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'कांग्रेस की ग़लतियाँ सबको पता है' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष और रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव कांग्रेस से इतना ज़यादा ख़फ़ा पिछले 10-12 वर्षों में शायद पहली बार हुए हैं. वजह बिलकुल साफ़ है कि बिहार की 40 लोकसभा सीटों में से 39 सीटों पर कांग्रेस अपने प्रत्याशियों को खड़ा करके मुख्य रूप से राष्ट्रीय जनता दल और लोक जनशक्ति पार्टी गठबंधन यानी राजद-लोजपा के ही आधार वोट को चोट पहुंचा रही है. पहले दौर के मतदान के बाद राजद-लोजपा गठबंधन को ये लगने लगा है कि कांग्रेस के पक्ष में जो भी मुस्लिम वोट पडेंगे, वे सब राजद-लोजपा खाते के ही होंगे. शायद इसी ख़तरे को भांप कर लगता है लालू जी ने दरभंगा लोकसभा क्षेत्र की चुनावी जनसभा में मुस्लिम समाज को कांग्रेस से सचेत रहने की सलाह दी. बाबरी मस्जिद मुद्दा
ज़ाहिर है कि इस काम के लिए बाबरी मस्जिद तोड़े जाने के मामले से ज़्यादा कारगर हथियार कोई दूसरा हो नहीं सकता था. इसलिए लालू ने साफ़-साफ़ कह दिया कि 'मस्जिद को विध्वंस से बचाने की ज़िम्मेदारी तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने नहीं निभाई'. कांग्रेस से लालू की नाराज़गी की दूसरी वजह भी है. राज्य के छोटे-बड़े सभी कांग्रेसी नेता बिहार में लालू-राबड़ी शासन काल को राज्य के लिए 'काला अध्याय' बता रहे हैं. इसी संदर्भ में लालू से बातचीत के लिए जब मैं उनके आवास पर पहुंचा तो वो अपने ठेठ अंदाज़ में दाल-भात-सब्ज़ी खाते हुए दिखे. लेकिन अंदर से वो बहुत उत्साहित नहीं बल्कि थोड़ा खिन्न लग रहे थे. भोजन के दौरान ही उन्होंने टेलीफ़ोन पर निर्वाचन आयुक्त नवीन चावला से बात की और उन्हें कहा "छपरा में जो कमज़ोर वर्ग के लोगों को वोट डालने से जबरन रोका गया और मारा पीटा गया उस पर मुनासिब कार्रवाई कीजिए." इतने में एक दूसरा फ़ोन आया और लालू जी फ़ोन के दूसरे छोर वाले व्यक्ति पर बरसने लगे. कहा "आपने इतना बड़ा झूठ कैसे छाप दिया कि मैंने आडवाणी जी के लिए अपशब्द कहे हैं." तमतमाए हुए लालू प्रसाद कहने लगे, "लगता है मीडिया के भी कुछ लोग दल विशेष की पार्टी वाले बन गए हैं." 'कांग्रेस-मुस्लिम'
मौक़ा देख मैंने उनसे जब बातचीत शुरू की तो उन्होंने 'कांग्रेस-मुस्लिम' प्रकरण पर दो टूक शब्दों में अपने तमाम क्षोभ व्यक्त कर दिए. लालू जी बोले, "आज़ादी के बाद साठ साल में कांग्रेस सत्ता ने मुसलमानों के लिए कुछ नहीं किया. जब हम लोग कांग्रेस के साथ जुड़े तो सच्चर कमेटी और रंगनाथ मिश्र आयोग की अनुशंसाएँ आईं." मैंने पूछा कि क्या कांग्रेस के प्रति मुस्लिम मतदाताओं के बढ़ते रुझान की ख़बर के कारण आप ऐसी टिप्पणियाँ कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा, "कांग्रेस पार्टी तो ख़ुद बाबरी मस्जिद मामले में देशवासियों से माफ़ी माँग चुकी है, इसलिए मैंने कोई नई बात नहीं कही, जो फ़ैक्ट हैं वो फ़ैक्ट है. सब जानते हैं कि उस समय कांग्रेसी सत्ता से क्या-क्या ग़लतियाँ हुईं." शुक्रवार को बिहार के दरभंगा लोकसभा क्षेत्र की चुनावी जनसभा में उन्होंने बाबरी मस्जिद के विध्वंस के लिए भारतीय जनता पार्टी सहित कांग्रेस को भी ज़िम्मदार ठहराया था. लालू प्रसाद से बहुत लंबी बातें हुईं, सबका निचोड़ लालू की इस बात में था कि बाद में सभी सेक्युलर पार्टियों को एक साथ होना ही है. साथ ही उन्होंने ये भी जोड़ा कि वो अपने जनाधार में किसी को सेंध लगाने की छूट देने वाली दोस्ती नहीं करेंगे. पूरी बातचीत के दौरान लालू प्रसाद बार-बार कहते रहे कि वो अपनी जीत को लेकर तनिक भी संशय में नहीं हैं और न ही इस बाबत कोई चिंता या दबाव उन पर है. लेकिन ये सब कहते हुए भी वो अपने स्वाभाविक रंग में नहीं दिख रहे थे. कहीं कोई दर्द ज़रूर छिपा था. |
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