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दुनिया चाहती तो भारत के बाल नोंच लेती...
अमरीका के वर्जिनिया में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित किया है. आइए एक नज़र डालते हैं मोदी के संबोधन की ख़ास बातों पर.
1. सर्जिकल स्ट्राइक एक ऐसी घटना थी, अगर दुनिया चाहती तो भारत के बाल नोंच लेती, हमें कटघरे में खड़ा कर देती, विश्व हम से जबाव मांगता, दुनिया में हमारी आलोचना होती, लेकिन पहली बार आपने अनुभव किया होगा भारत के इतने बड़े कदम पर विश्व में किसी ने सवाल नहीं उठाया. जिनकों भुगतना पड़ा उनकी बात अलग है.
2. 21वीं सदी का हिंदुस्तान बनाने की दिशा में भारत अनेक आर्थिक क्षेत्रों में उदारतापूर्वक अपनी नीतियों को आगे बढ़ा रहा है. देश सिर्फ रुपयों से ही आगे बढ़ता है, ऐसा नहीं है, उसकी सबसे बड़ी ताकत उसका मानव संसाधन और प्राकृतिक सम्पदा होती है. जो देश जवान हो, उसके सपने भी जवान होते हैं, उसके सामर्थ्य में भी जवानी होती है.
3. भारत को आज़ादी के बाद जितनी मात्रा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मिला होगा, उससे आज कहीं अधिक मात्रा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भारत में आ रहा है. दुनिया की तमाम क्रेडिट एजेंसियां भारत के सामर्थ्य को स्वीकार करती हैं. विश्व भारत को निवेश के लिए शीर्ष जगहों में देख रहा है.
4. भारत का बुद्धिधन जो आज विश्वभर में फैला हुआ है, उसे मैं निमंत्रण देता हूं कि आपके पास जो सामर्थ्य जो अनुभव है, जो भारत के काम आ सकता है, जिस देश ने आपको बड़ा बनाया, उस मिट्टी का कर्ज चुकाने के लिए इससे उत्तम अवसर शायद कभी नहीं आएगा.
5. तीन साल में आपने देखा होगा कि भारत के विदेश मंत्रालय ने मानवता के हिसाब से नई ऊंचाइयों को हासिल किया है. 80 हजार से ज्यादा हिंदुस्तानी, दुनिया के किसी भी देश में कहीं ना कहीं संकट में फंसे तो प्रो-एक्टिव होकर भारत सरकार उन्हें सही-सलामत ले आई. रात के 2 बजे भी दुनिया के किसी भी देश में किसी पीड़ित भारतीय ने ट्वीट किया हो, 15 मिनट में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का जबाव आता है, 24 घंटे में सरकार एक्शन लेती है और परिणाम लाकर रहती है.
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