोदी ने लिखा कि दोनों देश साइबर तकनीक, स्वास्थ्य और अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में साथ काम करेंगे.
उन्होंने लिखा, "जब भी भारत और अमरीका एक साथ काम करते हैं दुनिया को इससे फायदा होता है."
यूएसए टूडे ने इस मुलाकात के संबंध में अमरीका और भारत में चार समानताओं के बारे में लिखा. अख़बार के अनुसार (1) दोनों देश दुनिया के बड़े गणतंत्र हैं, (2) दोनों नेताओं को आलोचक मुसलमान विरोधी मानते हैं, (3) अमरीकी तकनीकी कंपनियों में बहुत संख्या में भारतीय काम करते हैं और (4) दोनों ही देश चीन को आर्थिक और सैन्य ताकत के तौर पर एक ख़तरा मानते हैं.
एक और ख़बर में न्यूज़ वेबसाइट ने कहा है कि ट्रंप का कहना है कि खास तौर से कथित इस्लामिक स्टेट के विरोध में लड़ने के लिए दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा.
ब्रितानी अख़बार फाइनेंशियल टाइम्स की वेबसाइट में छपी एक ख़बर के अनुसार ट्रंप नेताओं से हाथ मिलाना पसंद करते हैं ना कि गले मिलना. लेकिन मोदी को 'सच्चा मित्र' कह चुके ट्रंप के लिए उनसे हाथ मिलाना और फिर गले मिलना देखना दिलचस्प रहा.
अख़बार के अनुसार जब मोदी ने ट्रंप को गले लगाया तो जर्मोफोब ट्रंप (कीटाणुओं से डरने वाले ट्रंप) को इसका जवाब गले मिल कर देना पड़ा.
अख़बार का कहना है कि दोनों नेताओं की छोटी सी मुलाकात के दौरान अच्छी केमिस्ट्री देखने को मिली.
अमरीका से छपने वाली टाइम मैगज़ीन की वेबसाइट पर छपी एक ख़बर के अनुसार भविष्य में दोनों देशों के रिश्ते तय करने में इस केमिस्ट्री की भूमिका अहम होगी.
दोनों नेता संबंधों में आत्मीयता दिखाना चाहते थे और दो बार गले भी मिले, लेकिन दोनों ने पत्रकारों के सवालों के कोई जवाब नहीं दिए.
अख़बार का कहना है कि अमरीकी विदेश मंत्रालय के हिज़बुल मुजाहिदीन नेता मोहम्मद यूसुफ़ शाह उर्फ़ सैयद सलाहुद्दीन का नाम अंतरराष्ट्रीय आंतकवादियों की सूची में शामिल करना ये बताता है कि अमरीका भारत के साथ काम करना चाहता है.
हालांकि अख़बार ये भी कहता है कि ये क़दम पाकिस्तान के ख़िलाफ़ अमरीका की सख्त नीति का संकेत है या नहीं ये अभी नहीं कहा जा सकता.
ब्रितानी अख़बार इंडिपेंडेट की वेबसाइट में छपी एक ख़बर के अनुसार जानकारों का मानना है कि विश्व नेताओं के साथ ट्रंप की मुलाकात अधिकतर सौदों के इर्दगिर्द होती है. भारत के साथ भी उनकी मुलाक़ात में सैन्य सहयोग और हथियारों के सौदे हुए.
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