अमरीका के ट्रैवल बैन की सूची में क्यों नहीं है पाकिस्तान

- Author, ब्रजेश उपाध्याय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वाशिंगटन
ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि फ़िलहाल पाकिस्तान या अफ़गानिस्तान को उन प्रतिबंधित देशों की सूची में शामिल करने की कोई योजना नहीं है जहां से लोगों के आने या वीज़ा जारी करने पर पाबंदी लगी हुई है.
व्हाइट हाउस ने बीबीसी के सवाल के जवाब में कहा है कि इस वक़्त बहुत सारी अफ़वाहें चल रही हैं.
एक प्रवक्ता का कहना था, "इस वक़्त किसी और देश को इस लिस्ट में शामिल करने की योजना नहीं है."
पिछले हफ़्ते जब राष्ट्रपति ट्रंप ने सात मुसलमान-बहुल देशों के लोगों के अमरीका में घुसने पर अस्थाई पाबंदी और कड़ी निगरानी करने का आदेश जारी किया तो पाकिस्तानी समुदाय में भी काफ़ी घबराहट फैल गई थी.

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लटकी थी तलवार
पाकिस्तान उन देशों की सूची - इराक, ईरान, सीरिया, सोमालिया, लीबिया, सूडान और यमन - में नहीं था लेकिन ट्रंप के आदेश में लिखा था कि 90 दिनों के अंदर स्थिति पर नज़र रखी जाएगी और ज़रूरत पड़ने पर ये लिस्ट बढ़ाई भी जा सकती है.
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता का कहना था कि इन सात देशों पर पाबंदी इसलिए लगाई गई है क्योंकि वहां के नागरिकों के लिए वीज़ा जारी करने के लिए जिस तरह की जानकारी अमरीका को चाहिए वो नहीं मिल रही थी. उनका कहना था कि इन देशों को लेकर ये शिकायत ओबामा प्रशासन के समय से ही थी.
प्रवक्ता का कहना था कि पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान के नागरिकों के लिए उन्हें जिस तरह की जानकारी चाहिए वो वहां के अधिकारियों से उन्हें मिल रही है.
लेकिन साथ ही उनका कहना था,"अगर इसमें कोई तब्दीली आती है तो पाकिस्तान या किसी और देश को इसमें शामिल किया जा सकता है."

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चिन्तित हो गया था पाकिस्तान
कई पाकिस्तानी वकीलों ने भी ये सलाह जारी की थी कि पाकिस्तानी मूल के लोग अभी अपने देश की यात्रा न करें और जो वहां गए हुए हैं वो जल्द से जल्द लौटें.
लोगों में घबराहट का ये आलम है कि बहुतों ने महीनों पहले बुक करवाई हुई अपनी टिकटें रद्द करवा दीं हैं और कइयों ने तो उमरा और ज़ियारत की यात्राएं भी मुल्तवी कर दी हैं.
अमरीका और पाकिस्तान के संबंधों में पिछले बरसों में ख़ासा ठंडापन नज़र आया है लेकिन नए रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने पिछले दिनों बयान दिया था कि सभी शिकायतों के बावजूद अमरीका को पाकिस्तान से किसी न किसी तरह का संबंध बनाए रखने की ज़रूरत है.
अमरीका में इस बात को लेकर ख़ासी चिंता रही है कि पाकिस्तान परमाणु हथियारों से संपन्न इकलौता मुसलमान-बहुल देश है और उसके साथ पूरी तरह से संबंध तोड़ना दुनिया के लिए सही फ़ैसला नहीं होगा.
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