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मोदी और ट्रंप की पहली मुलाक़ात में क्या होगा?
- Author, ब्रजेश उपाध्याय
- पदनाम, वाशिंगटन से, बीबीसी संवाददाता
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति ट्रंप से मिलने जा रहे हैं और दोनों नेताओं की ये पहली मुलाकात होगी.
व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता का कहना है कि मोदी के स्वागत के लिए भव्य तैयारी की जा रही है और वो पहले विदेशी नेता होंगे जिनके सम्मान में ट्रंप प्रशासन के दौरान व्हाइट हाउस में रात्रि भोज का आयोजन किया जा रहा है.
डोनल्ड ट्रंप अपने चुनाव से ठीक दो हफ़्ते पहले भारत और प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ़ों के पुल बांध रहे थे और चुनाव के बाद के कुछ दिनों तक भी टेलीफ़ोन पर हुई बातचीत में ये प्यार बरक़रार था.
माना जा रहा था कि मोदी और ओबामा के रिश्तों में जो गर्माहट थी कुछ वैसा ही या उससे भी बेहतर इस नए रिश्ते में नज़र आएगा. लेकिन कुछ ही हफ़्तों के बाद ट्रंप के वाशिंगटन से एच-1-वी वीज़ा पर लगाम कसने की आवाज़ें तेज़ होने लगीं.
ट्रंप का भारत पर हमला
कुछ भारतीय ट्रंप के आर्थिक राष्ट्रवाद और कथित मुसलमान विरोधी बयानों की बलि चढ़े और फिर पेरिस जलवायु समझौते से निकलने का एलान करते हुए ट्रंप ने एक तरह से पहली बार भारत पर सीधा हमला किया.
ट्रंप ने कहा था कि भारत इस समझौते में इसलिए शामिल हुआ है क्योंकि उसे इसके बदले विकसित देशों से अरबों डॉलर दिया जा रहा है.
और अब कुछ ऐसे ही बदले-बदले से मौसम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाशिंगटन पहुंच रहे हैं.
भारत के बारे में ट्रंप की अब क्या सोच है फ़िलहाल न तो इसका अंदाज़ा किसी को लग पाया है और न ही भारत के बारे में उनके प्रशासन की कोई नीति स्पष्ट तौर से नज़र आई है.
व्यापारिक संबंधों पर बात
वाशिंगटन के थिंक टैंक हडसन इंस्टीट्यूट में भारत-अमरीका मामलों की जानकार अपर्णा पांडे का कहना है कि फ़िलहाल तो मोदी की सबसे बड़ी चुनौती होगी ट्रंप के साथ एक रिश्ता कायम करना.
वो कहती हैं, "एक तरफ़ मेक इन इंडिया है, दूसरी तरफ़ मेक अमेरिका ग्रेट अगेन है. क्या अमरीका पहले की तरह व्यापार रिश्तों को मज़बूत करने की बात करेगा या फिर पूछेगा कि आप हमारे यहां कितना निवेश करेंगे या कितनी नौकरियां पैदा करेंगे. लेकिन सबसे पहले ये देखना होगा कि इस पहली मुलाक़ात में दोनों के बीच वही आत्मीयता पैदा होगी जो ओबामा और मोदी के बीच थी?"
भारतीय और अमरीकी अधिकारियों के अनुसार आतंकवाद, एच-1बी वीज़ा, व्यापार संबंधों पर बात होगी.
कुछ समाचार एजेंसियां सूत्रों के हवाले से कह रही हैं कि संभव है कि ट्रंप भारत को हवाई निगरानी करनेवाले गार्डियन ड्रोन बेचने का एलान कर सकते हैं.
बहुत ज़्यादा उम्मीद नहीं
ये सौदा दो अरब डॉलर का है लेकिन भारत के नज़रिए से ये एक बड़ी उपलब्धि होगी क्योंकि वो 2015 से ही इसकी मांग करता रहा है और अगर ऐसा हुआ तो तो वो पहले ऐसा देश होगा जो औपचारिक रूप से अमरीका का रणनीतिक साझेदार नहीं है लेकिन फिर भी उसे ये ड्रोन बेचे जाएंगे.
ओबामा प्रशान में दक्षिण एशिया मामलों के निदेशक रह चुके जोशुआ व्हाइट का कहना है कि मुलाक़ात के दौरान मोदी की ये भी कोशिश होनी चाहिए कि वो पाकिस्तान और चीन पर ट्रंप की नीति क्या होने जा रही है इसका अंदाज़ा ले सकें.
कहते हैं, "अंदाज़ा है कि ट्रंप चरमपंथी गुटों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के लिए पाकिस्तान पर दबाव बढाएंगे. लेकिन क्या वो सिर्फ़ अफ़गानिस्तान में सक्रिय हक्कानी नेटवर्क जैसे गुटों के लिए होगा या फिर लश्करे तैबा और जैश ए मोहम्मद के ख़िलाफ़ भी होगा ये जानना भारत के लिए अहम होगा."
कुछ लोगों का ये भी कहना है कि ये दौरा कामयाब तभी कहलाएगा जब ट्रंप के लिए इसमें कुछ ऐसा हो जिसे वो अपने चाहनेवालों के बीच एक जीत की तौर पर पेश कर सकें.
विश्लेषकों ने इस दौरे से एक शुरूआती मुलाक़ात से ज़्यादा की उम्मीदें नहीं लगाई हैं लेकिन ट्रंप की ख़ासियत रही है कि वो कुछ ऐसा कर जाते हैं जिसकी किसी को उम्मीद नहीं रहती. अब वो भारत के हक में जाएगा या उसके ख़िलाफ़ ये देखने वाली बात होगी.
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