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जम्मू: आसान नहीं कांग्रेस की राह | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर के जम्मू संसदीय क्षेत्र में पहले चरण में 16 अप्रैल को मतदान होगा. कांग्रेस के लिए इस सीट को कायम रखना बेहद चुनौतीपूर्ण है. दक्षिण-पश्चिम में जम्मू के मैदानी क्षेत्र से लेकर उत्तर में हिमालय की पीर पंजाल पहाड़ियों तक फैले इस संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस ने एक बार फिर मदन लाल शर्मा को चुनावी मैदान में उतारा है. वर्ष 2004 के चुनाव में कांग्रेस का पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के साथ गठबंधन था, लेकिन इस बार पीडीपी विरोध में है. कांग्रेस का चुनावी तालमेल इस बार नेशनल कॉन्फ्रेंस से है. सीधा मुक़ाबला मदन लाल शर्मा का सीधा मुक़ाबला भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लीला करण शर्मा से है. लीला करण शर्मा पेशे से वकील हैं और अमरनाथ ज़मीन विवाद के दौरान उन्होंने ही जम्मू में हिंदू प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व किया था.
दरअसल, ग़ुलाम नबी आज़ाद की गठबंधन सरकार ने अमरनाथ मंदिर बोर्ड को लगभग 100 एकड़ ज़मीन देने का निर्देश दिया था, लेकिन पीडीपी के विरोध के कारण सरकार ने ज़मीन वापस ले ली थी. पर्यवेक्षक मानते हैं कि ज़मीन वापसी के विरोध में पिछले साल जम्मू में लगभग दो महीने तक चले प्रदर्शनों में भाजपा प्रत्याशी की भूमिका का लाभ उन्हें इस चुनाव में मिल सकता है. इस सीट पर सिख मतदाताओं की भी अच्छी ख़ासी संख्या है और हाल ही में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से पूर्व केंद्रीय मंत्री जगदीश टाइटलर को क्लीन चिट मिलने से कांग्रेस खेमे की चिंता बढ़ गई है. कांग्रेस के स्टार प्रचारक राहुल गांधी यहाँ प्रचार के अंतिम दिन यानी 14 अप्रैल को आएँगे. इसके अलावा पार्टी मुस्लिम मतदाताओं को कांग्रेस के समर्थन में एकजुट करने के लिए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का दौरा कराने का प्रयास भी कर रही है. इन सबके बावजूद कांग्रेस के लिए चुनौती 2004 के मुक़ाबले काफ़ी मुश्किल है. दूसरी तरफ़, भाजपा नौकरियों और विकास के अलावा राजनीतिक तौर पर जम्मू क्षेत्र की उपेक्षा के मुद्दे को लोगों के बीच उठा रही है. पीडीपी की ताल उधर, पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी के संरक्षक मुफ़्ती मोहम्मद सईद सीमा पर शांति और भारत-पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता फिर शुरू कराने को अपनी उपलब्धियां गिना रहे हैं. राजौरी और पुंछ के पहाड़ी इलाक़े में मुफ़्ती के ये दावे मुस्लिम और सिख मतदाताओं को कांग्रेस से कुछ दूर कर सकते हैं. कांग्रेस का प्रचार बेशक आक्रामक है और वो अपने विरोधियों पर निशाना साध रही है, लेकिन विकास, शांति और ख़ासतौर पर घुसपैठ रोकने के मसलों पर उसके पास कहने के लिए ज़्यादा कुछ नहीं है. इस सीट पर 16 अप्रैल को पहले चरण में मतदान होगा और कुल मिलाकर 21 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं. कांग्रेस और भाजपा के अलावा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के हुसैन अली और पीडीपी के तरलोक सिंह भी किस्मत आजमा रहे हैं. इस संसदीय सीट में लगभग 17 लाख 21 हज़ार 696 मतदाता हैं, जिसमें से आठ लाख 89 हज़ार 562 पुरुष और आठ लाख 32 हज़ार 134 महिला मतदाता हैं. 2004 में मदन लाल शर्मा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के निर्मल सिंह को 17,572 मतों से पराजित किया था. तब कुल मिलाकर 26 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे, जिनमें से 15 निर्दलीय थे. |
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